असम की पंचायतों को वित्त आयोग से ₹525 करोड़ का आवंटन, CM हिमंता का गांधी जयंती पर ग्रामीण सशक्तिकरण का संकल्प
सारांश
मुख्य बातें
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 2 अक्टूबर 2026 को गांधी जयंती के अवसर पर घोषणा की कि वित्त आयोग ने 2025 में असम की पंचायतों को ₹525 करोड़ से अधिक की राशि आवंटित की थी, जिसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर कल्याणकारी योजनाओं को गति देना है। मुख्यमंत्री ने यह बात महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देते हुए एक पोस्ट में कही, जिसमें उन्होंने राज्य सरकार की ग्रामीण सशक्तिकरण पहलों का उल्लेख किया।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्यमंत्री हिमंता सरमा ने कहा, 'उनके विजन से प्रेरित होकर देश स्वदेशी और आत्मनिर्भरता के एक नए दौर में आगे बढ़ रहा है, ताकि विकास समाज के आखिरी व्यक्ति तक पहुँचे।' उन्होंने स्पष्ट किया कि वित्त आयोग का यह अनुदान ग्राम पंचायत स्तर पर विकेंद्रीकृत योजना निर्माण और बुनियादी ढाँचे के निर्माण को बल देता है।
सरमा ने आगे कहा, 'हम उनके दिखाए रास्ते पर चलते रहेंगे और अपने गाँवों व पंचायतों को अधिक मजबूत और आत्मनिर्भर बनने के लिए सशक्त बनाएँगे।'
वित्त आयोग अनुदान का महत्त्व
असम आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, वित्त आयोग की ग्रांट ने ग्राम पंचायत स्तर पर विकेंद्रीकृत नियोजन और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। गौरतलब है कि यह आवंटन ऐसे समय में आया है जब असम सरकार पंचायती राज संस्थाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने पर विशेष ज़ोर दे रही है।
राज्य का पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग मजदूरी-आधारित रोजगार, ग्रामीण आवास, आजीविका संवर्धन, बुनियादी ढाँचा विकास और सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों का संचालन करता है। इस अनुदान से इन कार्यक्रमों को और बल मिलने की संभावना है।
गांधी जयंती और 'आत्मनिर्भरता' का संदर्भ
मुख्यमंत्री का यह वक्तव्य 2 अक्टूबर को आया — वह दिन जब देश महात्मा गांधी की जयंती मनाता है। गांधी के ग्रामोदय, स्वदेशी और जमीनी स्तर पर जन-भागीदारी के विचारों का उल्लेख करते हुए सरमा ने राज्य की विकास नीति को उस दर्शन से जोड़ा। यह ऐसे समय में मायने रखता है जब केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर 'आत्मनिर्भर भारत' को नीतिगत केंद्रबिंदु बनाया जा रहा है।
आम जनता पर असर
विशेषज्ञों के अनुसार, ₹525 करोड़ से अधिक के इस आवंटन का सीधा लाभ असम के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लाखों लोगों को मिल सकता है — विशेषकर उन्हें जो मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना और स्वयं सहायता समूह जैसी कल्याणकारी योजनाओं पर निर्भर हैं। पंचायती राज संस्थाओं को इस धन के सुचारु प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
क्या होगा आगे
असम सरकार ने संकेत दिया है कि पंचायतों की आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में आगे और पहलें की जाएँगी। राज्य का ध्यान अब पंचायती राज संस्थाओं की क्षमता निर्माण और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर भी है, ताकि वित्त आयोग का यह अनुदान वास्तविक जमीनी बदलाव में परिवर्तित हो सके।