पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का निर्देश: ईंधन संकट में जजों को कार पूलिंग, 33% स्टाफ घर से करेगा काम
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने 22 अप्रैल 2026 को वैश्विक ईंधन संकट के मद्देनज़र न्यायाधीशों को कार पूलिंग अपनाने और डिजिटल सुनवाई को प्राथमिकता देने का स्पष्ट निर्देश जारी किया। साथ ही कोर्ट ने न्यायालय के 33 प्रतिशत कर्मचारियों को घर से काम करने का आदेश दिया, ताकि ईंधन की खपत कम हो और कामकाज भी बाधित न हो।
मुख्य निर्देश और उनका उद्देश्य
हाईकोर्ट ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में ईंधन की उपलब्धता एक गंभीर चुनौती बन चुकी है। इसी को ध्यान में रखते हुए जजों को अकेले वाहन से न्यायालय आने के बजाय कार पूलिंग को अपनी दिनचर्या में शामिल करने को कहा गया है। कोर्ट का मानना है कि इस कदम से न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि यह एक सामाजिक संदेश भी देगा।
इसके अतिरिक्त, दफ्तरों में कार्यरत कर्मचारियों को भी आपस में कार पूलिंग करने और सार्वजनिक परिवहन पर निर्भरता बढ़ाने के लिए प्रेरित किया गया है।
डिजिटल सुनवाई पर विशेष ज़ोर
कोर्ट ने फिजिकल सुनवाई के स्थान पर डिजिटल सुनवाई को व्यवहार में लागू करने पर बल दिया। इससे दो प्रमुख लाभ होने की उम्मीद जताई गई — पहला, वाहनों में ईंधन की खपत में कमी; और दूसरा, मामलों की सुनवाई में तेज़ी।
हालाँकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासन को इंटरनेट कनेक्टिविटी निर्बाध बनाए रखनी होगी। यदि इंटरनेट की गति में किसी भी प्रकार की बाधा आई, तो सुनवाई की गतिशीलता प्रभावित होगी, जो किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगी।
घर से काम करने वाले कर्मचारियों के लिए शर्तें
कोर्ट ने 33 फीसदी न्यायालय कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की अनुमति देते हुए यह भी सुनिश्चित किया कि इससे कामकाज प्रभावित न हो। इन कर्मचारियों को कार्य-अवधि के दौरान फोन पर उपलब्ध रहना अनिवार्य होगा और आवश्यकता पड़ने पर कार्यालय में भी उपस्थित होना होगा।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इन आदेशों के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
व्यापक संदर्भ और महत्व
गौरतलब है कि यह निर्देश ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर ईंधन आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का यह कदम न्यायपालिका द्वारा ऊर्जा संरक्षण की दिशा में एक उल्लेखनीय पहल है। यह पहली बार है जब किसी उच्च न्यायालय ने ईंधन संकट के जवाब में इस तरह के संस्थागत उपाय अपनाने का आदेश दिया हो।
आगे की राह
इन निर्देशों को धरातल पर लागू करने की ज़िम्मेदारी अब न्यायालय प्रशासन पर है। डिजिटल अवसंरचना को मज़बूत करना, कार पूलिंग की व्यवस्था को व्यवस्थित रूप देना और घर से काम करने वाले कर्मचारियों की निगरानी सुनिश्चित करना — ये तीनों कार्य आने वाले दिनों में इस योजना की सफलता तय करेंगे।