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डिजिटल अरेस्ट के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई अगली सप्ताह, जानें पूरी जानकारी

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डिजिटल अरेस्ट के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई अगली सप्ताह, जानें पूरी जानकारी

सारांश

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में बढ़ते डिजिटल अरेस्ट के मामलों पर स्वतः संज्ञान लिया है। एक हफ्ते बाद इस मामले की सुनवाई की जाएगी। जानिए इस मुद्दे की विस्तृत जानकारी और सरकार की तैयारियों के बारे में।

मुख्य बातें

डिजिटल अरेस्ट के मामलों में वृद्धि पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई होगी।
सीबीआई को जांच का जिम्मा सौंपा गया है।
सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है।
आरबीआई की एसओपी में त्वरित कार्रवाई के प्रावधान शामिल हैं।
कोर्ट ने चार सप्ताह में एमओयू का ड्राफ्ट तैयार करने का आदेश दिया है।

नई दिल्ली, 16 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। देशभर में डिजिटल अरेस्ट के मामलों में वृद्धि को देखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई अगले हफ्ते होगी। सीजेआई सूर्यकांत की बेंच के समक्ष अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि ने कहा कि हमने इस मामले में एक स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत की है, जिसे कोर्ट द्वारा पढ़ा जाएगा, इसके बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।

पिछली सुनवाई में, सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट के मामलों की जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंपा था। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कोर्ट को सूचित किया था कि इन मामलों से निपटने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है, जिसके अध्यक्ष गृह मंत्रालय के विशेष सचिव (आंतरिक सुरक्षा) हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने 9 फरवरी को डिजिटल अरेस्ट के मामलों पर सुनवाई करते हुए कहा था कि बैंक अधिकारी भी इन घोटालों में शामिल पाए गए हैं, खासकर वरिष्ठ नागरिक इसके शिकार हो रहे हैं। कोर्ट ने एक रिटायर्ड दंपति का उदाहरण दिया, जिनकी जीवनभर की बचत ठगों ने लूट ली।

अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट के मामलों से निपटने के लिए एक व्यापक एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) तैयार की गई है। कोर्ट ने इसे प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए आवश्यक निर्देश दिए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने आरबीआई की एसओपी का उल्लेख किया, जिसमें साइबर धोखाधड़ी की आशंका होने पर बैंकों द्वारा अस्थायी डेबिट होल्ड लगाने जैसी त्वरित कार्रवाइयों का प्रावधान है। कोर्ट ने गृह मंत्रालय से कहा कि 2 जनवरी 2026 की एसओपी को पूरे देश में लागू किया जाए और अंतर-एजेंसी समन्वय सुनिश्चित किया जाए।

कोर्ट ने चार सप्ताह के भीतर एमओयू (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) का ड्राफ्ट तैयार करने का आदेश दिया। साथ ही, सीबीआई को डिजिटल अरेस्ट के मामलों की पहचान करने और जांच के निर्देश दिए गए थे। आरबीआई को बैंकों को उचित कदम उठाने का आदेश देने को कहा गया था। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को समय पर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया था।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि डिजिटल अरेस्ट के मामलों में वृद्धि ने समाज के एक बड़े हिस्से को प्रभावित किया है। यह सुनवाई न केवल कानूनी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का एक प्रयास भी है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डिजिटल अरेस्ट क्या है?
डिजिटल अरेस्ट का अर्थ है, जब किसी व्यक्ति को इंटरनेट या डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से धोखाधड़ी का शिकार बनाकर अवैध रूप से गिरफ्तार किया जाता है।
सुप्रीम कोर्ट कब सुनवाई करेगा?
सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर एक हफ्ते बाद सुनवाई करेगा।
सीबीआई को क्या जिम्मेदारी दी गई है?
सीबीआई को डिजिटल अरेस्ट के मामलों की जांच का जिम्मा सौंपा गया है।
सरकार ने इस मामले में क्या कदम उठाए हैं?
सरकार ने डिजिटल अरेस्ट के मामलों से निपटने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है।
आरबीआई की एसओपी में क्या प्रावधान है?
आरबीआई की एसओपी में साइबर धोखाधड़ी की आशंका होने पर बैंकों द्वारा अस्थायी डेबिट होल्ड लगाने का प्रावधान है।
राष्ट्र प्रेस
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