सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: वाहन, सारथी, ई-डीएआर और IIB डेटाबेस चार हफ्ते में जोड़ें, मोटर क्लेम होगा आसान
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 9 अक्टूबर 2026 को केंद्र सरकार और सभी राज्यों को कड़ा निर्देश दिया कि वे चार हफ्तों के भीतर प्रमुख सरकारी और बीमा डेटाबेस — वाहन, सारथी, इलेक्ट्रॉनिक डिटेल्ड एक्सीडेंट रिपोर्ट (ई-डीएआर) पोर्टल और इंश्योरेंस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (IIB) — को आपस में जोड़ें। इस आदेश का उद्देश्य मोटर दुर्घटना क्लेम प्रक्रिया को सरल बनाना और दुर्घटना से जुड़ी सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान सुनिश्चित करना है।
मुख्य न्यायिक निर्देश
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की खंडपीठ ने सभी राज्यों को आदेश दिया कि दुर्घटना से संबंधित डेटा को नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) द्वारा संचालित ई-डीएआर पोर्टल पर बिना किसी विलंब के अपलोड किया जाए। न्यायालय ने गौर किया कि पोर्टल के सक्रिय होने के बावजूद अत्यंत कम राज्यों ने अब तक डेटा अपलोड करना प्रारंभ किया है, जो कार्यान्वयन में गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि ई-डीएआर को इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) के अंतर्गत कार्यरत IIB से जोड़ा जाए। इस एकीकरण से दुर्घटना रिपोर्ट, वाहन रिकॉर्ड, बीमा कंपनी के विवरण और पूर्व क्लेम इतिहास का आसान क्रॉस-वेरिफिकेशन संभव होगा।
हिट-एंड-रन और PM राहत योजना तक विस्तार
सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह डेटाबेस इंटीग्रेशन हिट-एंड-रन मामलों और प्रधानमंत्री राहत स्कीम तक भी विस्तारित किया जाएगा। इससे दुर्घटना की सूचना सीधे और तुरंत संबंधित बीमा कंपनियों तक पहुँचाई जा सकेगी, जिससे पीड़ितों को समय पर मुआवज़ा मिलने की संभावना बढ़ेगी। यह व्यवस्था विशेष रूप से उन परिवारों के लिए राहतकारी होगी जो दुर्घटना के बाद कागजी औपचारिकताओं में उलझ जाते हैं।
बीमा कंपनियों पर सख्त रुख, अवमानना नोटिस
यह आदेश तब आया जब न्यायालय ने कई बीमा कंपनियों द्वारा अपने पूर्व आदेशों के अनुपालन की समीक्षा की। जस्टिस अमानुल्लाह की अध्यक्षता वाली पीठ ने उन बीमा कंपनियों के प्रति कड़ा रुख अपनाया जिन्होंने न तो न्यायालय में उपस्थित होने के निर्देश का पालन किया और न ही शपथपत्र दाखिल किए। कुछ बीमा कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (CEO) को अवमानना नोटिस जारी किए गए।
विशेष रूप से, न्यायालय ने नवी जनरल इंश्योरेंस लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी वैभव गोयल की माफी को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि यह 'केवल दिखावे के लिए थी, हृदय से नहीं मांगी गई थी।' न्यायालय ने यह भी कहा कि पूर्व नोटिस पर कार्रवाई न करने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति के विरुद्ध कोई कदम नहीं उठाया गया। गोयल को अवमानना नोटिस जारी किया गया और उन्हें व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया गया, जिसमें यह स्पष्ट करना होगा कि उनके विरुद्ध उचित कार्रवाई क्यों न की जाए।
SIT गठन पर आखिरी मौका
सर्वोच्च न्यायालय ने उन राज्यों को एक अंतिम अवसर प्रदान किया जिन्होंने अदालत के पहले के आदेशों के अनुसार विशेष जाँच दल (SIT) गठित नहीं किए हैं। इन राज्यों को भी चार हफ्तों के भीतर SIT बनाने का निर्देश दिया गया है। इस मामले की अगली सुनवाई 27 नवंबर को दोपहर 2 बजे निर्धारित की गई है।
गौरतलब है कि सड़क दुर्घटनाओं में मुआवज़े की प्रक्रिया भारत में वर्षों से जटिल और धीमी रही है। इस निर्देश से लाखों पीड़ित परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है, बशर्ते केंद्र और राज्य सरकारें समय-सीमा का पालन करें।