9 अक्टूबर 2026
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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: वाहन, सारथी, ई-डीएआर और IIB डेटाबेस चार हफ्ते में जोड़ें, मोटर क्लेम होगा आसान

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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: वाहन, सारथी, ई-डीएआर और IIB डेटाबेस चार हफ्ते में जोड़ें, मोटर क्लेम होगा आसान

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय ने मोटर दुर्घटना पीड़ितों के लिए एक बड़ा कदम उठाया है — वाहन, सारथी, ई-डीएआर और IIB को चार हफ्तों में जोड़ने का आदेश। साथ ही बीमा कंपनियों की लापरवाही पर सख्ती, और नवी इंश्योरेंस CEO को अवमानना नोटिस।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 9 अक्टूबर 2026 को केंद्र और राज्यों को चार हफ्तों में वाहन, सारथी, ई-डीएआर और IIB डेटाबेस जोड़ने का निर्देश दिया।
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस प्रसन्ना बी.
वराले की पीठ ने यह आदेश जारी किया।
इंटीग्रेशन हिट-एंड-रन मामलों और PM राहत स्कीम तक भी विस्तारित होगा।
नवी जनरल इंश्योरेंस के MD और CEO वैभव गोयल को अवमानना नोटिस; माफी 'दिखावटी' बताकर खारिज।
SIT न बनाने वाले राज्यों को चार हफ्तों का अंतिम अवसर; अगली सुनवाई 27 नवंबर को।

सर्वोच्च न्यायालय ने 9 अक्टूबर 2026 को केंद्र सरकार और सभी राज्यों को कड़ा निर्देश दिया कि वे चार हफ्तों के भीतर प्रमुख सरकारी और बीमा डेटाबेस — वाहन, सारथी, इलेक्ट्रॉनिक डिटेल्ड एक्सीडेंट रिपोर्ट (ई-डीएआर) पोर्टल और इंश्योरेंस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (IIB) — को आपस में जोड़ें। इस आदेश का उद्देश्य मोटर दुर्घटना क्लेम प्रक्रिया को सरल बनाना और दुर्घटना से जुड़ी सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान सुनिश्चित करना है।

मुख्य न्यायिक निर्देश

जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की खंडपीठ ने सभी राज्यों को आदेश दिया कि दुर्घटना से संबंधित डेटा को नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) द्वारा संचालित ई-डीएआर पोर्टल पर बिना किसी विलंब के अपलोड किया जाए। न्यायालय ने गौर किया कि पोर्टल के सक्रिय होने के बावजूद अत्यंत कम राज्यों ने अब तक डेटा अपलोड करना प्रारंभ किया है, जो कार्यान्वयन में गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।

न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि ई-डीएआर को इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) के अंतर्गत कार्यरत IIB से जोड़ा जाए। इस एकीकरण से दुर्घटना रिपोर्ट, वाहन रिकॉर्ड, बीमा कंपनी के विवरण और पूर्व क्लेम इतिहास का आसान क्रॉस-वेरिफिकेशन संभव होगा।

हिट-एंड-रन और PM राहत योजना तक विस्तार

सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह डेटाबेस इंटीग्रेशन हिट-एंड-रन मामलों और प्रधानमंत्री राहत स्कीम तक भी विस्तारित किया जाएगा। इससे दुर्घटना की सूचना सीधे और तुरंत संबंधित बीमा कंपनियों तक पहुँचाई जा सकेगी, जिससे पीड़ितों को समय पर मुआवज़ा मिलने की संभावना बढ़ेगी। यह व्यवस्था विशेष रूप से उन परिवारों के लिए राहतकारी होगी जो दुर्घटना के बाद कागजी औपचारिकताओं में उलझ जाते हैं।

बीमा कंपनियों पर सख्त रुख, अवमानना नोटिस

यह आदेश तब आया जब न्यायालय ने कई बीमा कंपनियों द्वारा अपने पूर्व आदेशों के अनुपालन की समीक्षा की। जस्टिस अमानुल्लाह की अध्यक्षता वाली पीठ ने उन बीमा कंपनियों के प्रति कड़ा रुख अपनाया जिन्होंने न तो न्यायालय में उपस्थित होने के निर्देश का पालन किया और न ही शपथपत्र दाखिल किए। कुछ बीमा कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (CEO) को अवमानना नोटिस जारी किए गए।

विशेष रूप से, न्यायालय ने नवी जनरल इंश्योरेंस लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी वैभव गोयल की माफी को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि यह 'केवल दिखावे के लिए थी, हृदय से नहीं मांगी गई थी।' न्यायालय ने यह भी कहा कि पूर्व नोटिस पर कार्रवाई न करने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति के विरुद्ध कोई कदम नहीं उठाया गया। गोयल को अवमानना नोटिस जारी किया गया और उन्हें व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया गया, जिसमें यह स्पष्ट करना होगा कि उनके विरुद्ध उचित कार्रवाई क्यों न की जाए।

SIT गठन पर आखिरी मौका

सर्वोच्च न्यायालय ने उन राज्यों को एक अंतिम अवसर प्रदान किया जिन्होंने अदालत के पहले के आदेशों के अनुसार विशेष जाँच दल (SIT) गठित नहीं किए हैं। इन राज्यों को भी चार हफ्तों के भीतर SIT बनाने का निर्देश दिया गया है। इस मामले की अगली सुनवाई 27 नवंबर को दोपहर 2 बजे निर्धारित की गई है।

गौरतलब है कि सड़क दुर्घटनाओं में मुआवज़े की प्रक्रिया भारत में वर्षों से जटिल और धीमी रही है। इस निर्देश से लाखों पीड़ित परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है, बशर्ते केंद्र और राज्य सरकारें समय-सीमा का पालन करें।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन अधिकांश राज्यों ने उस पर डेटा ही नहीं चढ़ाया। बीमा कंपनियों के CEO का अदालती नोटिस को नज़रअंदाज़ करना और 'दिखावटी माफी' का प्रकरण दर्शाता है कि कॉर्पोरेट जवाबदेही न्यायिक दबाव के बिना नहीं आती। असली परीक्षा चार हफ्ते बाद होगी — जब अनुपालन रिपोर्ट आएगी; पिछले कई आदेशों की तरह यह भी कागज़ों तक सिमट जाए, तो दुर्घटना पीड़ितों के लिए न्याय की राह और लंबी हो जाएगी।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने डेटाबेस लिंक करने का आदेश क्यों दिया?
सर्वोच्च न्यायालय ने यह आदेश मोटर दुर्घटना क्लेम प्रक्रिया को सरल और तेज़ बनाने के लिए दिया है। वाहन, सारथी, ई-डीएआर और IIB के एकीकरण से दुर्घटना रिपोर्ट, बीमा विवरण और पूर्व क्लेम का क्रॉस-वेरिफिकेशन तुरंत संभव होगा, जिससे पीड़ित परिवारों को समय पर मुआवज़ा मिल सकेगा।
ई-डीएआर पोर्टल क्या है और यह किसके द्वारा संचालित है?
ई-डीएआर यानी इलेक्ट्रॉनिक डिटेल्ड एक्सीडेंट रिपोर्ट पोर्टल है, जिसे नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) संचालित करता है। इसका उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं की विस्तृत जानकारी डिजिटल रूप से दर्ज करना है, लेकिन अब तक अधिकांश राज्यों ने इस पर डेटा अपलोड नहीं किया है।
नवी जनरल इंश्योरेंस के CEO वैभव गोयल को अवमानना नोटिस क्यों मिला?
न्यायालय के पूर्व आदेशों के बावजूद उपस्थित न होने और शपथपत्र न देने पर वैभव गोयल को अवमानना नोटिस जारी हुआ। उन्होंने माफी मांगी, लेकिन न्यायालय ने उसे 'दिखावटी' बताकर खारिज कर दिया और उन्हें व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल करने को कहा।
किन राज्यों को SIT बनाने का आखिरी मौका दिया गया है?
सर्वोच्च न्यायालय ने उन सभी राज्यों को अंतिम अवसर दिया है जिन्होंने अब तक विशेष जाँच दल (SIT) गठित नहीं किए हैं। इन्हें चार हफ्तों के भीतर SIT बनानी होगी; अगली सुनवाई 27 नवंबर को निर्धारित है।
इस आदेश से आम नागरिकों को क्या फायदा होगा?
डेटाबेस इंटीग्रेशन से मोटर दुर्घटना के बाद बीमा क्लेम की प्रक्रिया तेज़ और पारदर्शी होगी। हिट-एंड-रन पीड़ितों और PM राहत स्कीम के लाभार्थियों को भी इसका सीधा फायदा मिलेगा, क्योंकि दुर्घटना की सूचना स्वतः बीमा कंपनियों तक पहुँच जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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