ई-बस और ई-ट्रक को बढ़ावा देने के लिए कुमारस्वामी की उच्चस्तरीय बैठक, स्वच्छ परिवहन पर बड़ा जोर
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने 20 मई 2026 को नई दिल्ली में देशभर में इलेक्ट्रिक बसों और इलेक्ट्रिक ट्रकों को तेज़ी से अपनाने की राह प्रशस्त करने के लिए एक उच्चस्तरीय हितधारक परामर्श बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में परिवहन, वित्त और उद्योग से जुड़े प्रमुख पक्षों को एक मंच पर लाकर इलेक्ट्रिक कमर्शियल वाहनों के विस्तार की व्यावहारिक चुनौतियों और संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में कौन-कौन शामिल हुए
परामर्श बैठक में फ्लीट ऑपरेटर, एग्रीगेटर, परिवहन क्षेत्र के प्रतिनिधि, वित्तीय संस्थान, लीजिंग कंपनियाँ और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सेक्टर के उद्योग प्रतिनिधि शामिल हुए। भारी उद्योग मंत्रालय के सचिव कमरान रिज़वी सहित मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी बैठक में भाग लिया और भारत में इलेक्ट्रिक हैवी व्हीकल मोबिलिटी के भविष्य के रोडमैप पर अपने विचार साझा किए।
मुख्य चर्चा बिंदु
हितधारकों ने वित्तीय सहायता, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, फ्लीट संचालन की व्यावसायिक व्यवहार्यता और इलेक्ट्रिक कमर्शियल वाहनों के लिए दीर्घकालिक इकोसिस्टम समर्थन जैसे अहम मुद्दों पर अपने अनुभव और सुझाव रखे। चर्चा में शहरी, अंतर-शहरी और माल परिवहन नेटवर्क में बड़े पैमाने पर ई-बसों और ई-ट्रकों की तैनाती के लिए एक मज़बूत इकोसिस्टम तैयार करने पर विशेष ज़ोर दिया गया।
मंत्री कुमारस्वामी का बयान
केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी ने कहा, "भारत स्वच्छ और प्रभावी परिवहन की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। ई-बसें यात्री परिवहन का भविष्य हैं और ई-ट्रक देश में लॉजिस्टिक्स एवं फ्रेट ट्रांसपोर्ट के अगले दौर को परिभाषित करेंगे।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार उद्योग और ऑपरेटरों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर यह बदलाव व्यावहारिक, समावेशी और व्यावसायिक रूप से टिकाऊ बन सके।
कुमारस्वामी ने यह भी रेखांकित किया कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के टिकाऊ विकास, परिचालन दक्षता और जिम्मेदार शासन के विजन के अनुरूप है। यह ऐसे समय में आई है जब भारत अपने कार्बन उत्सर्जन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए परिवहन क्षेत्र के विद्युतीकरण को प्राथमिकता दे रहा है।
उद्योग की प्रतिक्रिया
बैठक में शामिल प्रतिनिधियों ने मंत्रालय की इस पहल का स्वागत किया और कहा कि इस तरह की परामर्श प्रक्रिया से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को लेकर निवेशकों और ऑपरेटरों का विश्वास बढ़ेगा। गौरतलब है कि भारत में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या अभी भी कुल सार्वजनिक परिवहन बेड़े का एक छोटा हिस्सा है, और इस क्षेत्र में विस्तार के लिए नीतिगत स्पष्टता और वित्तीय सहायता को आवश्यक माना जाता रहा है।
आगे की राह
इस परामर्श बैठक को भारत में टिकाऊ भारी परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में भारी उद्योग मंत्रालय की एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। आने वाले समय में इस विचार-विमर्श के आधार पर नीतिगत ढाँचे और प्रोत्साहन तंत्र को और परिष्कृत किए जाने की उम्मीद है।