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पंचकूला नगर निगम घोटाला: सीबीआई ने आईएएस अधिकारी राम कुमार सिंह को किया गिरफ्तार, ₹79.46 करोड़ की हेराफेरी

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पंचकूला नगर निगम घोटाला: सीबीआई ने आईएएस अधिकारी राम कुमार सिंह को किया गिरफ्तार, ₹79.46 करोड़ की हेराफेरी

सारांश

पंचकूला नगर निगम में ₹79.46 करोड़ की सरकारी धनराशि की हेराफेरी के मामले में सीबीआई ने तत्कालीन कमिश्नर आईएएस राम कुमार सिंह को गिरफ्तार किया। यह हरियाणा सरकार के 8 विभागों से ₹504 करोड़ निकालने वाले बड़े बैंक घोटाले का हिस्सा है।

मुख्य बातें

सीबीआई ने 18 जून 2026 को आईएएस अधिकारी राम कुमार सिंह को पंचकूला नगर निगम फंड घोटाले में गिरफ्तार किया।
एमसी पंचकूला में कथित तौर पर ₹79.46 करोड़ का दुरुपयोग; यह ₹504 करोड़ के बड़े बैंक घोटाले का हिस्सा।
फर्जी एफडी के नाम पर चेक दिए गए; धनराशि शेल कंपनियों में स्थानांतरित की गई।
हरियाणा सरकार के 8 विभाग इस बड़े घोटाले से प्रभावित; जांच पहले राज्य सतर्कता ब्यूरो के पास थी।
अब तक 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट; 6 बैंक अधिकारी , 3 सरकारी कर्मचारी , 2 कंपनियाँ और 6 निजी व्यक्ति शामिल।
चंडीगढ़ और करनाल में सिंह के आवासों पर छापेमारी, अहम दस्तावेज बरामद।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 18 जून 2026 को पंचकूला नगर निगम फंड घोटाले में आईएएस अधिकारी राम कुमार सिंह को गिरफ्तार किया, जो घटनाक्रम के समय पंचकूला नगर निगम (एमसी) के कमिश्नर के पद पर तैनात थे। यह गिरफ्तारी आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की चंडीगढ़ सेक्टर-32 शाखा में एमसी पंचकूला के खाते से सरकारी धनराशि के कथित दुरुपयोग के मामले में की गई है।

घोटाले का तरीका

जांच में सामने आया है कि विचाराधीन बैंक खाता हरियाणा सरकार के वित्त विभाग के प्रचलित नियमों का उल्लंघन कर खोला गया था। खाता खोलने के फॉर्म में जानकारी इस प्रकार दर्ज की गई थी कि बाद के कपटपूर्ण लेन-देन को छिपाया जा सके।

जांच के अनुसार, राम कुमार सिंह ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के आरोपी अधिकारियों से मिलीभगत कर बिचौलियों के माध्यम से कई हस्ताक्षरित चेक सौंपे। ये चेक फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) खोलने के नाम पर दिए गए थे, परंतु वास्तव में कोई एफडी नहीं बनाई गई। निकाली गई धनराशि को आरोपी बैंक अधिकारियों द्वारा संचालित शेल कंपनियों में स्थानांतरित कर दिया गया।

मुख्य घटनाक्रम

सीबीआई के अनुसार यह धोखाधड़ी तत्कालीन कमिश्नर और एमसी पंचकूला के सीनियर अकाउंटेंट की जानकारी एवं सक्रिय भागीदारी से अंजाम दी गई। उक्त सीनियर अकाउंटेंट को सीबीआई इस मामले में पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।

सिंह की गिरफ्तारी के बाद चंडीगढ़ और करनाल में उनके आवासों पर तलाशी ली गई, जिसमें कई अहम दस्तावेज बरामद हुए हैं।

घोटाले का दायरा

एमसी पंचकूला में हुई इस धोखाधड़ी में कथित तौर पर ₹79.46 करोड़ का दुरुपयोग शामिल है। यह आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की सेक्टर-32 शाखा से जुड़े एक बड़े घोटाले का हिस्सा है, जिसमें हरियाणा सरकार के 8 विभागों के ₹504 करोड़ फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट और डेबिट नोट के जरिए निकालकर शेल कंपनियों में भेजे गए।

राज्य सरकार के अनुरोध पर सीबीआई ने यह जांच हरियाणा राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से अपने हाथ में ली थी।

चार्जशीट और अन्य मामले

अब तक सीबीआई ने हरियाणा से जुड़े इस मामले में 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है — जिनमें आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के 6 बैंक अधिकारी, हरियाणा सरकार के 3 कर्मचारी, 2 कंपनियाँ और 6 निजी व्यक्ति शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त सीबीआई ने चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश से दो और मामले अपने हाथ में लिए हैं — एक चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (सीएससीएल) और चंडीगढ़ नगर निगम से संबंधित, दूसरा क्रेस्ट चंडीगढ़ से। दोनों मामलों में अलग-अलग चार्जशीट दाखिल की जा चुकी हैं और सीएससीएल मामले में एक वरिष्ठ आईएफओएस अधिकारी को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।

आगे क्या होगा

सीबीआई की जांच अभी जारी है और अधिकारियों के अनुसार और गिरफ्तारियों से इनकार नहीं किया जा सकता। बरामद दस्तावेजों की जांच के बाद मामले में नए आरोपियों के नाम सामने आने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो एक ही बैंक शाखा और 8 सरकारी विभागों को लपेटता है, प्रणालीगत निगरानी की विफलता को उजागर करता है। असली सवाल यह है कि इतने बड़े पैमाने पर फर्जी एफडी और शेल कंपनियों का जाल इतने लंबे समय तक कैसे छिपा रहा। सीबीआई की जांच अभी 17 आरोपियों तक सीमित है, लेकिन जिस तरह से हरियाणा के कई विभाग एक साथ प्रभावित हुए, वह बताता है कि यह किसी एक अधिकारी की एकल करतूत नहीं थी।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचकूला नगर निगम फंड घोटाला क्या है?
यह आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की चंडीगढ़ सेक्टर-32 शाखा में एमसी पंचकूला के खाते से ₹79.46 करोड़ की कथित हेराफेरी का मामला है। फर्जी एफडी के नाम पर चेक जारी कर धनराशि शेल कंपनियों में भेजी गई; यह हरियाणा सरकार के 8 विभागों से जुड़े ₹504 करोड़ के बड़े घोटाले का हिस्सा है।
सीबीआई ने आईएएस राम कुमार सिंह को क्यों गिरफ्तार किया?
जांच में सामने आया कि तत्कालीन एमसी पंचकूला कमिश्नर राम कुमार सिंह ने बैंक अधिकारियों से मिलीभगत कर बिचौलियों के जरिए हस्ताक्षरित चेक दिए, जिनसे धोखाधड़ी की गई। चंडीगढ़ और करनाल में उनके आवासों पर छापेमारी में अहम दस्तावेज भी बरामद हुए हैं।
इस मामले में अब तक कितने लोगों पर चार्जशीट दाखिल हो चुकी है?
सीबीआई हरियाणा के मामले में 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जिनमें 6 बैंक अधिकारी, 3 सरकारी कर्मचारी, 2 कंपनियाँ और 6 निजी व्यक्ति शामिल हैं। इसके अलावा चंडीगढ़ के दो अलग मामलों में भी चार्जशीट दाखिल की गई है।
यह जांच सीबीआई के पास कैसे पहुँची?
हरियाणा राज्य सरकार के अनुरोध पर सीबीआई ने यह जांच राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से अपने हाथ में ली। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ा और चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश के दो अन्य मामले भी सीबीआई ने संभाले।
इस घोटाले से कौन-से विभाग और संस्थाएँ प्रभावित हुई हैं?
हरियाणा सरकार के 8 विभागों के फंड इस घोटाले में प्रभावित हुए। इसके अलावा चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (सीएससीएल), चंडीगढ़ नगर निगम और क्रेस्ट चंडीगढ़ से जुड़े मामले भी सामने आए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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