सूरत की IT कंपनियों ने अपनाई WFH नीति, PM मोदी की ईंधन बचत अपील पर 70% कर्मचारी घर से करेंगे काम

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सूरत की IT कंपनियों ने अपनाई WFH नीति, PM मोदी की ईंधन बचत अपील पर 70% कर्मचारी घर से करेंगे काम

सारांश

PM मोदी की ईंधन बचत अपील पर सूरत की IT कंपनियों ने ठोस कदम उठाया — बिज इनसाइट्स ने 70% कर्मचारियों को WFH की अनुमति दी। कार पूलिंग और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देकर सूरत का कॉर्पोरेट सेक्टर राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण अभियान में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

मुख्य बातें

सूरत की अनेक आईटी कंपनियों ने PM मोदी की ईंधन बचत अपील के बाद 'वर्क फ्रॉम होम' नीति लागू की।
बिज इनसाइट्स के CEO कुणाल शाह के अनुसार, कंपनी के 70% कर्मचारी अब घर से काम कर रहे हैं।
केवल अत्यावश्यक परियोजनाओं या निकट समय-सीमा वाले प्रोजेक्ट्स पर कार्यरत कर्मचारियों को कार्यालय बुलाया जा रहा है।
कर्मचारी कार पूलिंग और सार्वजनिक परिवहन को अपनाकर ईंधन खपत घटा रहे हैं; एक इंटर्न 15–20 किलोमीटर की दूरी कार पूलिंग से तय करते हैं।
बारडोली से आने वाले कर्मचारी भी पब्लिक ट्रांसपोर्ट को प्राथमिकता दे रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन संरक्षण की अपील का व्यापक असर अब सूरत के कॉर्पोरेट जगत में साफ़ दिखने लगा है। 15 मई 2026 को सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, सूरत की अनेक आईटी कंपनियों ने 'वर्क फ्रॉम होम' (WFH) नीति लागू करते हुए कर्मचारियों की दैनिक कार्यालय आवाजाही में उल्लेखनीय कटौती की है। कंपनियों का कहना है कि इस कदम से ईंधन की खपत घटने के साथ-साथ कार पूलिंग और सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को भी प्रोत्साहन मिल रहा है।

कंपनियों ने कैसे लागू की WFH नीति

सूरत स्थित बिज इनसाइट्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कुणाल शाह ने बताया, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद, हम पूरी ईमानदारी से उसका पालन करने और उसे बेहतरीन तरीके से लागू करने की कोशिश कर रहे हैं। पहले हमारा 100 प्रतिशत स्टाफ ऑफिस आता था, लेकिन अब हमने लगभग 70 प्रतिशत कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति दे दी है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल उन टीम सदस्यों को कार्यालय बुलाया जा रहा है जो अत्यावश्यक परियोजनाओं या निकट समय-सीमा वाले प्रोजेक्ट्स पर कार्यरत हैं।

कर्मचारियों की प्रतिक्रिया और बदलती आदतें

एक आईटी कर्मचारी ने बताया कि उनकी कंपनी ने WFH का विकल्प देने के साथ यह भी सुनिश्चित किया है कि जब भी किसी परियोजना पर चर्चा के लिए कार्यालय आना ज़रूरी हो, तभी आएँ। उन्होंने कहा कि उन्होंने इस विषय पर अपने परिवार से चर्चा की और निर्णय लिया कि अलग-अलग वाहन इस्तेमाल करने के बजाय वे अपने पिता या भाई के साथ एक ही गाड़ी में सफर करेंगे, जिससे पेट्रोल-डीजल की खपत घटेगी।

एक अन्य कर्मचारी, जो आईटी कंपनी में इंटर्न हैं और घर से कार्यालय तक 15–20 किलोमीटर की दूरी तय करते हैं, ने बताया कि वे आमतौर पर मित्र के साथ कार पूलिंग करते हैं और कभी-कभी सार्वजनिक परिवहन का भी उपयोग करते हैं। बारडोली से आने वाले एक अन्य कर्मचारी ने कहा कि वे कार्यालय केवल तभी आते हैं जब किसी परियोजना पर तत्काल ध्यान देना आवश्यक हो, और उस स्थिति में भी सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देते हैं।

ईंधन बचत अभियान का व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार ऊर्जा सुरक्षा और आयात पर निर्भरता घटाने को लेकर सक्रिय है। गौरतलब है कि भारत अपनी कच्चे तेल की ज़रूरत का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है, ऐसे में नागरिक और कॉर्पोरेट स्तर पर ईंधन बचत के प्रयास राष्ट्रीय ऊर्जा नीति के अनुरूप हैं। सूरत का आईटी क्षेत्र इस दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।

आम जनता और कर्मचारियों पर असर

WFH नीति से जहाँ एक ओर कर्मचारियों के यात्रा खर्च में कमी आ रही है, वहीं सार्वजनिक परिवहन और कार पूलिंग को बढ़ावा मिलने से शहर में यातायात का दबाव भी घटने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अन्य शहरों की कंपनियाँ भी इसी तरह की नीतियाँ अपनाएँ, तो राष्ट्रीय स्तर पर ईंधन की बचत में उल्लेखनीय योगदान हो सकता है।

आगे क्या

फिलहाल यह नीति अस्थायी आधार पर लागू की गई है, लेकिन कंपनी प्रबंधन के संकेत हैं कि यदि उत्पादकता पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा, तो इसे दीर्घकालिक रूप दिया जा सकता है। सूरत के कॉर्पोरेट जगत की यह पहल देश के अन्य औद्योगिक केंद्रों के लिए एक अनुकरणीय मॉडल बन सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल उठता है कि क्या यह नीति केवल अपील-प्रेरित अस्थायी कदम है या दीर्घकालिक कार्यसंस्कृति में बदलाव की शुरुआत। भारत में WFH की उत्पादकता पर बहस अभी अनसुलझी है, और कंपनियाँ अक्सर इसे संकट-प्रबंधन के रूप में अपनाती हैं, न कि संरचनात्मक नीति के रूप में। यदि ईंधन बचत को वास्तविक राष्ट्रीय लक्ष्य बनाना है, तो कॉर्पोरेट जगत को सरकार के साथ मिलकर सार्वजनिक परिवहन अवसंरचना में निवेश और कार्बन-ट्रैकिंग तंत्र विकसित करने की दिशा में काम करना होगा — केवल अपील पर्याप्त नहीं है।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सूरत की IT कंपनियों ने WFH नीति क्यों लागू की?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचत अपील के बाद सूरत की IT कंपनियों ने 'वर्क फ्रॉम होम' नीति अपनाई, ताकि कर्मचारियों की दैनिक आवाजाही घटाकर पेट्रोल-डीजल की खपत कम की जा सके। इससे कार पूलिंग और सार्वजनिक परिवहन को भी प्रोत्साहन मिल रहा है।
बिज इनसाइट्स में कितने प्रतिशत कर्मचारी WFH कर रहे हैं?
बिज इनसाइट्स के CEO कुणाल शाह के अनुसार, कंपनी के लगभग 70% कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति दी गई है। केवल अत्यावश्यक या निकट समय-सीमा वाले प्रोजेक्ट्स पर काम करने वाले कर्मचारियों को कार्यालय आने के लिए कहा जा रहा है।
कर्मचारी ईंधन बचत के लिए क्या उपाय अपना रहे हैं?
कर्मचारी कार पूलिंग, सार्वजनिक परिवहन और परिवार के सदस्यों के साथ एक ही वाहन में यात्रा करने जैसे उपाय अपना रहे हैं। बारडोली जैसे दूरदराज के इलाकों से आने वाले कर्मचारी भी पब्लिक ट्रांसपोर्ट को प्राथमिकता दे रहे हैं।
क्या यह WFH नीति स्थायी होगी?
फिलहाल यह नीति अस्थायी आधार पर लागू है। कंपनी प्रबंधन के संकेत हैं कि यदि उत्पादकता प्रभावित नहीं हुई, तो इसे दीर्घकालिक रूप दिया जा सकता है, लेकिन इस बारे में कोई आधिकारिक घोषणा अभी नहीं की गई है।
PM मोदी की ईंधन बचत अपील का कॉर्पोरेट सेक्टर पर क्या असर पड़ा है?
प्रधानमंत्री मोदी की अपील के बाद सूरत सहित देश के कई हिस्सों में कॉर्पोरेट कंपनियाँ WFH नीति, कार पूलिंग प्रोत्साहन और सार्वजनिक परिवहन उपयोग को बढ़ावा दे रही हैं। सूरत का आईटी क्षेत्र इस दिशा में एक अग्रणी उदाहरण बनकर उभरा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 16 घंटे पहले
  2. कल
  3. कल
  4. 2 दिन पहले
  5. 2 दिन पहले
  6. 2 दिन पहले
  7. 2 दिन पहले
  8. 5 महीने पहले