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क्या धार में भोजशाला स्थल पर सरस्वती पूजा कड़ी सुरक्षा के बीच शुरू हुई?

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क्या धार में भोजशाला स्थल पर सरस्वती पूजा कड़ी सुरक्षा के बीच शुरू हुई?

सारांश

धार में सरस्वती पूजा का आयोजन विवादास्पद भोजशाला परिसर में कड़ी सुरक्षा के साथ किया गया। इस पूजा के दौरान हिंदू और मुस्लिम समुदाय के अनुयायी वहां उपस्थित होंगे। जानें, इस धार्मिक स्थल के बारे में और क्या है इसकी पृष्ठभूमि?

मुख्य बातें

भोजशाला परिसर विवादास्पद धार्मिक स्थल है।
कड़ी सुरक्षा के साथ सरस्वती पूजा आयोजित की गई।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन किया गया।
हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग एक साथ उपस्थित होंगे।
धार जिला प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा किया है।

धार, 23 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश के धार में विवादास्पद भोजशाला मंदिर-कमल मौला मस्जिद परिसर में शुक्रवार को कड़ी सुरक्षा के बीच सरस्वती पूजा का आयोजन प्रारम्भ हुआ।

देवी के भक्त बड़ी संख्या में सुबह से ही पूजा-अर्चना के लिए वहाँ उपस्थित हो रहे थे। सांप्रदायिक हिंसा की संभावना को रोकने के लिए इस स्थान पर भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई है।

मुस्लिम समुदाय के लोग भी दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच नमाज़ अदा करने के लिए वहां पहुँचेंगे।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म "एक्स" पर लिखा, "प्रदेश एवं देशवासियों को बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं। अक्षर, स्वर और ज्ञान की अधिष्ठात्री मां सरस्वती की कृपा से सभी का जीवन ज्ञान, सृजनशीलता, सुख व समृद्धि से परिपूर्ण हो, यही मंगलकामना है।"

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए बसंत पंचमी को सूर्योदय से सूर्यास्त तक हिंदुओं को पूजा करने की अनुमति दी और मुसलमानों को विवादित जगह पर दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक नमाज़ अदा करने की इजाजत दी।

भोजशाला मंदिर-कमल मौला मस्जिद परिसर एक विवादास्पद स्थान है क्योंकि हिंदू और मुस्लिम दोनों ही इसका धार्मिक महत्व मानते हैं।

विवाद यह है कि हिंदू इसे एक 11वीं सदी का स्मारक मानते हैं, जिसे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित किया गया है, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे कमल मौला मस्जिद कहता है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, धार जिला प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया है और विवादित स्थल के चारों ओर 8,000 से अधिक पुलिसकर्मी और रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) तैनात किए हैं।

धार कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने कहा कि जिला प्रशासन और पुलिस ने इस अवसर के लिए पूरी तैयारी कर ली है, और मुख्य उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना होगा।

उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि धार्मिक नफरत भड़काने वाली किसी भी सामग्री के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, चाहे वह अखबारों, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया या सोशल मीडिया के जरिए हो।

एसआई द्वारा 7 अप्रैल, 2003 को किए गए एक इंतज़ाम के तहत, हिंदू मंगलवार को भोजशाला परिसर में पूजा करते हैं और मुसलमान शुक्रवार को नमाज़ पढ़ते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भोजशाला स्थल का विवाद क्यों है?
भोजशाला स्थल एक विवादित स्थान है क्योंकि हिंदू इसे देवी सरस्वती का मंदिर मानते हैं, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे कमल मौला मस्जिद कहते हैं।
सरस्वती पूजा कब आयोजित की जाती है?
सरस्वती पूजा हर साल बसंत पंचमी के अवसर पर आयोजित की जाती है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में क्या आदेश दिया?
सुप्रीम कोर्ट ने हिंदुओं को पूजा करने और मुसलमानों को नमाज़ अदा करने की अनुमति दी है।
इस बार सुरक्षा व्यवस्था कैसी है?
इस बार कड़ी सुरक्षा के लिए 8,000 से अधिक पुलिसकर्मी और रैपिड एक्शन फोर्स तैनात किए गए हैं।
क्या धार्मिक नफरत भड़काने वाली सामग्री पर कार्रवाई होगी?
हाँ, किसी भी धार्मिक नफरत भड़काने वाली सामग्री पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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