दिल्ली ईवी पॉलिसी 2026: पंकज कुमार सिंह की अध्यक्षता में बड़ी बैठक, 36000 चार्जिंग पॉइंट का लक्ष्य
सारांश
Key Takeaways
- परिवहन मंत्री पंकज कुमार सिंह ने 24 अप्रैल 2025 को 'ड्राफ्ट दिल्ली ईवी पॉलिसी 2026' पर स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन की अध्यक्षता की।
- दिल्ली में वर्तमान 9,000 चार्जिंग पॉइंट को बढ़ाकर 32,000-36,000 तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया।
- बैठक चार सत्रों में आयोजित हुई, जिसमें चार्जिंग नेटवर्क, बैटरी रीसाइक्लिंग, सप्लाई चेन और नीतिगत ढांचे पर चर्चा हुई।
- आरडब्ल्यूए की भागीदारी से रिहायशी इलाकों में ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा।
- ईवी पॉलिसी को दिल्ली की सोलर पॉलिसी के साथ एकीकृत करने और डीटीसी बस डिपो व आईएसबीटी में चार्जिंग सुविधाएं बढ़ाने का निर्णय लिया गया।
- बैटरी रीसाइक्लिंग और रेट्रोफिटमेंट के माध्यम से सर्कुलर इकोनॉमी को मजबूत बनाने की योजना है।
नई दिल्ली, 24 अप्रैल 2025 — दिल्ली सरकार के परिवहन विभाग ने 'ड्राफ्ट दिल्ली ईवी पॉलिसी 2026' पर एक अहम स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया, जिसकी अध्यक्षता परिवहन मंत्री पंकज कुमार सिंह ने की। इस बैठक में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सेक्टर के प्रमुख हितधारकों ने भाग लिया और राजधानी को देश की ईवी कैपिटल बनाने की दिशा में ठोस रोडमैप पर विचार-विमर्श किया।
बैठक का उद्देश्य और संरचना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में आयोजित यह परामर्श बैठक चार सत्रों में संपन्न हुई। प्रत्येक सत्र में ईवी इकोसिस्टम के अलग-अलग पहलुओं — चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, बैटरी रीसाइक्लिंग, सप्लाई चेन और नीतिगत ढांचे — पर गहन चर्चा की गई।
बैठक में दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड (डीटीएल) के साथ स्टेकहोल्डर्स के समन्वय को बढ़ाने का सुझाव दिया गया, ताकि व्यापक चार्जिंग नेटवर्क का विकास तेज गति से हो सके।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का महत्वाकांक्षी लक्ष्य
परिवहन मंत्री पंकज कुमार सिंह ने बताया कि वर्तमान में दिल्ली में लगभग 9,000 चार्जिंग पॉइंट सक्रिय हैं, जबकि 4,000 से 5,000 नए पॉइंट विकसित किए जा रहे हैं। सरकार का लक्ष्य इस संख्या को भविष्य में बढ़ाकर 32,000 से 36,000 तक पहुंचाना है।
रिहायशी इलाकों में ईवी चार्जिंग सुविधाएं विकसित करने के लिए आरडब्ल्यूए (रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन) की भागीदारी को अनिवार्य माना गया, ताकि पार्किंग और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी की समस्याओं का समाधान किया जा सके।
पॉलिसी के प्रमुख प्रावधान
'ड्राफ्ट दिल्ली ईवी पॉलिसी 2026' के तहत सभी प्रमुख वाहन श्रेणियों में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की गति तेज करना प्राथमिकता है। इसके साथ ही बैटरी रीसाइक्लिंग, सर्विसिंग और कंपोनेंट रिकवरी के माध्यम से सप्लाई चेन को और सुदृढ़ बनाया जाएगा।
पेट्रोल और डीजल वाहनों पर निर्भरता घटाकर वायु गुणवत्ता में सुधार लाना इस नीति का केंद्रीय उद्देश्य है। इसके अलावा दिल्ली की सोलर पॉलिसी के साथ ईवी पॉलिसी को एकीकृत करने पर भी जोर दिया गया, जिससे स्वच्छ ऊर्जा से ईवी चार्जिंग को बढ़ावा मिले।
डीटीसी और रेट्रोफिटमेंट पर विचार-विमर्श
डीटीसी बस डिपो और आईएसबीटी में ईवी चार्जिंग सुविधाओं के विस्तार पर भी बैठक में विशेष चर्चा हुई। निजी इंटर-स्टेट ई-बस ऑपरेटरों को एक्सेस देने और मौजूदा वाहनों को इलेक्ट्रिक में बदलने (रेट्रोफिटमेंट) जैसे विषयों पर भी सुझाव लिए गए।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि बैटरी लाइफ-साइकिल प्रबंधन और प्रभावी रीसाइक्लिंग तंत्र विकसित करना न केवल पर्यावरण के लिए जरूरी है, बल्कि यह सर्कुलर इकोनॉमी को भी मजबूत करेगा।
गहन विश्लेषण: दिल्ली की ईवी महत्वाकांक्षा और जमीनी हकीकत
गौरतलब है कि दिल्ली पहले से ही देश में सर्वाधिक पंजीकृत ईवी वाले शहरों में शामिल है। 2020 में लागू हुई पहली दिल्ली ईवी पॉलिसी के बाद से राजधानी में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई थी। अब 2026 की नई पॉलिसी उसी नींव पर एक और बड़ी छलांग लगाने की कोशिश है।
तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो चीन और नॉर्वे जैसे देशों ने सरकारी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और सब्सिडी के बल पर ईवी अपनाने की दर को 50%25 से ऊपर पहुंचाया है। दिल्ली का 36,000 चार्जिंग पॉइंट का लक्ष्य महत्वाकांक्षी जरूर है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि बिजली वितरण की मौजूदा क्षमता और डीटीएल के साथ समन्वय इसकी सफलता की कुंजी होगी।
यह भी उल्लेखनीय है कि दिल्ली में वायु प्रदूषण के लिए परिवहन क्षेत्र की 28-30%25 हिस्सेदारी आंकी जाती है। ऐसे में ईवी इकोसिस्टम का विस्तार सीधे तौर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा मुद्दा है।
इस परामर्श से प्राप्त सुझावों को 'ड्राफ्ट दिल्ली ईवी पॉलिसी 2026' के अंतिम मसौदे में शामिल किया जाएगा। आने वाले महीनों में इस पॉलिसी के अंतिम रूप से लागू होने की उम्मीद है, जो दिल्ली को स्वच्छ और हरित परिवहन के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित होगा।