आईआरडीएआई के कमीशन कैप प्रस्ताव से बीमा शेयरों में भारी गिरावट, पीबी फिनटेक 28% टूटा
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) द्वारा 24 सितंबर 2026 को व्यक्तिगत जीवन बीमा पॉलिसियों पर कमीशन की अधिकतम सीमा तय करने का प्रस्ताव रखे जाने के बाद बीमा क्षेत्र के शेयरों में गुरुवार को भारी बिकवाली देखी गई। पीबी फिनटेक (पॉलिसी बाजार) का शेयर 28 प्रतिशत तक लुढ़क गया, जो इस प्रस्ताव के बाज़ार पर पड़ने वाले असर की तीव्रता को दर्शाता है।
बाज़ार में कितनी गिरावट आई
दोपहर 12 बजे तक के कारोबार में इंश्योरेंस ब्रोकिंग कंपनी पीबी फिनटेक (पॉलिसी बाजार) का शेयर 28 प्रतिशत, टर्टलमिंट फिनटेक का शेयर 20 प्रतिशत, एचडीएफसी लाइफ का शेयर 5 प्रतिशत और आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस का शेयर 2.5 प्रतिशत की गिरावट के साथ लाल निशान में था। ब्रोकिंग कंपनियों पर असर बीमाकर्ताओं की तुलना में कहीं अधिक तीखा रहा, क्योंकि उनकी आय सीधे तौर पर कमीशन ढाँचे पर निर्भर करती है।
प्रस्ताव में क्या है
आईआरडीएआई ने प्रीमियम पेमेंट टर्म (पीपीटी) के आधार पर कमीशन की अधिकतम सीमाएँ निर्धारित करने का प्रस्ताव दिया है। पाँच साल से कम के पीपीटी के लिए वितरण संस्थाओं हेतु यह सीमा 5 प्रतिशत और एजेंटों के लिए 6.25 प्रतिशत प्रस्तावित है। पाँच साल के पीपीटी पर ये सीमाएँ बढ़कर क्रमशः 10 प्रतिशत और 12.5 प्रतिशत हो जाती हैं।
छह से आठ साल के पीपीटी के लिए ये सीमाएँ 14 प्रतिशत और 17.5 प्रतिशत, नौ साल के पीपीटी के लिए 18 प्रतिशत और 22.5 प्रतिशत, तथा 10 साल या उससे अधिक के पीपीटी के लिए 20 प्रतिशत और 25 प्रतिशत प्रस्तावित हैं।
प्रस्ताव में यह भी स्पष्ट किया गया है कि कमीशन की इस सीमा में इंसेंटिव, अवॉर्ड, बिक्री खर्च की भरपाई और नॉन-कैश फायदे — सभी शामिल होंगे।
विशेष श्रेणियों के लिए अलग ढाँचा
नियामक ने सिंगल प्रीमियम और टैक्स छूट वाले उत्पादों के लिए अपेक्षाकृत कम कमीशन का प्रस्ताव दिया है। सिंगल प्रीमियम व्यक्तिगत बचत पॉलिसियों के लिए पहले साल का कमीशन वितरण संस्थाओं हेतु केवल 1 प्रतिशत और एजेंटों के लिए 2 प्रतिशत तक सीमित रहेगा। वहीं सिंगल प्रीमियम प्योर टर्म पॉलिसियों के लिए यह सीमा क्रमशः 7.5 प्रतिशत और 10 प्रतिशत होगी।
मल्टी-ईयर प्रीमियम टर्म पॉलिसियों में पहले साल का कमीशन वितरण संस्थाओं के लिए 25 प्रतिशत और एजेंटों के लिए 30 प्रतिशत तक रखा जा सकता है।
नियामक का उद्देश्य
आईआरडीएआई ने प्रस्ताव में कहा, 'लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी के लिए कमीशन का स्ट्रक्चर ऐसा होना चाहिए जो डिस्ट्रीब्यूशन करने वाले लोगों और संस्थाओं को पॉलिसीहोल्डर्स को मल्टी-ईयर पेमेंट प्लान जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए प्रेरित करे, न कि सिर्फ पहले साल के पेमेंट के लिए।' यह कदम शुरुआती बिक्री के बाद पॉलिसी लैप्स होने की बढ़ती प्रवृत्ति को रोकने की दिशा में उठाया गया है। गौरतलब है कि उद्योग में 'मिस-सेलिंग' की शिकायतें लंबे समय से चिंता का विषय रही हैं।
आगे क्या होगा
यह प्रस्ताव अभी परामर्श चरण में है और अंतिम नियम लागू होने से पहले उद्योग की प्रतिक्रिया माँगी जाएगी। बीमा वितरण कंपनियों और एजेंट संगठनों की ओर से इस पर विस्तृत टिप्पणियाँ अपेक्षित हैं। यदि यह प्रस्ताव अपने मौजूदा स्वरूप में लागू होता है, तो ब्रोकिंग कंपनियों के राजस्व मॉडल पर इसका दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है।