आंध्र प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के लिए सप्ताह में 2 दिन 'वर्क फ्रॉम होम' की संभावना तलाशेगी नायडू सरकार
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने 14 मई 2025 को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया कि सरकारी विभागों में सप्ताह में दो दिन घर से काम (वर्क फ्रॉम होम) की व्यवहार्यता का आकलन किया जाए। यह कदम व्यापक मितव्ययिता उपायों की श्रृंखला का हिस्सा है, जो प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय संसाधन संरक्षण के आह्वान के अनुरूप उठाया जा रहा है।
मंत्रिमंडल के प्रमुख निर्णय
अमरावती में हुई कैबिनेट बैठक में राज्य सरकार ने कई ठोस उपायों की रूपरेखा तय की। सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री कोलुसु पार्थसारथी ने मीडिया को बताया कि 'मेरा देश, मेरी जिम्मेदारी' पहल के अंतर्गत जन प्रतिनिधि और अधिकारी स्वेच्छा से अपने काफिले में वाहनों की संख्या घटाएँगे, बैठकें ऑनलाइन माध्यम से आयोजित करेंगे और प्रत्येक सप्ताह 'नो व्हीकल फ्राइडे' का पालन करेंगे।
इसके अतिरिक्त, सरकारी वाहनों के लिए ईंधन खपत सीमा को न्यूनतम रखने और भविष्य में केवल इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद अनिवार्य करने का निर्णय लिया गया।
भू-राजनीतिक संदर्भ और आर्थिक चिंताएँ
कैबिनेट बैठक में यह रेखांकित किया गया कि पश्चिम एशिया के मौजूदा संघर्ष से ईंधन आयात लागत, विदेशी मुद्रा भंडार और कृषि निर्यात पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। विशेष रूप से केले, अनाज और अन्य बागवानी फसलों के निर्यात पर संभावित असर की चर्चा हुई।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में अनिश्चितता बनी हुई है और भारत अपनी तेल, गैस एवं यूरिया जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। राज्य सरकार ने इन आयातों को कम करने और स्थानीय कृषि उत्पादों के निर्यात को प्रोत्साहित करने को प्राथमिकता दी है।
जनता से अपील और जागरूकता अभियान
मुख्यमंत्री नायडू ने आम नागरिकों से भी इस पहल में सहभागी होने और स्वेच्छा से मितव्ययिता अपनाने की अपील की। सरकार ने घोषणा की कि जनजागरूकता के लिए व्यापक अभियान चलाए जाएँगे, ताकि ईंधन बचत का संदेश समाज के हर वर्ग तक पहुँचे।
गौरतलब है कि जन प्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों से कहा गया है कि वे स्वयं इन उपायों का अनुकरणीय पालन कर जनता के लिए आदर्श प्रस्तुत करें।
आगे की राह
वर्क फ्रॉम होम की व्यवहार्यता रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि किन विभागों में और किस स्तर के कर्मचारियों पर यह व्यवस्था लागू होगी। राज्य सरकार के इस प्रयोग पर अन्य राज्यों की नजर भी रहेगी, क्योंकि वैश्विक अनिश्चितता के दौर में सार्वजनिक व्यय में कटौती एक साझा चुनौती बन चुकी है।