बीमा पहुंच बढ़ाने को प्राथमिकता दें कंपनियाँ — DFS सचिव एम. नागराजू की सलाह
सारांश
मुख्य बातें
वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के सचिव एम. नागराजू ने 5 मई 2026 को तीन प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों के साथ हुई एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि कंपनियों को अपनी नीतियाँ बड़ी पॉलिसियों के बजाय अधिकतम आबादी तक बीमा कवरेज पहुँचाने के लक्ष्य के इर्द-गिर्द तैयार करनी चाहिए। नई दिल्ली में आयोजित इस बैठक में लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (LIC), जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (GIC) और ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (OICL) के विजन रणनीति दस्तावेजों की व्यापक समीक्षा की गई।
बैठक का उद्देश्य और प्रमुख निर्देश
नागराजू ने जनसंख्या के बड़े वर्ग तक बीमा कवरेज विस्तार को अनिवार्य बताते हुए कंपनियों को सलाह दी कि वे बड़ी पॉलिसियों पर एकाग्रता के बजाय अधिकतम व्यक्तियों को बीमा के दायरे में लाने को प्राथमिकता दें। वित्त मंत्रालय के एक दस्तावेज़ के अनुसार, कंपनियों को हानि अनुपात कम करने के लिए निवेश एवं बीमा रणनीतियाँ तैयार करने के भी निर्देश दिए गए।
बैठक में मध्यम अवधि (तीन वर्ष) और दीर्घकालिक (पाँच वर्ष) के दृष्टिकोण से रणनीति दस्तावेजों की समीक्षा की गई। DFS सचिव ने परिचालन दक्षता बढ़ाने और वित्तीय स्थिरता सुदृढ़ करने के उद्देश्य से रणनीतिक दिशा-निर्देश प्रस्तुत किए।
किन क्षेत्रों पर हुआ विचार-विमर्श
बैठक में जिन प्रमुख विषयों पर चर्चा हुई, उनमें शामिल हैं:
नए बीमा उत्पादों का विकास, निर्धारित साइबर सुरक्षा ढाँचों का पालन करते हुए डिजिटल एवं तकनीकी क्षमताओं का संवर्धन, ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्मों के माध्यम से बीमा सेवाओं का विस्तार, जनता की शिकायतों का समयबद्ध समाधान, वितरण नेटवर्क का विस्तार, और सोशल मीडिया सहित विभिन्न प्लेटफ़ॉर्मों पर संचार एवं प्रचार को मज़बूत करना।
इसके अतिरिक्त, समग्र सेवा वितरण को बेहतर बनाने के लिए मानव संसाधन और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) रणनीतियों को और विकसित करने के निर्देश भी जारी किए गए।
बीमा क्षेत्र में 100% FDI की अधिसूचना
इस बैठक के समानांतर, केंद्र सरकार ने स्वचालित मार्ग (Automatic Route) के तहत बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को अधिसूचित कर दिया है। इस कदम से विदेशी निवेशकों की अधिक भागीदारी का मार्ग प्रशस्त होगा। यह ऐसे समय में आया है जब सरकार बीमा क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और पूँजी प्रवाह दोनों बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
हालाँकि, बीमा कंपनियों में विदेशी निवेश बीमा अधिनियम, 1938 के प्रावधानों के अनुपालन और भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) से अनिवार्य अनुमोदन प्राप्त करने के अधीन होगा।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि भारत में बीमा पैठ (Insurance Penetration) अभी भी वैश्विक औसत से काफी कम है, और सरकार का यह दोहरा कदम — घरेलू कंपनियों को जन-केंद्रित रणनीति अपनाने का निर्देश और विदेशी पूँजी के लिए दरवाज़े खोलना — क्षेत्र को नई दिशा देने का प्रयास है। आने वाले महीनों में इन कंपनियों की संशोधित रणनीति दस्तावेज़ और नए उत्पाद सामने आने की उम्मीद है।