सूरत की IT कंपनियों ने अपनाई WFH नीति, PM मोदी की ईंधन बचत अपील पर 70% कर्मचारी घर से करेंगे काम
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन संरक्षण की अपील का व्यापक असर अब सूरत के कॉर्पोरेट जगत में साफ़ दिखने लगा है। 15 मई 2026 को सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, सूरत की अनेक आईटी कंपनियों ने 'वर्क फ्रॉम होम' (WFH) नीति लागू करते हुए कर्मचारियों की दैनिक कार्यालय आवाजाही में उल्लेखनीय कटौती की है। कंपनियों का कहना है कि इस कदम से ईंधन की खपत घटने के साथ-साथ कार पूलिंग और सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को भी प्रोत्साहन मिल रहा है।
कंपनियों ने कैसे लागू की WFH नीति
सूरत स्थित बिज इनसाइट्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कुणाल शाह ने बताया, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद, हम पूरी ईमानदारी से उसका पालन करने और उसे बेहतरीन तरीके से लागू करने की कोशिश कर रहे हैं। पहले हमारा 100 प्रतिशत स्टाफ ऑफिस आता था, लेकिन अब हमने लगभग 70 प्रतिशत कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति दे दी है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल उन टीम सदस्यों को कार्यालय बुलाया जा रहा है जो अत्यावश्यक परियोजनाओं या निकट समय-सीमा वाले प्रोजेक्ट्स पर कार्यरत हैं।
कर्मचारियों की प्रतिक्रिया और बदलती आदतें
एक आईटी कर्मचारी ने बताया कि उनकी कंपनी ने WFH का विकल्प देने के साथ यह भी सुनिश्चित किया है कि जब भी किसी परियोजना पर चर्चा के लिए कार्यालय आना ज़रूरी हो, तभी आएँ। उन्होंने कहा कि उन्होंने इस विषय पर अपने परिवार से चर्चा की और निर्णय लिया कि अलग-अलग वाहन इस्तेमाल करने के बजाय वे अपने पिता या भाई के साथ एक ही गाड़ी में सफर करेंगे, जिससे पेट्रोल-डीजल की खपत घटेगी।
एक अन्य कर्मचारी, जो आईटी कंपनी में इंटर्न हैं और घर से कार्यालय तक 15–20 किलोमीटर की दूरी तय करते हैं, ने बताया कि वे आमतौर पर मित्र के साथ कार पूलिंग करते हैं और कभी-कभी सार्वजनिक परिवहन का भी उपयोग करते हैं। बारडोली से आने वाले एक अन्य कर्मचारी ने कहा कि वे कार्यालय केवल तभी आते हैं जब किसी परियोजना पर तत्काल ध्यान देना आवश्यक हो, और उस स्थिति में भी सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देते हैं।
ईंधन बचत अभियान का व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार ऊर्जा सुरक्षा और आयात पर निर्भरता घटाने को लेकर सक्रिय है। गौरतलब है कि भारत अपनी कच्चे तेल की ज़रूरत का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है, ऐसे में नागरिक और कॉर्पोरेट स्तर पर ईंधन बचत के प्रयास राष्ट्रीय ऊर्जा नीति के अनुरूप हैं। सूरत का आईटी क्षेत्र इस दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।
आम जनता और कर्मचारियों पर असर
WFH नीति से जहाँ एक ओर कर्मचारियों के यात्रा खर्च में कमी आ रही है, वहीं सार्वजनिक परिवहन और कार पूलिंग को बढ़ावा मिलने से शहर में यातायात का दबाव भी घटने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अन्य शहरों की कंपनियाँ भी इसी तरह की नीतियाँ अपनाएँ, तो राष्ट्रीय स्तर पर ईंधन की बचत में उल्लेखनीय योगदान हो सकता है।
आगे क्या
फिलहाल यह नीति अस्थायी आधार पर लागू की गई है, लेकिन कंपनी प्रबंधन के संकेत हैं कि यदि उत्पादकता पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा, तो इसे दीर्घकालिक रूप दिया जा सकता है। सूरत के कॉर्पोरेट जगत की यह पहल देश के अन्य औद्योगिक केंद्रों के लिए एक अनुकरणीय मॉडल बन सकती है।