सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: सोमवार-शुक्रवार केवल वर्चुअल सुनवाई, जजों में कारपूलिंग का संकल्प

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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: सोमवार-शुक्रवार केवल वर्चुअल सुनवाई, जजों में कारपूलिंग का संकल्प

सारांश

पश्चिम एशिया संकट के बीच ईंधन बचाने की राष्ट्रीय अपील पर सर्वोच्च न्यायालय ने अभूतपूर्व कदम उठाया — सोमवार-शुक्रवार केवल वर्चुअल सुनवाई, जजों में कारपूलिंग का संकल्प और आधे कर्मचारियों को सप्ताह में दो दिन घर से काम की अनुमति।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार और शुक्रवार को केवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिये सुनवाई का आदेश दिया।
शेष तीन कार्य दिवसों पर व्यक्तिगत और वर्चुअल दोनों माध्यमों से हाइब्रिड सुनवाई जारी रहेगी।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने पश्चिम एशिया संकट के मद्देनजर यह निर्णय लिया; सर्कुलर सेक्रेटरी जनरल भरत पाराशर द्वारा जारी।
न्यायाधीशों ने सर्वसम्मति से कारपूलिंग अपनाने का संकल्प लिया।
प्रत्येक रजिस्ट्री शाखा में अधिकतम 50% कर्मचारियों को सप्ताह में दो दिन घर से काम की अनुमति।

सर्वोच्च न्यायालय ने 15 मई 2025 को एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लेते हुए यह तय किया कि सोमवार और शुक्रवार को अदालत की समस्त सुनवाई केवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से होगी। यह फैसला पश्चिम एशिया संकट के कारण उत्पन्न आर्थिक दबाव के मद्देनजर ईंधन संरक्षण की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राष्ट्रीय अपील के अनुरूप लिया गया है। शेष तीन कार्य दिवसों पर हाइब्रिड सुनवाई — यानी व्यक्तिगत और वर्चुअल दोनों माध्यमों से — जारी रहेगी।

मुख्य घटनाक्रम

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मौजूदा राष्ट्रीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यह निर्देश जारी किए। सर्वोच्च न्यायालय के सेक्रेटरी जनरल भरत पाराशर द्वारा जारी आधिकारिक सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि 'मिसलेनियस डेज' — अर्थात सोमवार और शुक्रवार — तथा आंशिक कार्य दिवसों पर सूचीबद्ध सभी मामलों की सुनवाई अब केवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिये होगी।

रजिस्ट्री को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि वीडियो लिंक समय पर भेजे जाएँ और तकनीकी व्यवस्था निर्बाध बनी रहे, ताकि न्यायालय के कामकाज में किसी प्रकार की बाधा न आए।

जजों का कारपूलिंग संकल्प

ईंधन की खपत को कम करने की दिशा में एक और सार्थक कदम उठाते हुए, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों ने सर्वसम्मति से आपस में कारपूलिंग की व्यवस्था अपनाने का संकल्प लिया है। यह कदम न्यायपालिका की ओर से ऊर्जा संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक माना जा रहा है।

कर्मचारियों के लिए घर से काम की व्यवस्था

न्यायालय ने प्रत्येक रजिस्ट्री शाखा या अनुभाग में अधिकतम 50 प्रतिशत कर्मचारियों को सप्ताह में दो दिन तक घर से काम करने की अनुमति दी है। इसके लिए अनिवार्य शर्त यह है कि साप्ताहिक रोस्टर पहले से तैयार किया जाए और न्यायालय का सामान्य कामकाज बाधित न हो।

संबंधित रजिस्ट्रार यह सुनिश्चित करेंगे कि सप्ताह आरंभ होने से पूर्व कार्यसूची तैयार हो। घर से काम करने वाले कर्मचारियों को टेलीफोन पर उपलब्ध रहना होगा और आवश्यकता पड़ने पर किसी भी समय कार्यालय आने के लिए तत्पर रहना होगा।

कब लागू होगी व्यवस्था और क्या होंगे अपवाद

यदि किसी शाखा की कार्य-प्रकृति को देखते हुए संबंधित रजिस्ट्रार की राय हो कि घर से काम करना प्रभावी नहीं है, तो वे उस शाखा के लिए इस व्यवस्था को प्रतिबंधित या संशोधित कर सकते हैं। यह लचीलापन यह सुनिश्चित करता है कि न्यायालय की प्रशासनिक दक्षता से कोई समझौता न हो।

क्या होगा आगे

गौरतलब है कि यह व्यवस्था उस दौर में लागू हो रही है जब पश्चिम एशिया संकट के चलते ईंधन की कीमतों पर दबाव बना हुआ है और केंद्र सरकार ने सभी संस्थानों से ऊर्जा बचत के उपाय अपनाने का आग्रह किया है। सर्वोच्च न्यायालय का यह कदम अन्य उच्च न्यायालयों और सरकारी संस्थाओं के लिए एक नज़ीर बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो न्यायपालिका की स्वतंत्र छवि को देखते हुए असाधारण है। हालाँकि, यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि वर्चुअल सुनवाई की अनिवार्यता से उन वादियों और अधिवक्ताओं पर क्या असर पड़ेगा जिनकी तकनीकी पहुँच सीमित है — विशेषकर छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले। कोविड काल में वर्चुअल सुनवाई के दौरान तकनीकी बाधाओं की शिकायतें सामने आई थीं; इस बार रजिस्ट्री को दी गई 'निर्बाध तकनीकी व्यवस्था' की ज़िम्मेदारी उसी चुनौती की प्रतिध्वनि है। न्यायिक दक्षता और समावेशी न्याय — दोनों के बीच संतुलन ही इस फैसले की असली कसौटी होगी।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट की वर्चुअल सुनवाई व्यवस्था क्या है?
सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय लिया है कि सोमवार और शुक्रवार को सभी मामलों की सुनवाई केवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से होगी। शेष तीन कार्य दिवसों पर हाइब्रिड व्यवस्था — व्यक्तिगत और वर्चुअल दोनों — बनी रहेगी।
यह फैसला क्यों लिया गया?
पश्चिम एशिया संकट के कारण उत्पन्न आर्थिक दबाव के चलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईंधन बचत की राष्ट्रीय अपील की थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने इसी के अनुरूप यह प्रशासनिक निर्णय लिया।
सुप्रीम कोर्ट के कर्मचारियों के लिए क्या बदलाव हुए हैं?
प्रत्येक रजिस्ट्री शाखा में अधिकतम 50 प्रतिशत कर्मचारियों को सप्ताह में दो दिन घर से काम करने की अनुमति दी गई है। इसके लिए साप्ताहिक रोस्टर अनिवार्य है और कर्मचारियों को फोन पर उपलब्ध रहना होगा।
जजों की कारपूलिंग व्यवस्था क्या है?
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों ने सर्वसम्मति से आपस में कारपूलिंग अपनाने का संकल्प लिया है, ताकि ईंधन की खपत कम की जा सके। यह स्वैच्छिक पहल राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण प्रयासों का हिस्सा है।
क्या घर से काम करने की व्यवस्था सभी शाखाओं पर लागू होगी?
नहीं, यदि किसी शाखा के संबंधित रजिस्ट्रार की राय हो कि वहाँ की कार्य-प्रकृति के कारण यह व्यवस्था प्रभावी नहीं है, तो वे उस शाखा के लिए इसे प्रतिबंधित या संशोधित कर सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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