30 जून 2026
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आईआरडीएआई बैंकों में बीमा मिस-सेलिंग रोकने के लिए नए दिशानिर्देश जारी करेगा, 'बीमा सुगम' सितंबर 2026 तक लॉन्च

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आईआरडीएआई बैंकों में बीमा मिस-सेलिंग रोकने के लिए नए दिशानिर्देश जारी करेगा, 'बीमा सुगम' सितंबर 2026 तक लॉन्च

सारांश

आईआरडीएआई चेयरपर्सन अजय सेठ ने मंगलवार को मुंबई में बड़े ऐलान किए — बैंकों में बीमा मिस-सेलिंग रोकने के लिए नए दिशानिर्देश, सितंबर 2026 तक 'बीमा सुगम' का डिजिटल लॉन्च, और 100% एफडीआई के बाद विदेशी निवेश की पहली मंजूरी। बीमा क्षेत्र में पारदर्शिता की दिशा में यह बड़ा कदम है।

मुख्य बातें

आईआरडीएआई जल्द ही बैंकों में बीमा उत्पादों की मिस-सेलिंग रोकने के लिए नए दिशानिर्देश जारी करेगा।
'बीमा सुगम' डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म सितंबर 2026 तक लॉन्च होने की संभावना; पहले मोटर, फिर हेल्थ, फिर टर्म लाइफ इंश्योरेंस उपलब्ध होगा।
बीमा क्षेत्र में 100% एफडीआई को ऑटोमैटिक रूट से मंजूरी; एक विदेशी कंपनी को हिस्सेदारी बढ़ाने की अनुमति मिली, एक प्रस्ताव समीक्षाधीन।
एलआईसी में विदेशी निवेश की सीमा 20% पर बनाए रखी गई है।
बीमा कंपनियों के केएमपी का बोनस अब क्लेम निपटान, शिकायत समाधान और ग्राहक सेवा जैसे मापदंडों से जुड़ेगा।
नियामक ने एक नई जनरल इंश्योरेंस कंपनी को लाइसेंस दिया — हालिया समय में दूसरा नया लाइसेंस।

बीमा नियामक भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) जल्द ही बैंकों द्वारा बीमा उत्पादों की गलत बिक्री (मिस-सेलिंग) पर अंकुश लगाने के लिए नए दिशानिर्देश जारी करने की तैयारी में है। आईआरडीएआई के चेयरपर्सन अजय सेठ ने मंगलवार, 30 जून को मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत में यह जानकारी दी। नियामक का स्पष्ट उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्राहकों को उनकी वास्तविक ज़रूरत और पात्रता के अनुरूप ही बीमा उत्पाद बेचे जाएँ।

मिस-सेलिंग रोकने की रणनीति

अजय सेठ ने स्पष्ट किया कि आईआरडीएआई सख्त प्रतिबंध थोपने की बजाय प्रोडक्ट सूटेबिलिटी फ्रेमवर्क के रूप में मार्गदर्शक सिद्धांत जारी करेगा। इस ढाँचे के तहत बैंकों और अन्य वितरकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे ग्राहक की प्रोफ़ाइल के अनुकूल उत्पाद ही प्रस्तुत करें। गौरतलब है कि बैंक-बीमा (बैंकएश्योरेंस) चैनल के ज़रिए मिस-सेलिंग की शिकायतें वर्षों से नियामक के समक्ष एक प्रमुख चिंता रही हैं।

बीमा सुगम: डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म की राह

चेयरपर्सन ने बताया कि 'बीमा सुगम' डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के सितंबर 2026 तक लॉन्च होने की संभावना है। शुरुआत में इस पर मोटर इंश्योरेंस उपलब्ध कराया जाएगा, इसके बाद हेल्थ इंश्योरेंस और फिर टर्म लाइफ इंश्योरेंस को चरणबद्ध तरीके से जोड़ा जाएगा। इस प्लेटफ़ॉर्म का उद्देश्य बीमा खरीदने की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और पूरी तरह डिजिटल बनाना है।

100% एफडीआई: विदेशी निवेश की नई राह

केंद्र सरकार द्वारा बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को ऑटोमैटिक रूट के तहत मंजूरी दिए जाने के बाद, अजय सेठ ने बताया कि एक विदेशी बीमा कंपनी को किसी भारतीय जीवन बीमा कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की अनुमति पहले ही दी जा चुकी है, जबकि एक अन्य प्रस्ताव अभी समीक्षाधीन है। हालाँकि, इस मंजूरी के लिए बीमा अधिनियम, 1938 के प्रावधानों का पालन और आईआरडीएआई की स्वीकृति अनिवार्य होगी। भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के लिए अलग व्यवस्था बनाए रखी गई है — उसमें विदेशी निवेश की अधिकतम सीमा 20 प्रतिशत ही रहेगी, वह भी ऑटोमैटिक रूट के तहत। नई नीति के तहत बीमा ब्रोकर, री-इंश्योरेंस ब्रोकर, बीमा सलाहकार, कॉरपोरेट एजेंट, थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर (टीपीए), सर्वेयर, लॉस असेसर, मैनेजिंग जनरल एजेंट और इंश्योरेंस रिपॉजिटरी जैसे बीमा मध्यस्थों में भी 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति दी गई है।

शीर्ष अधिकारियों के वेतन पर नई शर्तें

आईआरडीएआई ने हाल ही में बीमा कंपनियों के मुख्य प्रबंधन कर्मियों (केएमपी) के वेतन और बोनस से जुड़े नियम भी कड़े किए हैं। अब उनके प्रोत्साहन और बोनस को क्लेम निपटान की गति, शिकायतों के समाधान, उत्पादों के प्रदर्शन और ग्राहक सेवा की गुणवत्ता जैसे मापदंडों से सीधे जोड़ा जाएगा। इसके अलावा, नियामक ने हाल ही में एक नई जनरल इंश्योरेंस कंपनी को लाइसेंस भी प्रदान किया है, जो हालिया समय में दिया गया दूसरा नया लाइसेंस है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब नियामक बीमा क्षेत्र में पारदर्शिता और ग्राहक संरक्षण को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बना रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 'मार्गदर्शक सिद्धांत' कितने दाँतदार होंगे — बैंकएश्योरेंस मिस-सेलिंग की शिकायतें वर्षों से नियामक के रिकॉर्ड में दर्ज हैं, फिर भी यह चलन जारी रहा। 100% एफडीआई की अनुमति से बाज़ार में पूँजी और प्रतिस्पर्धा दोनों आ सकती हैं, किंतु एलआईसी के लिए 20% की सीमा बनाए रखना यह दर्शाता है कि सरकार अभी भी सार्वजनिक क्षेत्र के बीमा को विशेष संरक्षण देने की नीति पर कायम है। 'बीमा सुगम' की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि यह प्लेटफ़ॉर्म ग्रामीण और अर्ध-शहरी उपभोक्ताओं तक कितनी सहजता से पहुँच पाता है — जो अभी भी बीमा से सबसे दूर हैं।
RashtraPress
30 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईआरडीएआई बीमा मिस-सेलिंग रोकने के लिए क्या कदम उठाने जा रहा है?
आईआरडीएआई जल्द ही बैंकों के लिए नए दिशानिर्देश जारी करेगा, जिनके तहत ग्राहकों को उनकी ज़रूरत और पात्रता के अनुसार ही बीमा उत्पाद बेचे जाएँगे। नियामक एक प्रोडक्ट सूटेबिलिटी फ्रेमवर्क भी लाएगा, जो सख्त प्रतिबंधों की बजाय मार्गदर्शक सिद्धांतों पर आधारित होगा।
'बीमा सुगम' प्लेटफ़ॉर्म क्या है और यह कब लॉन्च होगा?
'बीमा सुगम' आईआरडीएआई का डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म है, जो बीमा खरीदने की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और ऑनलाइन बनाएगा। इसके सितंबर 2026 तक लॉन्च होने की संभावना है — पहले मोटर इंश्योरेंस, फिर हेल्थ और टर्म लाइफ इंश्योरेंस चरणबद्ध तरीके से जोड़े जाएँगे।
बीमा क्षेत्र में 100% एफडीआई का क्या मतलब है?
केंद्र सरकार ने बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को ऑटोमैटिक रूट के तहत मंजूरी दी है, जिससे विदेशी कंपनियाँ भारतीय बीमाकर्ताओं में पूर्ण स्वामित्व ले सकती हैं। यह सुविधा बीमा ब्रोकर, री-इंश्योरेंस ब्रोकर और टीपीए जैसे मध्यस्थों पर भी लागू होगी, हालाँकि बीमा अधिनियम 1938 का पालन और आईआरडीएआई की मंजूरी अनिवार्य रहेगी।
एलआईसी में विदेशी निवेश की सीमा क्या रहेगी?
भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के लिए अलग व्यवस्था बनाए रखी गई है — उसमें विदेशी निवेश की अधिकतम सीमा 20 प्रतिशत ही रहेगी और यह भी ऑटोमैटिक रूट के तहत होगी। अन्य निजी बीमा कंपनियों में 100% एफडीआई की अनुमति है।
बीमा कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के वेतन नियमों में क्या बदलाव हुआ है?
आईआरडीएआई ने बीमा कंपनियों के मुख्य प्रबंधन कर्मियों (केएमपी) के बोनस और प्रोत्साहन को अब क्लेम निपटान की गति, शिकायत समाधान, उत्पाद प्रदर्शन और ग्राहक सेवा की गुणवत्ता जैसे मापदंडों से जोड़ दिया है। इसका उद्देश्य अधिकारियों को ग्राहक-हित में काम करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
राष्ट्र प्रेस
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