केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों के चार्जिंग नेटवर्क को सशक्त बनाने के लिए 'लीफ' की शुरुआत की

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केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों के चार्जिंग नेटवर्क को सशक्त बनाने के लिए 'लीफ' की शुरुआत की

सारांश

केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों के चार्जिंग इकोसिस्टम को सशक्त बनाने के लिए 'लीफ' का उद्घाटन किया है। यह मंच सभी हितधारकों को एकजुट कर ईवी चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास में मदद करेगा। जानिए इस पहल के बारे में विस्तार से।

मुख्य बातें

'लीफ' फोरम का उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों के चार्जिंग इकोसिस्टम को मजबूत करना है।
यह सरकार और उद्योग के बीच सहयोग को बढ़ावा देगा।
इससे चार्जिंग नेटवर्क की विश्वसनीयता में सुधार होगा।
लगभग 20 कंपनियों ने इस फोरम में भाग लिया है।
यह पहल सतत मोबिलिटी को बढ़ावा देने में सहायक होगी।

नई दिल्ली, 30 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के चार्जिंग इकोसिस्टम को सशक्त बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। भारी उद्योग मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने सोमवार को 'लीफ' या 'लाइट इलेक्ट्रिक-व्हीकल एक्सेलेरेशन फोरम (एलईएएफ)' का उद्घाटन किया, जो एक उद्योग-नेतृत्व वाला मंच है।

यह फोरम एक निष्पक्ष आधार पर स्थापित किया गया है, जहां लाइट इलेक्ट्रिक वाहन (एलईवी) क्षेत्र से जुड़े सभी हितधारक जैसे कि वाहन निर्माता (ओईएम), चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर ऑपरेटर, घटक निर्माता और तकनीकी प्रदाता एक साथ मिलकर कार्य कर सकें।

यह मंच सरकार, नियामक संस्थाओं और उद्योग संगठनों के सहयोग से ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को प्रोत्साहित करेगा और देश में इलेक्ट्रिक दोपहिया और तिपहिया वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देगा।

मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया कि यह पहल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के विकास को गति प्रदान करेगी और बेहतर इंटरऑपरेबिलिटी, विश्वसनीय सिस्टम और व्यापक चार्जिंग नेटवर्क के माध्यम से ईवी इकोसिस्टम को मजबूत बनाएगी।

उन्होंने यह भी कहा कि यह कदम 'आत्मनिर्भर भारत' के दृष्टिकोण के अनुरूप है और इससे सतत (सस्टेनेबल) मोबिलिटी को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही कार्बन उत्सर्जन को कम करने में भी सहायता मिलेगी।

कुमारस्वामी ने यह भी बताया कि एक मजबूत और प्रतिस्पर्धी ईवी इकोसिस्टम बनाने के लिए सरकार और उद्योग के बीच बेहतर सहयोग अनिवार्य है।

इस पहल का उद्देश्य चार्जिंग नेटवर्क के बीच बेहतर तालमेल (इंटरऑपरेबिलिटी) स्थापित करना, सिस्टम की विश्वसनीयता बढ़ाना और उपयोगकर्ताओं को एक समान अनुभव प्रदान करना है, साथ ही सार्वजनिक चार्जिंग सुविधाओं का विस्तार करना भी शामिल है।

इसके अंतर्गत 'लाइट इलेक्ट्रिक कंबाइंड चार्जिंग सिस्टम (एलईसीसीएस)' जैसे उपाय किए जा रहे हैं, जिसे भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने स्वीकृति दी है। यह सिस्टम एक एकीकृत कनेक्टर के माध्यम से धीमी और तेज दोनों प्रकार की चार्जिंग का समर्थन करेगा।

यह फोरम अब तक ईवी क्षेत्र की 20 से अधिक कंपनियों को जोड़ चुका है, जिनमें वाहन निर्माता, चार्जिंग ऑपरेटर, आपूर्तिकर्ता और सॉफ्टवेयर कंपनियां शामिल हैं। भविष्य में और संगठनों के इसमें शामिल होने की संभावना है।

उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि देश में ईवी अपनाने की गति बढ़ रही है, ऐसे में चार्जिंग नेटवर्क की असमानता और उपयोगकर्ता अनुभव में भिन्नता जैसी चुनौतियों को दूर करना आवश्यक होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि बेहतर इंटरऑपरेबिलिटी और मजबूत सार्वजनिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर ही देश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को तेजी से आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि स्थायी मोबिलिटी को भी बढ़ावा देगा। सभी हितधारकों के बीच बेहतर तालमेल से ईवी उपयोगकर्ताओं के अनुभव में सुधार होगा।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस पहल का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस पहल का मुख्य उद्देश्य चार्जिंग नेटवर्क के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना और इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देना है।
ईवी चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर में सुधार कैसे होगा?
यह फोरम सरकार, उद्योग और नियामक संस्थाओं के सहयोग से ईवी चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास को प्रोत्साहित करेगा।
क्या इसमें अन्य कंपनियां भी शामिल होंगी?
जी हाँ, इस फोरम में अब तक 20 से अधिक कंपनियाँ शामिल हो चुकी हैं और भविष्य में और कंपनियों के शामिल होने की संभावना है।
इस पहल का पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
इस पहल से कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद मिलेगी और सतत मोबिलिटी को बढ़ावा मिलेगा।
राष्ट्र प्रेस
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