शिव माधव की नई फिल्म: 1980 के दशक की सुपरहीरो दुनिया में विज्ञान और फैंटेसी का संगम, अक्टूबर से शूटिंग
सारांश
मुख्य बातें
निर्देशक शिव माधव — जिन्हें विज्ञान-आधारित फिल्म '3.6.9' के लिए जाना जाता है — अब एक बड़े कमर्शियल प्रोजेक्ट के साथ दक्षिण भारतीय सिनेमा में वापसी करने जा रहे हैं। उनकी नई फिल्म 1980 के दशक की पृष्ठभूमि पर आधारित होगी, जिसमें विज्ञान, फैंटेसी और सुपरहीरो कथा को एक साथ बुना गया है। शूटिंग अक्टूबर 2026 से रामोजी फिल्म सिटी में शुरू होने की योजना है।
फिल्म की विशेषताएँ
शिव माधव के अनुसार, यह फिल्म पूरी तरह एक कमर्शियल एंटरटेनर होगी। इसमें तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ सिनेमा के जाने-माने कलाकार नज़र आएंगे। फिल्म की तकनीकी टीम में भी बड़े नाम जोड़े जा रहे हैं।
निर्देशक ने बताया कि फिल्म में बड़े सेट तैयार किए जाएंगे और वास्तविक वस्तुओं के साथ-साथ मिनिएचर का बड़े पैमाने पर उपयोग होगा। मिनिएचर निर्माण का काम पहले ही शुरू हो चुका है। उन्होंने कहा, 'फिल्म में बड़े सेट होंगे। वास्तविक चीजों और मिनिएचर का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होगा। कहानी 1980 के दशक में सेट है और इसमें विज्ञान और फैंटेसी को सुपरहीरो की कहानी के साथ जोड़ा गया है।'
'3.6.9' का अनुभव और सबक
शिव माधव की पहली फिल्म '3.6.9' ने 81 मिनट में 100 कलाकारों के साथ शूट होने वाली फिल्म के रूप में दो विश्व रिकॉर्ड बनाए थे — यह तमिलनाडु की पहली ऐसी उपलब्धि थी। बावजूद इसके, फिल्म को वह व्यापक पहचान नहीं मिली जिसकी उम्मीद निर्देशक को थी।
शिव ने अपनी निराशा साझा करते हुए कहा, 'मेरी पहली फिल्म '3.6.9' थी। इसने तमिलनाडु की पहली ऐसी फिल्म के तौर पर दो विश्व रिकॉर्ड बनाए। लेकिन दुर्भाग्य से लोगों को यह तक पता नहीं चला कि किसी व्यक्ति ने 100 कलाकारों के साथ सिर्फ 81 मिनट में फिल्म बनाई थी। रिकॉर्ड बनाने के बाद मुझे लगा था कि अब चीजें अगले स्तर पर जाएंगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ऐसा लगा जैसे मेरे सारे सपने बिखर गए।'
रिकॉर्ड की राह छोड़ी, कमर्शियल सिनेमा को चुना
'3.6.9' के बाद के तीन वर्षों में कई निर्माताओं ने शिव से संपर्क किया और उन्हें एक और रिकॉर्ड-केंद्रित फिल्म बनाने का प्रस्ताव दिया। लेकिन निर्देशक ने इस रास्ते पर चलने से इनकार कर दिया।
उन्होंने कहा, 'मैं नहीं चाहता कि मेरी पहचान सिर्फ रिकॉर्ड बनाने वाले फिल्मकार के तौर पर बने, इसलिए मैंने कमर्शियल सिनेमा की तरफ जाने का फैसला किया।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 'फिल्म बनाना कला होने के साथ-साथ कारोबार भी है, और इसी समझ के साथ मैंने अपनी अगली फिल्म को बड़े स्तर पर तैयार करने का फैसला किया है।'
तकनीक में तीन साल की तैयारी
शिव माधव ने बताया कि पिछले तीन साल उनके लिए गहन सीखने का दौर रहे, जिसमें उन्होंने VFX, AI और आधुनिक फिल्म-निर्माण तकनीकों की संभावनाओं को समझा। उनका कहना है कि वे इस नई फिल्म को हॉलीवुड के स्तर पर बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण भारतीय सिनेमा — विशेषकर तमिल और तेलुगु — वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है और दर्शक बड़े बजट की तकनीकी रूप से समृद्ध फिल्मों की माँग कर रहे हैं। शिव माधव की यह फिल्म उस बदलते परिदृश्य में अपनी जगह बनाने का प्रयास है।