बीमा पहुंच बढ़ाने को प्राथमिकता दें कंपनियाँ — DFS सचिव एम. नागराजू की सलाह

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बीमा पहुंच बढ़ाने को प्राथमिकता दें कंपनियाँ — DFS सचिव एम. नागराजू की सलाह

सारांश

DFS सचिव एम. नागराजू ने LIC, GIC और OICL को स्पष्ट संदेश दिया — बड़ी पॉलिसियाँ नहीं, ज़्यादा लोग। साथ ही केंद्र सरकार ने बीमा क्षेत्र में 100% FDI को हरी झंडी दे दी है। यह दोहरा कदम भारत की कम बीमा पैठ को सुधारने और विदेशी पूँजी आकर्षित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

मुख्य बातें

नागराजू ने 5 मई 2026 को LIC, GIC और OICL के साथ विजन रणनीति समीक्षा बैठक की।
कंपनियों को बड़ी पॉलिसियों की बजाय अधिकतम आबादी तक बीमा कवरेज पहुँचाने को प्राथमिकता देने का निर्देश।
मध्यम अवधि (3 वर्ष) और दीर्घकालिक (5 वर्ष) रणनीति दस्तावेज़ों की समीक्षा हुई।
केंद्र सरकार ने स्वचालित मार्ग के तहत बीमा क्षेत्र में 100% FDI अधिसूचित किया।
विदेशी निवेश बीमा अधिनियम 1938 और IRDAI की अनिवार्य अनुमति के अधीन होगा।

वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के सचिव एम. नागराजू ने 5 मई 2026 को तीन प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों के साथ हुई एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि कंपनियों को अपनी नीतियाँ बड़ी पॉलिसियों के बजाय अधिकतम आबादी तक बीमा कवरेज पहुँचाने के लक्ष्य के इर्द-गिर्द तैयार करनी चाहिए। नई दिल्ली में आयोजित इस बैठक में लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (LIC), जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (GIC) और ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (OICL) के विजन रणनीति दस्तावेजों की व्यापक समीक्षा की गई।

बैठक का उद्देश्य और प्रमुख निर्देश

नागराजू ने जनसंख्या के बड़े वर्ग तक बीमा कवरेज विस्तार को अनिवार्य बताते हुए कंपनियों को सलाह दी कि वे बड़ी पॉलिसियों पर एकाग्रता के बजाय अधिकतम व्यक्तियों को बीमा के दायरे में लाने को प्राथमिकता दें। वित्त मंत्रालय के एक दस्तावेज़ के अनुसार, कंपनियों को हानि अनुपात कम करने के लिए निवेश एवं बीमा रणनीतियाँ तैयार करने के भी निर्देश दिए गए।

बैठक में मध्यम अवधि (तीन वर्ष) और दीर्घकालिक (पाँच वर्ष) के दृष्टिकोण से रणनीति दस्तावेजों की समीक्षा की गई। DFS सचिव ने परिचालन दक्षता बढ़ाने और वित्तीय स्थिरता सुदृढ़ करने के उद्देश्य से रणनीतिक दिशा-निर्देश प्रस्तुत किए।

किन क्षेत्रों पर हुआ विचार-विमर्श

बैठक में जिन प्रमुख विषयों पर चर्चा हुई, उनमें शामिल हैं:

नए बीमा उत्पादों का विकास, निर्धारित साइबर सुरक्षा ढाँचों का पालन करते हुए डिजिटल एवं तकनीकी क्षमताओं का संवर्धन, ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्मों के माध्यम से बीमा सेवाओं का विस्तार, जनता की शिकायतों का समयबद्ध समाधान, वितरण नेटवर्क का विस्तार, और सोशल मीडिया सहित विभिन्न प्लेटफ़ॉर्मों पर संचार एवं प्रचार को मज़बूत करना।

इसके अतिरिक्त, समग्र सेवा वितरण को बेहतर बनाने के लिए मानव संसाधन और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) रणनीतियों को और विकसित करने के निर्देश भी जारी किए गए।

बीमा क्षेत्र में 100% FDI की अधिसूचना

इस बैठक के समानांतर, केंद्र सरकार ने स्वचालित मार्ग (Automatic Route) के तहत बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को अधिसूचित कर दिया है। इस कदम से विदेशी निवेशकों की अधिक भागीदारी का मार्ग प्रशस्त होगा। यह ऐसे समय में आया है जब सरकार बीमा क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और पूँजी प्रवाह दोनों बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

हालाँकि, बीमा कंपनियों में विदेशी निवेश बीमा अधिनियम, 1938 के प्रावधानों के अनुपालन और भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) से अनिवार्य अनुमोदन प्राप्त करने के अधीन होगा।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि भारत में बीमा पैठ (Insurance Penetration) अभी भी वैश्विक औसत से काफी कम है, और सरकार का यह दोहरा कदम — घरेलू कंपनियों को जन-केंद्रित रणनीति अपनाने का निर्देश और विदेशी पूँजी के लिए दरवाज़े खोलना — क्षेत्र को नई दिशा देने का प्रयास है। आने वाले महीनों में इन कंपनियों की संशोधित रणनीति दस्तावेज़ और नए उत्पाद सामने आने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियाँ — जो वर्षों से बड़े कॉर्पोरेट खातों पर निर्भर रही हैं — वास्तव में जन-केंद्रित मॉडल की ओर मुड़ सकती हैं। भारत की बीमा पैठ GDP के 4% से भी कम है, जो वैश्विक औसत से काफी पीछे है — यह आँकड़ा दर्शाता है कि पिछले निर्देश ज़मीन पर कम उतरे हैं। 100% FDI की अधिसूचना निजी और विदेशी खिलाड़ियों को बढ़त देती है, जबकि सार्वजनिक कंपनियाँ नौकरशाही बाधाओं से जूझती हैं। बिना ठोस जवाबदेही तंत्र के, यह समीक्षा बैठक भी उन कई बैठकों की कतार में जुड़ सकती है जो दस्तावेज़ों से आगे नहीं बढ़ पाईं।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

DFS सचिव एम. नागराजू ने बीमा कंपनियों को क्या निर्देश दिए?
DFS सचिव एम. नागराजू ने 5 मई 2026 को LIC, GIC और OICL को निर्देश दिया कि वे बड़ी पॉलिसियों पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय अधिकतम आबादी तक बीमा कवरेज पहुँचाने को प्राथमिकता दें। साथ ही हानि अनुपात कम करने के लिए निवेश और बीमा रणनीतियाँ तैयार करने को कहा गया।
बीमा क्षेत्र में 100% FDI का क्या मतलब है?
केंद्र सरकार ने स्वचालित मार्ग के तहत बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को अधिसूचित किया है, जिससे विदेशी कंपनियाँ बिना सरकारी अनुमति के पूर्ण स्वामित्व के साथ बीमा व्यवसाय कर सकती हैं। हालाँकि, यह निवेश IRDAI की अनिवार्य अनुमति और बीमा अधिनियम 1938 के अनुपालन के अधीन होगा।
इस बैठक में कौन-सी कंपनियाँ शामिल थीं?
इस उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में तीन सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियाँ — लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (LIC), जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (GIC) और ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (OICL) — शामिल थीं।
बीमा कंपनियों की रणनीति में किन क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाएगा?
बैठक में नए उत्पादों का विकास, डिजिटल और तकनीकी क्षमताओं का संवर्धन, ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर सेवाओं का विस्तार, शिकायत निवारण, वितरण नेटवर्क विस्तार और सोशल मीडिया के ज़रिए प्रचार जैसे क्षेत्रों पर चर्चा हुई। HR और IT रणनीतियों को और विकसित करने के निर्देश भी दिए गए।
IRDAI की भूमिका इस प्रक्रिया में क्या है?
भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) बीमा कंपनियों में किसी भी विदेशी निवेश के लिए अनिवार्य अनुमोदन प्रदान करता है। 100% FDI की अनुमति मिलने के बाद भी विदेशी निवेशकों को IRDAI की मंज़ूरी और बीमा अधिनियम 1938 का पालन करना अनिवार्य होगा।
राष्ट्र प्रेस
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