भोजशाला मंदिर परिसर फैसला: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने धार की भोजशाला को माना मंदिर, हिंदू पक्ष ने बताया ऐतिहासिक

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भोजशाला मंदिर परिसर फैसला: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने धार की भोजशाला को माना मंदिर, हिंदू पक्ष ने बताया ऐतिहासिक

सारांश

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने 15 मई को धार की भोजशाला को मंदिर परिसर माना — 700 वर्षों के संघर्ष और चार साल की सुनवाई के बाद। याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने इसे हिंदू समाज के सपने की पूर्ति बताया। अब वहाँ नमाज़ बंद होगी और हिंदुओं को प्रतिदिन पूजा का अधिकार मिलेगा।

मुख्य बातें

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने 15 मई 2026 को धार की भोजशाला को मंदिर परिसर घोषित किया।
याचिका मई 2022 में दायर हुई थी; चार वर्षों की सुनवाई के बाद 12 मई को फैसला सुरक्षित रखा गया था।
हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने इसे 700 वर्षों के संघर्ष की जीत बताया।
फैसले के बाद भोजशाला में नमाज़ बंद होगी और हिंदू समाज को प्रतिदिन पूजा-हवन का अधिकार मिलेगा।
ASI के ऐतिहासिक निष्कर्षों में वाग्देवी (सरस्वती) की मूर्ति सहित अन्य मूर्तियों का उल्लेख है।
विश्व हिंदू परिषद और BJP नेताओं ने फैसले का स्वागत किया।

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने 15 मई 2026 को धार स्थित भोजशाला को मंदिर परिसर घोषित करते हुए एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया, जिससे हिंदू पक्ष को वह अधिकार मिला जिसके लिए वह दशकों से संघर्ष कर रहा था। न्यायालय के इस निर्णय के बाद अब भोजशाला में हिंदुओं के प्रवेश पर कोई प्रतिबंध नहीं रहेगा और वहाँ नमाज़ भी बंद होगी।

मुख्य घटनाक्रम

हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि मई 2022 में उच्च न्यायालय में यह याचिका दायर की गई थी। इसके बाद चार वर्षों तक सुनवाई चली और सभी पक्षों को न्यायालय ने सुना। 12 मई को न्यायालय ने फैसला सुरक्षित रखा था और 15 मई को निर्णय सुनाया गया।

गोयल के अनुसार, हिंदू समाज माँ सरस्वती मंदिर भोजशाला की मुक्ति और उसकी गरिमा की पुनर्स्थापना के लिए 700 वर्षों से संघर्ष कर रहा था। 2003 के आंदोलन के बाद भोजशाला में प्रवेश पर लगी पाबंदियाँ हटा दी गई थीं, परंतु यह स्थल पूरी तरह हिंदुओं को नहीं सौंपा गया था।

याचिकाकर्ता की प्रतिक्रिया

आशीष गोयल ने कहा, 'जो सपना हिंदू समाज और धारवासियों ने देखा था, वह पूरा हो रहा है।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अब भोजशाला में हिंदू समाज का कोई भी व्यक्ति प्रतिदिन पूजा-हवन कर सकेगा और न्यायालय ने हिंदू पक्ष की सभी माँगें स्वीकार की हैं।

विशेषज्ञ और नेताओं की प्रतिक्रिया

विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने उच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह सत्य, न्याय और संविधान की जीत है। उन्होंने कहा कि भोजशाला कभी संस्कृत का एक बड़ा ऐतिहासिक केंद्र हुआ करता था और सच्चाई को अधिक दिन दबाया नहीं जा सकता।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता आरपी सिंह ने कहा कि न्यायालय ने तथ्यों के आधार पर निर्णय दिया है। उन्होंने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के ऐतिहासिक निष्कर्षों का हवाला देते हुए बताया कि वहाँ मूर्तियाँ मौजूद थीं, जिनमें वाग्देवी की एक मूर्ति भी शामिल थी, जिन्हें देवी सरस्वती का ही एक रूप माना जाता है। सिंह ने कहा कि भोजशाला ज्ञान का मंदिर था जहाँ संस्कृत पढ़ाई जाती थी और अन्य पक्षों से अपेक्षा है कि वे इस फैसले को स्वीकार करेंगे।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि भोजशाला धार जिले में स्थित एक विवादित परिसर रहा है, जिसे हिंदू पक्ष माँ सरस्वती का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे मस्जिद के रूप में उपयोग करता रहा है। यह विवाद सदियों पुराना है और ASI के रिकॉर्ड में भी इस स्थल का ऐतिहासिक महत्त्व दर्ज है।

आगे क्या होगा

न्यायालय के इस फैसले के बाद अब यह देखना होगा कि मुस्लिम पक्ष उच्चतर न्यायालय में अपील करता है या नहीं। फैसले के क्रियान्वयन और परिसर के प्रबंधन को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था किस रूप में बनाई जाती है, यह भी आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

मुस्लिम शुक्रवार को नमाज़। इस अर्ध-समाधान ने दोनों पक्षों को असंतुष्ट रखा। असली प्रश्न यह है कि क्या इस फैसले के बाद सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के लिए प्रशासन पर्याप्त कदम उठाएगा — क्योंकि न्यायालय के फैसले कानूनी विवाद तो सुलझाते हैं, लेकिन सामुदायिक तनाव को अपने-आप शांत नहीं करते।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भोजशाला विवाद क्या है और यह फैसला क्यों महत्त्वपूर्ण है?
भोजशाला धार (मध्य प्रदेश) में स्थित एक ऐतिहासिक परिसर है जिसे हिंदू पक्ष माँ सरस्वती मंदिर और मुस्लिम पक्ष मस्जिद के रूप में दावा करता रहा है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने 15 मई 2026 को इसे मंदिर परिसर घोषित किया, जो इस सदियों पुराने विवाद में एक निर्णायक कानूनी मोड़ है।
भोजशाला में अब हिंदुओं को क्या अधिकार मिलेंगे?
न्यायालय के फैसले के अनुसार, हिंदू समाज का कोई भी व्यक्ति अब प्रतिदिन भोजशाला में पूजा-हवन कर सकेगा। याचिकाकर्ता आशीष गोयल के अनुसार, हिंदू पक्ष की सभी माँगें न्यायालय ने स्वीकार की हैं और परिसर में नमाज़ भी बंद होगी।
भोजशाला केस कब और कैसे शुरू हुआ था?
यह याचिका मई 2022 में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में दायर की गई थी। चार वर्षों तक सुनवाई चली, 12 मई 2026 को फैसला सुरक्षित रखा गया और 15 मई 2026 को निर्णय सुनाया गया।
ASI के निष्कर्षों ने इस फैसले में क्या भूमिका निभाई?
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के ऐतिहासिक रिकॉर्ड में भोजशाला परिसर में मूर्तियों की उपस्थिति दर्ज है, जिनमें वाग्देवी (देवी सरस्वती का एक रूप) की मूर्ति भी शामिल है। BJP नेता आरपी सिंह के अनुसार, न्यायालय ने इन्हीं तथ्यों के आधार पर निर्णय दिया है।
2003 से पहले और बाद में भोजशाला की स्थिति क्या थी?
2003 के आंदोलन के बाद भोजशाला में प्रवेश पर लगी पाबंदियाँ हटा दी गई थीं, परंतु परिसर पूरी तरह हिंदुओं को नहीं सौंपा गया था। तब से एक व्यवस्था के तहत हिंदू मंगलवार को और मुस्लिम शुक्रवार को परिसर का उपयोग करते थे, जो अब न्यायालय के फैसले से बदल जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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