ओला इलेक्ट्रिक को उपभोक्ता आयोग ने खराब स्कूटर के लिए रिफंड या प्रतिस्थापन का आदेश दिया

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ओला इलेक्ट्रिक को उपभोक्ता आयोग ने खराब स्कूटर के लिए रिफंड या प्रतिस्थापन का आदेश दिया

सारांश

ओला इलेक्ट्रिक के खिलाफ उपभोक्ता आयोग का यह निर्णय उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आयोग ने कंपनी को खराब स्कूटर के लिए रिफंड या प्रतिस्थापन का आदेश दिया है, जो ग्राहक सेवा में लापरवाही को उजागर करता है।

Key Takeaways

  • खराब स्कूटर के लिए रिफंड या प्रतिस्थापन का आदेश।
  • कंपनी की अनुचित व्यापार प्रथाएं उजागर हुईं।
  • ग्राहक सेवा में लापरवाही का मामला।
  • आयोग ने मानसिक पीड़ा के लिए मुआवजा देने का आदेश दिया।
  • इस निर्णय से उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।

मुंबई, 29 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। ठाणे का उपभोक्ता आयोग ने ओला इलेक्ट्रिक, जो एक प्रसिद्ध दोपहिया ईवी कंपनी है, को खराब इलेक्ट्रिक स्कूटर के लिए ग्राहक को रिफंड देने या स्कूटर बदलने का आदेश दिया है।

आयोग ने यह आदेश कंपनी की गंभीर अनियमितताओं और अनुचित व्यापार प्रथाओं के कारण दिया है।

जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने अपने निर्णय में कहा कि स्कूटर में कई प्रारंभिक खामियां थीं, और कंपनी इन समस्याओं का उचित समाधान करने में असफल रही।

आयोग ने कंपनी की ग्राहक सेवा में लापरवाही को भी उजागर किया।

यह मामला एक नवी मुंबई के वकील द्वारा दायर किया गया था, जिन्होंने जुलाई 2024 में 96,997 रुपए में स्कूटर खरीदी थी।

शिकायत के अनुसार, वाहन की डिलीवरी के सिर्फ दो दिन बाद ही उसमें समस्याएं उत्पन्न होने लगीं।

अपनी पहली लंबी यात्रा के दौरान, स्कूटर ने एक्सीलरेशन में समस्याएं दीं और कई बार ट्रैफिक में खराब हो गया।

शिकायतकर्ता ने बैटरी की गंभीर समस्या का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा कि अगस्त 2024 में एक यात्रा के दौरान, चार्ज स्तर अचानक 500 मीटर के भीतर 21 प्रतिशत से घटकर 3 प्रतिशत हो गया, जिससे वाहन अचानक रुक गया। उन्होंने बताया कि यह घटना एक गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती थी।

ग्राहक ने आरोप लगाया कि बार-बार ईमेल और संदेश भेजने के बावजूद, कंपनी से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, जब तक कि उन्होंने इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर सार्वजनिक नहीं किया।

स्कूटर को सर्विसिंग के लिए ले जाने के बाद भी प्रक्रिया में देरी हुई और कोई अपडेट नहीं मिला। आयोग ने पाया कि शुरुआत में वाहन की सूचना निर्धारित गैरेज को भी नहीं दी गई थी।

आदेश में कहा गया है कि जब स्कूटर महीनों बाद लौटाया गया, तो वह खराब स्थिति में था, उस पर खरोंचें थीं और साफ-सफाई की समस्या थी।

आयोग ने पाया कि प्रारंभिक सवारी से ही समस्याओं का यह सिलसिला दर्शाता है कि दोपहिया वाहन वास्तव में खराब था।

आयोग ने कहा कि कंपनी ने समय पर अपडेट देने में असफलता दिखाई और वाहन को लंबे समय तक रोके रखा, जो खराब सर्विस और अनुचित व्यापार प्रथा का मामला है।

अपने निर्णय में, आयोग ने कंपनी को स्कूटर को समान विशेषताओं वाले नए स्कूटर से बदलने का आदेश दिया।

यदि प्रतिस्थापन संभव नहीं है, तो उसे ग्राहक द्वारा भुगतान की गई पूरी राशि 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित वापस करनी होगी।

इसके अलावा, कंपनी को मानसिक पीड़ा के मुआवजे के लिए 20,000 रुपए और कानूनी खर्चों के लिए 15,000 रुपए का भुगतान करने का आदेश दिया गया है।

हालांकि, कंपनी आयोग के समक्ष उपस्थित नहीं हुई और न ही उसने कोई उत्तर दाखिल किया, इसलिए मामले का निर्णय एकतरफा किया गया।

Point of View

NationPress
06/04/2026

Frequently Asked Questions

क्या ओला इलेक्ट्रिक को ग्राहकों को रिफंड देना होगा?
हाँ, यदि स्कूटर का प्रतिस्थापन संभव नहीं है, तो ओला इलेक्ट्रिक को ग्राहक द्वारा भुगतान की गई पूरी राशि वापस करनी होगी।
उपभोक्ता आयोग ने यह आदेश क्यों दिया?
आयोग ने ओला इलेक्ट्रिक की गंभीर अनियमितताओं और ग्राहक सेवा में लापरवाही के कारण यह आदेश दिया।
ग्राहक को मानसिक पीड़ा का मुआवजा क्यों दिया गया?
कंपनी की लापरवाही के कारण ग्राहक को मानसिक पीड़ा हुई, जिसके लिए उन्होंने मुआवजे की मांग की।
क्या ओला इलेक्ट्रिक ने आयोग के समक्ष उपस्थित होने का प्रयास किया?
नहीं, ओला इलेक्ट्रिक आयोग के समक्ष उपस्थित नहीं हुई और न ही कोई उत्तर प्रस्तुत किया।
इस मामले का क्या महत्व है?
यह मामला उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा और कंपनियों की जिम्मेदारी को दर्शाता है।
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