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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: नई कारों पर 4 साल और दोपहिया वाहनों पर 6 साल का थर्ड-पार्टी बीमा अनिवार्य

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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: नई कारों पर 4 साल और दोपहिया वाहनों पर 6 साल का थर्ड-पार्टी बीमा अनिवार्य

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय ने नई कारों के लिए थर्ड-पार्टी बीमा 3 से बढ़ाकर 4 साल और दोपहिया वाहनों के लिए 5 से बढ़ाकर 6 साल कर दिया है। देश की सड़कों पर 56% वाहन अभी भी बिना बीमा के हैं — यह आदेश उसी खतरनाक खाई को पाटने की कोशिश है।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 4 अगस्त 2026 को आदेश दिया कि नई कारों के लिए 4 साल और नए दोपहिया वाहनों के लिए 6 साल का थर्ड-पार्टी बीमा अनिवार्य होगा।
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस पीके मिश्रा की पीठ ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की अपील पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किया।
भारतीय सड़कों पर लगभग 56 प्रतिशत वाहन बिना वैध बीमा के चल रहे हैं — न्यायालय ने इसे चिंताजनक बताया।
IRDAI और जनरल इंश्योरेंस काउंसिल ने अवधि न बढ़ाने की सिफारिश की थी, जिसे न्यायालय ने अस्वीकार कर दिया।
निजी वाहनों के लिए चार-स्तरीय बीमा संरचना को मंजूरी दी गई; प्रत्येक खरीदार को 'कस्टमर ऑप्शन फॉर्म' देना अनिवार्य होगा।

सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार, 4 अगस्त 2026 को एक ऐतिहासिक आदेश में निर्देश दिया कि अब नई कारों के लिए चार साल और नए दोपहिया वाहनों के लिए छह साल का थर्ड-पार्टी बीमा कवर अनिवार्य होगा। नई दिल्ली से जारी इस आदेश का उद्देश्य मोटर वाहन अधिनियम (MVA) के अनुपालन को सुदृढ़ करना और सड़क दुर्घटना पीड़ितों को त्वरित मुआवजा सुनिश्चित करना है। यह निर्देश नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की अपील पर सुनवाई के दौरान जारी किया गया।

मुख्य घटनाक्रम

जस्टिस संजय करोल और जस्टिस पीके मिश्रा की खंडपीठ ने यह आदेश पारित किया। पीठ ने रेखांकित किया कि इससे पहले नई कारों के लिए तीन साल और नए दोपहिया वाहनों के लिए पाँच साल के अनिवार्य बीमा का निर्देश दिया गया था, किंतु उस आदेश के आठ साल बाद भी बड़ी संख्या में वाहन बिना वैध बीमा के सड़कों पर चल रहे हैं।

पीठ ने अपने आदेश में कहा, 'हमने देखा है कि उस निर्देश के आठ साल बाद भी बड़ी संख्या में वाहन बिना इंश्योरेंस के हैं। सड़क सुरक्षा के हित में अवधि को एक साल और बढ़ाया जाना चाहिए।' न्यायालय ने भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) को तत्काल आवश्यक निर्देश जारी करने का आदेश दिया।

56 प्रतिशत वाहन बिना बीमा — चिंताजनक आँकड़े

सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि भारतीय सड़कों पर चलने वाले लगभग 56 प्रतिशत वाहन बिना बीमा के हैं, जिससे मोटर वाहन अधिनियम के तहत अनिवार्य बीमा का मूल उद्देश्य ही विफल हो जाता है। पीठ ने कहा, 'यह जानकर हैरानी होती है कि देश की सड़कों पर चलने वाले करीब 56 फीसदी वाहन बिना इंश्योरेंस के हैं।' न्यायालय ने यह भी नोट किया कि सड़क दुर्घटना पीड़ितों और उनके परिवारों को मुआवजे के लिए अक्सर लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ती है।

IRDAI और जनरल इंश्योरेंस काउंसिल की आपत्ति

IRDAI और जनरल इंश्योरेंस काउंसिल ने सुनवाई के दौरान सुझाव दिया था कि अनिवार्य बीमा की अवधि बढ़ाने से व्यापक जनहित नहीं सधेगा। उनका तर्क था कि लंबी अवधि की पॉलिसी से प्रीमियम बढ़ेगा और बिना बीमा वाले वाहनों की संख्या में कोई खास कमी नहीं आई है। हालाँकि, न्यायालय ने इन आपत्तियों को अस्वीकार करते हुए सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।

चार-स्तरीय बीमा संरचना को मंजूरी

सर्वोच्च न्यायालय ने निजी वाहनों के लिए एक चार-स्तरीय बीमा संरचना को भी स्वीकृति दी। इसमें शामिल हैं: पहला, अनिवार्य थर्ड-पार्टी पॉलिसी; दूसरा, वाहन में सवार यात्रियों व पिलियन राइडर्स के लिए वैकल्पिक कानूनी दायित्व कवर; तीसरा, मालिक-चालक और यात्रियों के लिए वैकल्पिक व्यक्तिगत दुर्घटना कवर; और चौथा, वैकल्पिक 'ओन-डैमेज' कवर। इसके अतिरिक्त, न्यायालय ने निर्देश दिया कि प्रत्येक बीमा खरीदार को — चाहे ऑनलाइन हो या ऑफलाइन — एक 'कस्टमर ऑप्शन फॉर्म' प्रदान किया जाए, जिससे वे चेकबॉक्स के माध्यम से अतिरिक्त कवर चुन सकें।

आगे क्या होगा

IRDAI को तत्काल परिपत्र जारी कर वाहन निर्माताओं, बीमाकर्ताओं और डीलरों को नई व्यवस्था के अनुरूप ढालना होगा। यह आदेश मोटर वाहन अधिनियम की धारा 146 के अनुपालन को लेकर चल रही सुनवाई का हिस्सा है, जिसके अंतर्गत सभी वाहनों के लिए थर्ड-पार्टी बीमा अनिवार्य है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से नए वाहन खरीदारों की शुरुआती लागत बढ़ेगी, लेकिन दुर्घटना पीड़ितों को मुआवजे की प्रक्रिया सरल होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल क्रियान्वयन का है — आठ साल पहले भी इसी तरह का निर्देश दिया गया था, फिर भी 56% वाहन आज भी बिना बीमा के हैं। अवधि बढ़ाने से प्रारंभिक अनुपालन सुनिश्चित हो सकता है, लेकिन नवीनीकरण में चूक की समस्या जस की तस बनी रहेगी। IRDAI और ट्रैफिक प्रवर्तन एजेंसियों के बीच वास्तविक समय डेटा साझाकरण के बिना, यह आदेश भी कागजी सुधार बनकर रह सकता है। न्यायालय ने चार-स्तरीय संरचना का रास्ता खोला है, पर उसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ग्राहक 'ऑप्शन फॉर्म' को वास्तव में समझकर भरें — न कि महज औपचारिकता के तौर पर।
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट के नए बीमा आदेश में क्या बदला है?
सर्वोच्च न्यायालय ने नई कारों के लिए थर्ड-पार्टी बीमा की अनिवार्य अवधि 3 साल से बढ़ाकर 4 साल और नए दोपहिया वाहनों के लिए 5 साल से बढ़ाकर 6 साल कर दी है। यह आदेश 4 अगस्त 2026 को जस्टिस संजय करोल और जस्टिस पीके मिश्रा की पीठ ने जारी किया।
यह आदेश क्यों जारी किया गया?
न्यायालय ने पाया कि भारतीय सड़कों पर लगभग 56 प्रतिशत वाहन बिना वैध बीमा के चल रहे हैं, जो मोटर वाहन अधिनियम की धारा 146 का उल्लंघन है। पहले के निर्देश के आठ साल बाद भी स्थिति में सुधार न होने पर न्यायालय ने बीमा अवधि बढ़ाने का निर्णय लिया।
IRDAI ने इस बदलाव का विरोध क्यों किया था?
IRDAI और जनरल इंश्योरेंस काउंसिल का तर्क था कि लंबी अवधि की पॉलिसी से प्रीमियम बढ़ेगा और इससे बिना बीमा वाले वाहनों की संख्या में उल्लेखनीय कमी नहीं आएगी। सर्वोच्च न्यायालय ने इन आपत्तियों को खारिज करते हुए सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता दी।
चार-स्तरीय बीमा संरचना क्या है और इससे वाहन मालिकों पर क्या असर पड़ेगा?
न्यायालय ने निजी वाहनों के लिए अनिवार्य थर्ड-पार्टी कवर, यात्रियों व पिलियन राइडर्स के लिए वैकल्पिक कानूनी दायित्व कवर, व्यक्तिगत दुर्घटना कवर, और ओन-डैमेज कवर — इन चार स्तरों को मंजूरी दी है। हर खरीदार को 'कस्टमर ऑप्शन फॉर्म' के जरिए अतिरिक्त कवर चुनने का अधिकार होगा।
इस आदेश का पालन कब से और कैसे होगा?
सर्वोच्च न्यायालय ने IRDAI को तत्काल आवश्यक निर्देश जारी करने का आदेश दिया है। यह व्यवस्था नए वाहनों की खरीद पर तुरंत प्रभाव से लागू होगी; मौजूदा वाहन मालिकों की पॉलिसी पर इसका असर नहीं पड़ेगा।
राष्ट्र प्रेस
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