25 सितंबर 2026
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IRDAI के नए कमीशन नियम: इंश्योरेंस इकोसिस्टम में बड़ा बदलाव, पॉलिसीहोल्डर्स को सीधा फायदा

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IRDAI के नए कमीशन नियम: इंश्योरेंस इकोसिस्टम में बड़ा बदलाव, पॉलिसीहोल्डर्स को सीधा फायदा

सारांश

IRDAI के कंसल्टेशन पेपर में पहली बार कमीशन को 60% से घटाकर 5-20% की सीमा में लाने का प्रस्ताव है। डीलर-केंद्रित मॉडल टूट सकता है, डिजिटल चैनलों को बढ़ावा मिलेगा और पॉलिसीहोल्डर्स को सीधा फायदा होने की उम्मीद — बशर्ते अंतिम नियम और ट्रांजिशन फ्रेमवर्क प्रभावी रहें।

मुख्य बातें

IRDAI ने 25 सितंबर 2026 को इंश्योरेंस वितरण सुधारों पर कंसल्टेशन पेपर जारी किया, जिसमें उत्पाद-आधारित कमीशन कैप का प्रस्ताव है।
मौजूदा MISP सिस्टम की जगह नया IDE (इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन एंटिटी) ढाँचा आएगा; पहले साल का कमीशन 5% से 20% के बीच सीमित होगा, जो पहले 60% तक जाता था।
नए वाहनों के मोटर इंश्योरेंस पर थर्ड-पार्टी प्रीमियम का कमीशन शून्य , ओन-डैमेज पर अधिकतम 5% करने का प्रस्ताव।
हेल्थ इंश्योरेंस में पहली बार का कमीशन 15%-20% , रिन्यूअल व पोर्टिंग पर 5%-10% तक सीमित करने की बात।
डीलर अब कैशलेस रिपेयर से इनकार नहीं कर सकेंगे; ग्राहकों को बीमा सुगम डिजिटल प्लेटफॉर्म का विकल्प अनिवार्य रूप से बताना होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार अंतिम असर IRDAI के अंतिम नियमों और ट्रांजिशन फ्रेमवर्क पर निर्भर करेगा।

बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने 25 सितंबर 2026 को एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है, जिसमें देश के इंश्योरेंस वितरण ढाँचे में व्यापक संरचनात्मक सुधारों का प्रस्ताव रखा गया है। इस प्रस्ताव में प्रोडक्ट के अनुसार कमीशन कैप की नई व्यवस्था, पारदर्शिता में वृद्धि और बड़े पैमाने पर गलत तरीके से पॉलिसी बेचने पर रोक के उपाय शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि ये प्रस्ताव लागू होते हैं तो पॉलिसीहोल्डर्स को सीधा लाभ मिलेगा, हालाँकि बैंक-एश्योरेंस पार्टनर और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) जैसे वितरकों के मार्जिन पर तत्काल दबाव भी पड़ेगा।

मुख्य प्रस्ताव: तीन-स्तरीय ढाँचा और कमीशन सीमाएँ

IRDAI के कंसल्टेशन पेपर में एक सरलीकृत तीन-स्तरीय वितरण ढाँचे का प्रस्ताव है, जो मौजूदा मोटर इंश्योरेंस सर्विस प्रोवाइडर (MISP) सिस्टम की जगह एक व्यापक इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन एंटिटी (IDE) सिस्टम लाएगा। ड्राफ्ट दस्तावेज़ के अनुसार, डिस्ट्रीब्यूशन संस्थाओं के लिए पहले साल का कमीशन अवधि के आधार पर 5% से 20% के बीच सीमित किया जाएगा — जो पहले के उन प्रभावी पेआउट से काफी कम है, जो प्रमोशनल खर्च और रिवॉर्ड मिलाकर 60% तक पहुँच जाते थे।

नए वाहनों के मोटर इंश्योरेंस के लिए थर्ड-पार्टी प्रीमियम पर कमीशन शून्य और ओन-डैमेज व संबंधित कवर के लिए अधिकतम 5% रखने का सुझाव दिया गया है। इसके अलावा, 'टेक्नोलॉजी, जागरूकता और उससे जुड़े खर्च' भी इस कमीशन सीमा के दायरे में आ जाएंगे।

हेल्थ इंश्योरेंस पर असर

हेल्थ इंश्योरेंस सेगमेंट में पहली बार के कमीशन को 15% से 20% के बीच तय करने का प्रस्ताव है, जबकि रिन्यूअल और पोर्टिंग पर पेआउट को घटाकर मात्र 5% से 10% तक सीमित करने की बात कही गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे ग्राहकों पर प्रीमियम का बोझ दीर्घकाल में कम हो सकता है, भले ही शुरुआत में वितरकों को समायोजन करना पड़े।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

डेलॉइट इंडिया के पार्टनर देबाशीष बनर्जी ने कहा, 'आखिरकार, इस प्रस्ताव का मकसद डिजिटल तरीकों को अपनाना, पॉलिसी को लंबे समय तक बनाए रखना और एक ऐसा मार्केट बनाना है जो टिकाऊ हो और ग्राहकों को प्राथमिकता दे। जैसा कि कहा जाता है, जरूरत ही आविष्कार की जननी है, और ये बदलाव कंपनियों को नए तरीके सोचने और अपनाने के लिए मजबूर करेंगे।'

शार्दुल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी की पार्टनर शैलजा लाल ने कहा, 'इन बदलावों का ऑटोमोबाइल डीलरों, OEM से जुड़े ब्रोकर्स, इंश्योरेंस कंपनियों और मोटर इंश्योरेंस बेचने वाले अन्य लोगों पर बहुत ज्यादा असर पड़ेगा। नई गाड़ियों की पॉलिसी से होने वाली शुरुआती कमाई कम होने और डीलर से जुड़े समझौतों के कड़े होने से, डिस्ट्रीब्यूशन मार्जिन और कम हो सकता है।'

लाल ने यह भी जोड़ा, 'इन सुधारों से डीलर-आधारित पारंपरिक मॉडल बदल सकता है, जिसमें इंश्योरेंस की बिक्री, गाड़ी की फाइनेंसिंग और बिक्री के बाद की सर्विसिंग आपस में गहराई से जुड़ी होती हैं। आय का दबाव डिस्ट्रीब्यूटर्स को रिन्यूअल, सर्विसिंग, टेक्नोलॉजी और अन्य मंजूर वैल्यू-एडेड सेवाओं पर ज्यादा ध्यान देने के लिए प्रेरित कर सकता है।'

ग्राहकों को होगा सीधा फायदा

प्रस्ताव के तहत डीलरों को केवल इसलिए कैशलेस रिपेयर से इनकार करने की अनुमति नहीं होगी क्योंकि ग्राहक ने इंश्योरेंस कहीं और से खरीदा है। यह प्रावधान ग्राहकों को डीलर-केंद्रित बंधन से मुक्त करेगा। साथ ही, IRDAI ग्राहकों को 'बीमा सुगम' जैसे वैकल्पिक डिजिटल चैनलों तक अधिक पहुँच देने का प्रस्ताव रख रहा है। डीलरों के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे गाड़ी बेचते समय ग्राहकों को इस विकल्प के बारे में स्पष्ट रूप से सूचित करें।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब भारत में बीमा पहुँच (insurance penetration) अभी भी वैश्विक औसत से काफी नीचे है। IRDAI का यह कदम 'बीमा फॉर ऑल 2047' के उसके दीर्घकालिक लक्ष्य से सीधे जुड़ा है।

आगे क्या होगा

जानकारों का कहना है कि इस प्रस्ताव का अंतिम असर इस बात पर निर्भर करेगा कि IRDAI आखिरकार कौन से नियम अपनाता है और उनके साथ कैसा ट्रांजिशन फ्रेमवर्क लागू किया जाता है। कंसल्टेशन प्रक्रिया के बाद अंतिम नियम जारी होने की उम्मीद है, जिसके बाद इंश्योरेंस कंपनियों और वितरकों को अपने व्यापार मॉडल को नए सिरे से तैयार करना होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली जाँच यह है कि क्या कमीशन कैप से वास्तव में प्रीमियम घटेगा या बस वितरकों की आय का रास्ता बदलेगा — अतीत में ऐसे सुधारों के बाद कुछ कंपनियाँ 'प्रमोशनल खर्च' के नए रूप तलाशती रही हैं। डीलर-बंधन तोड़ने और 'बीमा सुगम' को बढ़ावा देने का कदम सही दिशा में है, लेकिन डिजिटल साक्षरता की खाई पाटे बिना यह लाभ केवल शहरी उपभोक्ताओं तक सिमट सकता है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि ट्रांजिशन फ्रेमवर्क कितना कड़ा होगा — क्योंकि बिना दाँत वाले नियम अक्सर उद्योग की लॉबी के सामने नरम पड़ जाते हैं।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

IRDAI का नया कंसल्टेशन पेपर क्या है?
IRDAI ने 'बीमा वितरण के अर्थशास्त्र को फिर से तय करने' पर एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है, जिसमें इंश्योरेंस वितरण ढाँचे में व्यापक सुधारों का प्रस्ताव है। इसमें प्रोडक्ट-आधारित कमीशन कैप, नया IDE सिस्टम और ग्राहकों के लिए डिजिटल विकल्प अनिवार्य बनाना शामिल है।
नए नियमों से मोटर इंश्योरेंस कमीशन में क्या बदलाव होगा?
प्रस्ताव के अनुसार, नए वाहनों के मोटर इंश्योरेंस पर थर्ड-पार्टी प्रीमियम का कमीशन शून्य और ओन-डैमेज व संबंधित कवर पर अधिकतम 5% रखने का सुझाव है। यह पहले के उन पेआउट से काफी कम है जो प्रमोशनल खर्च मिलाकर 60% तक पहुँच जाते थे।
पॉलिसीहोल्डर्स को इन बदलावों से क्या फायदा होगा?
ग्राहकों को अब डीलर के दबाव में आकर इंश्योरेंस खरीदने की जरूरत नहीं होगी, और कैशलेस रिपेयर से इनकार नहीं किया जा सकेगा। साथ ही, 'बीमा सुगम' जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के बारे में डीलर द्वारा अनिवार्य सूचना देने से ग्राहकों को अधिक विकल्प और पारदर्शिता मिलेगी।
हेल्थ इंश्योरेंस कमीशन पर क्या प्रस्ताव है?
कंसल्टेशन पेपर में हेल्थ इंश्योरेंस के पहली बार के कमीशन को 15% से 20% के बीच तय करने और रिन्यूअल व पोर्टिंग पेआउट को 5% से 10% तक सीमित करने का प्रस्ताव है। यह मौजूदा व्यवस्था से उल्लेखनीय कटौती है।
ये नियम कब लागू होंगे और इसका फैसला कैसे होगा?
अभी ये प्रस्ताव कंसल्टेशन चरण में हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, अंतिम असर इस बात पर निर्भर करेगा कि IRDAI कौन से नियम अंतिम रूप से अपनाता है और ट्रांजिशन फ्रेमवर्क कितना कड़ा होता है। कंसल्टेशन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अंतिम नियमों की तारीख तय होगी।
राष्ट्र प्रेस
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