PM मोदी की ईंधन बचत अपील: सूरत में डेस्टिनेशन वेडिंग रद्द, महिलाएं अपना रही हैं कारपूलिंग और 'वोकल फॉर लोकल'
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचत और विदेशी मुद्रा संरक्षण की अपील का असर अब गुजरात के सूरत शहर में ज़मीनी स्तर पर दिखने लगा है। यहाँ की महिलाओं और युवा पेशेवरों ने अपने निजी जीवन में उल्लेखनीय बदलाव किए हैं — किसी ने विदेश में होने वाली डेस्टिनेशन वेडिंग रद्द कर दी, तो किसी ने विदेश यात्रा का प्लान छोड़कर भारत भ्रमण का रास्ता चुना। 13 मई को सामने आई इन प्रतिक्रियाओं ने 'वोकल फॉर लोकल' अभियान को एक नई सामाजिक ऊर्जा दी है।
डेस्टिनेशन वेडिंग से सूरत की शादी तक
सूरत की व्यवसायी कृतिका शाह ने बताया कि उनके परिवार में शादी की तैयारियाँ चल रही थीं और पहले विदेश में डेस्टिनेशन वेडिंग की योजना बनाई गई थी। प्रधानमंत्री की अपील से प्रेरित होकर परिवार ने यह निर्णय बदल दिया और अब विवाह सूरत में ही आयोजित किया जाएगा।
कृतिका ने यह भी कहा कि शादी को छोटा और सरल रखने के साथ-साथ सोने की खरीदारी भी सीमित कर दी गई है। उन्होंने महिलाओं को सलाह दी कि महंगे सोने के गहनों के बजाय इमिटेशन ज्वेलरी और पुराने पारिवारिक गहनों — यानी हेरिटेज ज्वेलरी — का उपयोग एक बेहतर और सुंदर विकल्प हो सकता है। उनके अनुसार, भारतीय साड़ियों के साथ ऐसे गहने बेहद आकर्षक लगते हैं और अनावश्यक खर्च भी बचता है।
कारपूलिंग और सार्वजनिक परिवहन को मिल रही प्राथमिकता
सूरत की आर्किटेक्ट प्रांजल पटेल ने बताया कि उन्होंने भी प्रधानमंत्री की अपील को अपने दैनिक जीवन में उतारा है। अब वे ऑफिस जाने के लिए निजी वाहन की जगह अपने पिता के साथ कारपूलिंग करती हैं या सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करती हैं।
प्रांजल ने यह भी बताया कि दोस्तों के साथ विदेश घूमने का प्लान रद्द कर दिया गया है और अब वे भारत के विभिन्न पर्यटन स्थलों की यात्रा करेंगी। उनका मानना है कि इससे देश की अर्थव्यवस्था को मज़बूती मिलेगी और भारतीय पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
आर्थिक बचत से परे — पर्यावरण और ऊर्जा सुरक्षा
सूरत की इन महिलाओं का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गुजरात के गृह राज्य मंत्री हर्ष सांघवी की अपील केवल व्यक्तिगत आर्थिक बचत तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, यह अभियान प्रदूषण कम करने, ईंधन संरक्षण और विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने जैसे व्यापक राष्ट्रीय लक्ष्यों से भी जुड़ा है।
गौरतलब है कि भारत अपनी कच्चे तेल की ज़रूरत का लगभग 85% आयात करता है, जिससे विदेशी मुद्रा पर भारी दबाव पड़ता है। ऐसे में नागरिकों द्वारा ईंधन की खपत घटाने के छोटे-छोटे प्रयास भी व्यापक आर्थिक प्रभाव डाल सकते हैं।
युवाओं से जुड़ने की अपील
सूरत की इन महिलाओं ने युवाओं और समाज के अन्य वर्गों से भी 'वोकल फॉर लोकल' और संसाधन बचत के इस अभियान से जुड़ने की अपील की है। उनका मानना है कि यदि हर नागरिक छोटे-छोटे बदलाव करे तो देश की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्वावलंबन को नई दिशा मिल सकती है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान के बीच हालिया तनाव के बाद देश में राष्ट्रीय एकजुटता और संसाधन संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ी है। आने वाले हफ्तों में यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि यह जन-जागरण एक स्थायी व्यवहार परिवर्तन में बदल पाता है या नहीं।