आईडीबीआई बैंक विनिवेश जारी रहेगा, सरकारी बैंकों के विलय पर कोई प्रस्ताव नहीं — निर्मला सीतारमण

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आईडीबीआई बैंक विनिवेश जारी रहेगा, सरकारी बैंकों के विलय पर कोई प्रस्ताव नहीं — निर्मला सीतारमण

सारांश

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पुणे में स्पष्ट किया कि आईडीबीआई बैंक का विनिवेश जारी रहेगा। 72,000 करोड़ रुपए की 60.72%25 हिस्सेदारी बिक्री की योजना है। सरकारी बैंकों के विलय पर फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं, उच्च स्तरीय समिति करेगी समीक्षा।

Key Takeaways

  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 24 अप्रैल, 2025 को पुणे में पुष्टि की कि आईडीबीआई बैंक विनिवेश प्रक्रिया जारी रहेगी।
  • सरकार की 30.48%25 और एलआईसी की 30.24%25 हिस्सेदारी मिलाकर कुल 60.72%25 बिक्री की योजना है, जिसका मूल्य लगभग 72,000 करोड़ रुपए है।
  • आईडीबीआई बैंक विनिवेश की प्रक्रिया 7 जनवरी, 2023 से चल रही है लेकिन पिछली बोलियां रिजर्व प्राइस से नीचे रहीं।
  • सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के विलय पर फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं, एक उच्च स्तरीय बैंकिंग समिति समीक्षा करेगी।
  • वित्त मंत्री ने कहा कि घरेलू खपत और कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और निर्यातकों ने वैश्विक चुनौतियों के बावजूद अच्छा प्रदर्शन किया।
  • यह बयान SBI महाराष्ट्र सर्कल के नए स्थानीय मुख्यालय परिसर के उद्घाटन के अवसर पर दिया गया।

पुणे, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि आईडीबीआई बैंक के विनिवेश की प्रक्रिया आगे जारी रहेगी और फिलहाल सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के विलय को लेकर सरकार के पास कोई नया प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। उन्होंने यह बात पुणे में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के महाराष्ट्र सर्कल के नए स्थानीय मुख्यालय परिसर के उद्घाटन के अवसर पर पत्रकारों से बातचीत में कही।

विनिवेश की मौजूदा स्थिति

आईडीबीआई बैंक विनिवेश की प्रक्रिया 7 जनवरी, 2023 से आधिकारिक रूप से शुरू हुई थी। मूल योजना के तहत केंद्र सरकार को बैंक में अपनी 30.48 प्रतिशत हिस्सेदारी और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) को अपनी 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचनी थी। इस प्रकार कुल 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बिक्री के लिए रखी गई थी, जिसका संयुक्त बाज़ार मूल्य लगभग 72,000 करोड़ रुपए आंका गया था।

हालांकि इस प्रक्रिया में अनिश्चितता तब उत्पन्न हुई जब पिछले बोली दौर में प्राप्त बोलियां सरकार द्वारा निर्धारित रिजर्व प्राइस से काफी नीचे रहीं। इसके बावजूद वित्त मंत्री ने संकेत दिया कि सरकार इस विनिवेश को पूरा करने के अपने इरादे पर कायम है।

बैंक विलय पर सरकार का रुख

सीतारमण ने यह भी स्पष्ट किया कि सार्वजनिक क षेत्र के बैंकों के आपसी विलय को लेकर अभी कोई ठोस योजना नहीं है। उन्होंने बताया कि एक उच्च स्तरीय बैंकिंग समिति इस विषय पर विचार करेगी और उसकी सिफारिशों के आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा। गौरतलब है कि 2017-2019 के बीच सरकार ने कई सरकारी बैंकों का विलय किया था, जिसमें देना बैंक और विजया बैंक को बैंक ऑफ बड़ौदा में मिलाया गया था।

भारतीय अर्थव्यवस्था और घरेलू खपत पर जोर

वित्त मंत्री ने देश की आर्थिक मजबूती का श्रेय घरेलू गतिविधियों, विशेष रूप से कृषि क्षेत्र और आंतरिक खपत को दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था का विशाल आकार और मजबूत घरेलू मांग बड़े और सक्षम बैंकों की आवश्यकता को रेखांकित करती है।

सीतारमण ने कहा कि घरेलू खपत और घरेलू अर्थव्यवस्था की अच्छी प्रगति ने देश का साथ दिया है। हमारे निर्यातकों ने वैश्विक अनिश्चितताओं और टैरिफ चुनौतियों के बावजूद नए बाजार खोजकर बेहतरीन प्रदर्शन किया है।

विश्लेषण: विनिवेश में देरी क्यों मायने रखती है

यह ध्यान देने योग्य है कि आईडीबीआई बैंक विनिवेश को पूरा करने की समय-सीमा कई बार टल चुकी है। 2021-22 के बजट में इसे प्राथमिकता दी गई थी, लेकिन बाज़ार परिस्थितियों और नियामकीय प्रक्रियाओं के कारण यह लंबित है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस विनिवेश से प्राप्त राशि सरकार के राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

किसी भी संभावित खरीदार को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और सेबी की मंजूरी भी लेनी होगी, जो इस प्रक्रिया को और जटिल बनाती है। आने वाले महीनों में उच्च स्तरीय बैंकिंग समिति की रिपोर्ट और नए बोली दौर की तारीखें इस दिशा में अहम संकेत देंगी।

Point of View

बल्कि सरकार की विनिवेश नीति की विश्वसनीयता की परीक्षा है। जब बोलियां रिजर्व प्राइस से नीचे आती हैं और समय-सीमाएं बार-बार टलती हैं, तो केवल आश्वासन देना पर्याप्त नहीं होता। विडंबना यह है कि एलआईसी जैसी सार्वजनिक संस्था की हिस्सेदारी बेचने में सबसे बड़ी बाधा भी सरकारी नियामकीय जटिलताएं ही हैं। निवेशकों को ठोस समय-सीमा और पारदर्शिता चाहिए, न कि सिर्फ इरादे की पुनरावृत्ति।
NationPress
24/04/2026

Frequently Asked Questions

आईडीबीआई बैंक विनिवेश की प्रक्रिया कब शुरू हुई थी?
आईडीबीआई बैंक विनिवेश की आधिकारिक प्रक्रिया 7 जनवरी, 2023 को शुरू हुई थी। इसमें सरकार की 30.48%25 और एलआईसी की 30.24%25 हिस्सेदारी मिलाकर कुल 60.72%25 बेची जानी है।
आईडीबीआई बैंक की हिस्सेदारी की कुल कीमत कितनी है?
पहले के बाज़ार मूल्यों के आधार पर आईडीबीआई बैंक में बिक्री के लिए रखी गई 60.72%25 हिस्सेदारी का संयुक्त मूल्य लगभग 72,000 करोड़ रुपए आंका गया है। हालांकि पिछले बोली दौर में बोलियां रिजर्व प्राइस से नीचे रहीं।
क्या सरकारी बैंकों का विलय होने वाला है?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के विलय को लेकर कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। एक उच्च स्तरीय बैंकिंग समिति इस विषय की समीक्षा करेगी।
निर्मला सीतारमण ने भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में क्या कहा?
वित्त मंत्री ने कहा कि भारत की आर्थिक वृद्धि घरेलू गतिविधियों और कृषि पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक टैरिफ चुनौतियों के बावजूद भारतीय निर्यातकों ने नए बाज़ार खोजकर अच्छा प्रदर्शन किया है।
आईडीबीआई बैंक विनिवेश में देरी क्यों हो रही है?
पिछले बोली दौर में प्राप्त बोलियां सरकार द्वारा निर्धारित रिजर्व प्राइस से काफी नीचे रहीं, जिससे प्रक्रिया में अनिश्चितता आई। इसके अलावा आरबीआई और सेबी की नियामकीय मंजूरियां भी इस प्रक्रिया को जटिल बनाती हैं।
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