असम के युवाओं को राज्य न छोड़ना पड़े — CM हिमंता बिस्वा सरमा का 80वें स्वतंत्रता दिवस पर विजन
सारांश
मुख्य बातें
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 15 अगस्त 2026 को खानापारा में आयोजित 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में एक आत्मनिर्भर, शांतिपूर्ण और अवसर-संपन्न असम का विजन रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य का लक्ष्य ऐसा माहौल तैयार करना है जहाँ युवाओं को शिक्षा, रोज़गार या पेशेवर अवसरों की तलाश में असम छोड़ने पर मजबूर न होना पड़े।
असम का अपना विकास मॉडल
सरमा ने कहा कि असम अब केवल अन्य राज्यों के विकास के नक्शेकदम पर नहीं चल रहा, बल्कि अपना स्वतंत्र विकास मॉडल गढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य का यह परिवर्तन शांति, बुनियादी ढाँचा, औद्योगिक विकास, निवेश, सुधार और प्रौद्योगिकी — इन छह स्तंभों पर टिका है, जिसका अंतिम उद्देश्य प्रत्येक नागरिक के लिए अवसर सुनिश्चित करना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वे एक ऐसा असम चाहते हैं जहाँ देश और दुनिया के लोग संभावनाएँ तलाशने के लिए आएँ — न कि असम के युवा बाहर जाने को विवश हों। यह बयान राज्य की दशकों पुरानी 'ब्रेन ड्रेन' की समस्या की पृष्ठभूमि में खासा महत्वपूर्ण है।
आर्थिक प्रगति और प्रमुख परियोजनाएँ
सरमा ने बताया कि असम की अर्थव्यवस्था एक दशक से भी कम समय में लगभग तीन गुना हो चुकी है, जिससे सरकार की बुनियादी ढाँचे और विकास परियोजनाओं में निवेश करने की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने सेमीकंडक्टर विनिर्माण जैसे उच्च-स्तरीय उद्योगों के उभरने और बैहाटा चारियाली–तेजपुर चार लेन राजमार्ग जैसी कनेक्टिविटी परियोजनाओं को बदलते आर्थिक परिदृश्य के संकेत के रूप में सामने रखा।
गौरतलब है कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र में असम की दिलचस्पी केंद्र सरकार की राष्ट्रीय सेमीकंडक्टर मिशन के साथ संरेखित है, जो पूर्वोत्तर भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित करने की कोशिश कर रही है।
नई घोषणाएँ: शहर, पुलिस और महिला सुरक्षा
मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस पर कई अहम पहलों की घोषणा की:
विधायक क्षेत्र विकास निधि में वृद्धि की जाएगी। गुवाहाटी हवाई अड्डे के निकट एक उपग्रह शहर (सैटेलाइट टाउन) विकसित करने की योजना बनाई गई है। असम पुलिस की आपातकालीन 112 सेवा को चौबीसों घंटे वाहन तैनाती के साथ आधुनिक बनाया जाएगा।
महिला अधिकारों के मोर्चे पर सरमा ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा: सरकारी कर्मचारियों द्वारा बिना कानूनी तलाक के छोड़ी गई पत्नियों को वित्तीय सुरक्षा देने के लिए यदि पहली पत्नी सरकारी सहायता के लिए आवेदन करती है, तो संबंधित कर्मचारी के वेतन का 20 प्रतिशत सीधे उसके बैंक खाते में स्थानांतरित किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि निजी क्षेत्र के कर्मचारियों पर भी इसी तरह का कानून लाने पर विचार किया जा रहा है।
बाल विवाह और सामाजिक सुधार
सरमा ने बाल विवाह के विरुद्ध नए सिरे से अभियान चलाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह कुप्रथा बच्चों को शिक्षा, बचपन और भविष्य के अवसरों से वंचित कर देती है। यह ऐसे समय में आया है जब असम सरकार पिछले दो वर्षों में बाल विवाह के खिलाफ कई अभियान चला चुकी है और इस दिशा में गिरफ्तारियाँ भी हो चुकी हैं।
मुख्यमंत्री ने मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन और बैडमिंटन खिलाड़ी अस्मिता चलिहा का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि युवाओं को सही मंच और अवसर मिले, तो असम के युवा वैश्विक स्तर पर श्रेष्ठ प्रदर्शन करने में सक्षम हैं।
ऐतिहासिक संदर्भ: 800 साल का मील का पत्थर
सरमा ने असम के इतिहास को याद करते हुए स्वर्गदेव चाओ लुंग सुकाफा के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2028 में ब्रह्मपुत्र घाटी में उनके आगमन के 800 वर्ष पूरे होंगे — जिसे असम के एकीकरण और सह-अस्तित्व की विरासत में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर माना जाएगा। राज्य सरकार इस अवसर को विशेष रूप से मनाने की तैयारी में है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन का समापन करते हुए कहा कि सरकार का विजन केवल सड़क और पुल तक सीमित नहीं है — यह प्रत्येक नागरिक के सम्मान, महिलाओं के सशक्तिकरण, गाँवों तक बेहतर संपर्क और हर परिवार के लिए आशा एवं अवसर सुनिश्चित करने का विजन है। आने वाले वर्षों में इन घोषणाओं के क्रियान्वयन पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी।