23 अगस्त 2026
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का निर्देश: ईंधन संकट में जजों को कार पूलिंग, 33% स्टाफ घर से करेगा काम

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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का निर्देश: ईंधन संकट में जजों को कार पूलिंग, 33% स्टाफ घर से करेगा काम

सारांश

वैश्विक ईंधन संकट के बीच पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने न्यायपालिका के भीतर से ही बदलाव की शुरुआत की — जजों को कार पूलिंग, 33% स्टाफ को वर्क फ्रॉम होम और सुनवाई को डिजिटल करने का आदेश। यह किसी उच्च न्यायालय की ऊर्जा संरक्षण की दिशा में दुर्लभ संस्थागत पहल है।

मुख्य बातें

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने 22 अप्रैल 2026 को वैश्विक ईंधन संकट के मद्देनज़र न्यायाधीशों को कार पूलिंग अपनाने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने फिजिकल सुनवाई के स्थान पर डिजिटल सुनवाई को प्राथमिकता देने को कहा, जिससे ईंधन खपत और सुनवाई में देरी — दोनों कम होंगी।
न्यायालय के 33 प्रतिशत कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति दी गई; कार्य-अवधि में फोन पर उपलब्धता अनिवार्य।
प्रशासन को निर्बाध इंटरनेट कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया।
दफ्तरी कर्मचारियों को भी सार्वजनिक परिवहन और आपसी कार पूलिंग अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने 22 अप्रैल 2026 को वैश्विक ईंधन संकट के मद्देनज़र न्यायाधीशों को कार पूलिंग अपनाने और डिजिटल सुनवाई को प्राथमिकता देने का स्पष्ट निर्देश जारी किया। साथ ही कोर्ट ने न्यायालय के 33 प्रतिशत कर्मचारियों को घर से काम करने का आदेश दिया, ताकि ईंधन की खपत कम हो और कामकाज भी बाधित न हो।

मुख्य निर्देश और उनका उद्देश्य

हाईकोर्ट ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में ईंधन की उपलब्धता एक गंभीर चुनौती बन चुकी है। इसी को ध्यान में रखते हुए जजों को अकेले वाहन से न्यायालय आने के बजाय कार पूलिंग को अपनी दिनचर्या में शामिल करने को कहा गया है। कोर्ट का मानना है कि इस कदम से न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि यह एक सामाजिक संदेश भी देगा।

इसके अतिरिक्त, दफ्तरों में कार्यरत कर्मचारियों को भी आपस में कार पूलिंग करने और सार्वजनिक परिवहन पर निर्भरता बढ़ाने के लिए प्रेरित किया गया है।

डिजिटल सुनवाई पर विशेष ज़ोर

कोर्ट ने फिजिकल सुनवाई के स्थान पर डिजिटल सुनवाई को व्यवहार में लागू करने पर बल दिया। इससे दो प्रमुख लाभ होने की उम्मीद जताई गई — पहला, वाहनों में ईंधन की खपत में कमी; और दूसरा, मामलों की सुनवाई में तेज़ी।

हालाँकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासन को इंटरनेट कनेक्टिविटी निर्बाध बनाए रखनी होगी। यदि इंटरनेट की गति में किसी भी प्रकार की बाधा आई, तो सुनवाई की गतिशीलता प्रभावित होगी, जो किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगी।

घर से काम करने वाले कर्मचारियों के लिए शर्तें

कोर्ट ने 33 फीसदी न्यायालय कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की अनुमति देते हुए यह भी सुनिश्चित किया कि इससे कामकाज प्रभावित न हो। इन कर्मचारियों को कार्य-अवधि के दौरान फोन पर उपलब्ध रहना अनिवार्य होगा और आवश्यकता पड़ने पर कार्यालय में भी उपस्थित होना होगा।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इन आदेशों के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

व्यापक संदर्भ और महत्व

गौरतलब है कि यह निर्देश ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर ईंधन आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का यह कदम न्यायपालिका द्वारा ऊर्जा संरक्षण की दिशा में एक उल्लेखनीय पहल है। यह पहली बार है जब किसी उच्च न्यायालय ने ईंधन संकट के जवाब में इस तरह के संस्थागत उपाय अपनाने का आदेश दिया हो।

आगे की राह

इन निर्देशों को धरातल पर लागू करने की ज़िम्मेदारी अब न्यायालय प्रशासन पर है। डिजिटल अवसंरचना को मज़बूत करना, कार पूलिंग की व्यवस्था को व्यवस्थित रूप देना और घर से काम करने वाले कर्मचारियों की निगरानी सुनिश्चित करना — ये तीनों कार्य आने वाले दिनों में इस योजना की सफलता तय करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

खुद पर लागू करना दुर्लभ है। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ये निर्देश केवल संकटकालीन प्रतिक्रिया हैं या दीर्घकालिक संस्थागत बदलाव की शुरुआत? डिजिटल सुनवाई की बात नई नहीं है — कोविड के दौरान यह व्यापक रूप से लागू हुई थी, लेकिन बाद में धीरे-धीरे पुराने ढर्रे पर लौट आई। बिना स्पष्ट समयसीमा और जवाबदेही तंत्र के, यह आदेश भी उसी सूची में जुड़ने का जोखिम उठाता है।
RashtraPress
23 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने ईंधन संकट को लेकर क्या आदेश दिए हैं?
कोर्ट ने जजों को कार पूलिंग अपनाने, फिजिकल के बजाय डिजिटल सुनवाई करने और 33% कर्मचारियों को घर से काम करने का निर्देश दिया है। ये सभी कदम वैश्विक ईंधन संकट के बीच ऊर्जा खपत कम करने के उद्देश्य से उठाए गए हैं।
डिजिटल सुनवाई से क्या फायदे होंगे?
डिजिटल सुनवाई से वाहनों में ईंधन की खपत कम होगी और मामलों की सुनवाई में तेज़ी आएगी। हालाँकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि इसके लिए निर्बाध इंटरनेट कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना प्रशासन की ज़िम्मेदारी होगी।
घर से काम करने वाले न्यायालय कर्मचारियों के लिए क्या शर्तें हैं?
घर से काम करने वाले 33% कर्मचारियों को कार्य-अवधि के दौरान फोन पर उपलब्ध रहना अनिवार्य होगा। आवश्यकता पड़ने पर उन्हें कार्यालय में भी उपस्थित होना होगा, ताकि कामकाज किसी भी स्थिति में प्रभावित न हो।
क्या न्यायालय कर्मचारियों के लिए कार पूलिंग अनिवार्य है?
दफ्तरों में कार्यरत कर्मचारियों को कार पूलिंग करने और सार्वजनिक परिवहन पर निर्भरता बढ़ाने के लिए प्रेरित किया गया है। कोर्ट ने इसे अनिवार्य बताया है और आदेशों के क्रियान्वयन में किसी भी लापरवाही को अस्वीकार्य करार दिया है।
यह आदेश किस संदर्भ में आया है?
यह आदेश वैश्विक ईंधन संकट की पृष्ठभूमि में 22 अप्रैल 2026 को जारी किया गया। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने इसे न्यायपालिका के भीतर से ऊर्जा संरक्षण की दिशा में एक संस्थागत पहल के रूप में प्रस्तुत किया है।
राष्ट्र प्रेस
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