भारत का हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर वित्त वर्ष 2025 में 9%25 बढ़ा, प्रीमियम 1.2 लाख करोड़ पार
सारांश
Key Takeaways
- भारत का हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम 1.2 लाख करोड़ के पार।
- सेक्टर में 9%25 की वार्षिक वृद्धि।
- आईआरडीएआई के नए नियम से क्लेम प्रक्रिया में सुधार।
- 2024-25 में क्लेम भुगतान अनुपात 87.5%25।
- लोगों में हेल्थ बीमा के प्रति बढ़ती जागरूकता।
नई दिल्ली, 26 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारत का हेल्थ बीमा क्षेत्र लगातार मजबूत हो रहा है। सरकार ने गुरुवार को जानकारी दी कि वित्त वर्ष 2024-25 में इस क्षेत्र का कुल प्रीमियम 1.2 लाख करोड़ रुपए के पार पहुँच गया है।
सरकार के अनुसार, देश में हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर लगभग 9 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ रहा है। इस वृद्धि के पीछे लोगों में बढ़ती जागरूकता, चिकित्सीय वित्तपोषण की बेहतर पहुँच और चिकित्सा खर्चों से सुरक्षा की आवश्यकताएँ प्रमुख हैं।
बीमा क्षेत्र को और सशक्त बनाने के लिए भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) ने कैशलेस हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम के लिए सख्त समय सीमा निर्धारित की है।
नए नियमों के तहत, बीमा कंपनियों को कैशलेस प्री-ऑथराइजेशन रिक्वेस्ट को एक घंटे के भीतर मंजूरी देनी होगी, जबकि अंतिम मंजूरी तीन घंटे के भीतर पूरी की जानी चाहिए।
सरकार का कहना है कि इन उपायों के जरिए क्लेम में देरी कम होगी और मरीजों को समय पर उपचार मिल सकेगा।
हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम में बढ़ोतरी के पीछे कई कारक हैं, जैसे कि पॉलिसीधारकों की बढ़ती उम्र, उच्च कवर राशि और बेहतर पॉलिसी सुविधाएँ।
रेगुलेटर के 2024 के दिशा-निर्देश यह भी सुनिश्चित करते हैं कि बीमा उत्पादों की कीमत जोखिम के आधार पर निर्धारित हो और समय-समय पर डेटा और ग्राहकों की प्रतिक्रियाओं के आधार पर उनकी समीक्षा की जाए।
क्लेम सेटलमेंट के मामले में भी क्षेत्र में सुधार देखा गया है। 2024-25 में क्लेम भुगतान अनुपात 87.5 प्रतिशत रहा, जो 2023-24 में 82.46 प्रतिशत और 2022-23 में 85.66 प्रतिशत था।
आईआरडीएआई के 'बीमा भरोसा' पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में जनरल और हेल्थ इंश्योरेंस से जुड़ी 1,37,361 शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें से लगभग 93 प्रतिशत का समाधान उसी वर्ष में कर दिया गया।
हालांकि, कुछ मामलों में क्लेम अब भी खारिज हो जाते हैं। इसके पीछे कुछ कारण होते हैं, जैसे बीमा कवर से अधिक खर्च, को-पेमेंट, सब-लिमिट, डिडक्टिबल, रूम रेंट लिमिट और गैर-चिकित्सीय खर्च।
रेगुलेटर ने पारदर्शिता बढ़ाने और क्लेम प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य पॉलिसीधारकों का विश्वास बढ़ाना और देश में हेल्थ इंश्योरेंस सिस्टम को और अधिक विश्वसनीय और प्रभावी बनाना है।