आदित्य ठाकरे का आरोप: मंत्री और विधायक फोटो के लिए खरीद रहे इलेक्ट्रिक वाहन, 2021 की ईवी नीति पर उठाए सवाल

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आदित्य ठाकरे का आरोप: मंत्री और विधायक फोटो के लिए खरीद रहे इलेक्ट्रिक वाहन, 2021 की ईवी नीति पर उठाए सवाल

सारांश

आदित्य ठाकरे ने एक्स पर तीखा सवाल दागा — मंत्री और विधायक ईवी खरीद रहे हैं, लेकिन क्या आम नागरिक के लिए बेस्ट बस, मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन सस्ता होगा? 2021 की ईवी नीति के प्रावधान हटाए जाने का मुद्दा फिर सुर्खियों में है।

मुख्य बातें

आदित्य ठाकरे ने आरोप लगाया कि मंत्री और विधायक केवल फोटो खिंचवाने के लिए इलेक्ट्रिक वाहन खरीद रहे हैं।
2021 की ईवी नीति में 2022 के बाद सरकारी खरीद में सिर्फ ईवी अनिवार्य था, लेकिन सरकार बदलने के बाद यह प्रावधान हटा दिया गया ।
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने ठाणे में ईवी से कार्यक्रम में पहुँचकर काफिले में कटौती का ऐलान किया।
एनसीपी (एसपी) नेता जयंत पाटिल ने मुख्यमंत्री और मंत्रियों के बड़े काफिलों की आलोचना की।
शिंदे ने विपक्ष को चेताया कि ईंधन बचत अभियान को राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाना चाहिए।

शिवसेना (यूबीटी) नेता और पूर्व मंत्री आदित्य ठाकरे ने बुधवार, 13 मई को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पश्चिम एशिया संघर्ष के मद्देनज़र 'ऊर्जा बचत' अपनाने की अपील के बाद कुछ मंत्री और विधायक महज़ फोटो खिंचवाने के लिए इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) खरीद रहे हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जो नागरिक ईवी खरीदने में सक्षम नहीं हैं, उनके लिए सरकार क्या कर रही है।

आदित्य ठाकरे ने एक्स पर उठाए तीखे सवाल

ठाकरे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए पूछा, ''जो लोग ऐसा नहीं कर सकते, उनका क्या? क्या बेस्ट बस का टिकट फिर से सस्ता होगा? क्या दूसरे सार्वजनिक परिवहन पर सब्सिडी मिलेगी? क्या मेट्रो टिकट के दाम कम होंगे?'' उनके इन सवालों ने ईवी अपनाने की नीति में आम नागरिक की भागीदारी पर बहस छेड़ दी है।

ठाकरे ने आगे कहा कि 2021 की ईवी नीति में यह तय किया गया था कि 2022 के बाद सभी मंत्री, सरकारी विभाग और शहरी स्थानीय निकाय नई गाड़ियाँ खरीदने या किराए पर लेने पर सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहन ही लेंगे। उनके अनुसार, सरकार बदलने के बाद नीति के इस महत्वपूर्ण प्रावधान को हटा दिया गया।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि ईवी के लिए बिजली सस्ती होनी चाहिए और वह साफ ऊर्जा स्रोत से आनी चाहिए, लेकिन यह शर्त भी अब ''पुरानी बात'' बन गई है।

जयंत पाटिल की सरकार को नसीहत

वरिष्ठ राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) — एनसीपी (एसपी) — नेता और पूर्व मंत्री जयंत पाटिल ने कहा कि मध्यम वर्ग हमेशा अपनी जिम्मेदारी निभाता है, लेकिन सरकार को भी उदाहरण पेश करना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री, मंत्रियों और अधिकारियों के बड़े-बड़े काफिलों की आलोचना करते हुए कहा कि 'नेशन फर्स्ट' नीति अपनाते हुए निजी और सरकारी काफिलों में गाड़ियों की संख्या कम की जानी चाहिए।

एकनाथ शिंदे का ईवी से आगमन, काफिले में कटौती का ऐलान

इससे पहले महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे प्रधानमंत्री मोदी की ईंधन बचाने की अपील का समर्थन करते हुए ठाणे में एक कार्यक्रम में इलेक्ट्रिक वाहन से पहुँचे। शिंदे ने कहा कि उन्होंने अपने सरकारी काफिले में कटौती का आदेश दिया है और सिर्फ जरूरी सुरक्षा वाहनों को ही रखा जाएगा।

मीडिया से बातचीत में शिंदे ने लोगों से पेट्रोल और डीजल का कम इस्तेमाल करने की अपील की, ताकि देश की आर्थिक स्थिति मज़बूत बनी रहे। उन्होंने कहा कि भारत सीधे युद्ध में नहीं है, लेकिन वैश्विक संघर्ष का असर कच्चे तेल के आयात और डॉलर खर्च पर पड़ता है। उन्होंने कैबिनेट सहयोगियों से भी इसी राह पर चलने की अपील की।

विपक्ष पर शिंदे का पलटवार

शिंदे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हालिया बयान का हवाला देते हुए कहा कि महाराष्ट्र सरकार अंतरराष्ट्रीय संकट के आर्थिक असर को कम करने के लिए केंद्र सरकार की योजना के साथ पूरी तरह खड़ी है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि ईंधन बचत अभियान को राजनीति का मुद्दा नहीं बनाना चाहिए — राष्ट्रीय संकट के समय एकजुटता ज़रूरी है।

शिंदे ने कोविड-19 महामारी का उदाहरण देते हुए कहा कि उस दौर में भी जनता ने प्रधानमंत्री की अपील का पालन किया था। उन्होंने सभी महाराष्ट्रवासियों से अपने सफर की बेहतर योजना बनाने और ईंधन बचाने को प्राथमिकता देने की अपील की। यह बहस इस बात की ओर इशारा करती है कि ईंधन बचत की नीति को ज़मीन पर उतारने के लिए सरकार और विपक्ष दोनों को ठोस कदम उठाने होंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके नीचे एक ठोस नीतिगत सवाल दबा है — 2021 की ईवी नीति का वह प्रावधान क्यों हटाया गया जो सरकारी खरीद को इलेक्ट्रिक वाहनों तक सीमित करता था? ईंधन बचत की अपील तब तक विश्वसनीय नहीं होती जब तक सरकार खुद अपने काफिलों और खरीद नीति में बदलाव न दिखाए। जयंत पाटिल और ठाकरे दोनों का एक ही सुर है — प्रतीकात्मक इशारों से काम नहीं चलेगा, संस्थागत बदलाव चाहिए। शिंदे का काफिला-कटौती का ऐलान सही दिशा में है, लेकिन उसकी निगरानी और पारदर्शिता के बिना यह भी एक और 'फोटो ऑप' बनकर रह सकता है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आदित्य ठाकरे ने मंत्रियों पर क्या आरोप लगाया?
आदित्य ठाकरे ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी की ऊर्जा बचत अपील के बाद कुछ मंत्री और विधायक केवल फोटो खिंचवाने के लिए इलेक्ट्रिक वाहन खरीद रहे हैं, न कि वास्तविक नीतिगत प्रतिबद्धता के तहत।
महाराष्ट्र की 2021 की ईवी नीति में क्या था?
2021 की ईवी नीति में यह तय किया गया था कि 2022 के बाद सभी मंत्री, सरकारी विभाग और शहरी स्थानीय निकाय नई गाड़ियाँ खरीदते या किराए पर लेते समय सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहन ही लेंगे। आदित्य ठाकरे के अनुसार, सरकार बदलने के बाद इस प्रावधान को हटा दिया गया।
एकनाथ शिंदे ने ईंधन बचत के लिए क्या कदम उठाए?
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ठाणे में एक कार्यक्रम में इलेक्ट्रिक वाहन से पहुँचे और उन्होंने अपने सरकारी काफिले में कटौती का आदेश दिया, जिसमें केवल जरूरी सुरक्षा वाहन ही रखे जाएँगे।
जयंत पाटिल ने सरकार को क्या सुझाव दिया?
एनसीपी (एसपी) नेता जयंत पाटिल ने कहा कि 'नेशन फर्स्ट' नीति अपनाते हुए मुख्यमंत्री, मंत्रियों और अधिकारियों के निजी व सरकारी काफिलों में गाड़ियों की संख्या कम की जानी चाहिए।
पश्चिम एशिया संघर्ष का भारत की ईंधन नीति पर क्या असर है?
एकनाथ शिंदे के अनुसार, भारत सीधे युद्ध में नहीं है, लेकिन वैश्विक संघर्ष का असर कच्चे तेल के आयात और डॉलर खर्च पर पड़ता है, जिससे देश की आर्थिक स्थिति प्रभावित होती है। इसीलिए प्रधानमंत्री मोदी ने नागरिकों से ईंधन बचत की अपील की है।
राष्ट्र प्रेस
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