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असम पुलिस ने हैलाकांडी में ₹60 लाख की याबा टैबलेट जब्त कीं, दो तस्कर गिरफ्तार

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असम पुलिस ने हैलाकांडी में ₹60 लाख की याबा टैबलेट जब्त कीं, दो तस्कर गिरफ्तार

सारांश

असम के हैलाकांडी में पुलिस ने ₹60 लाख मूल्य की 816.9 ग्राम संदिग्ध याबा टैबलेट बरामद कर दो तस्करों को गिरफ्तार किया। जाँच एजेंसियाँ अब इस खेप के पीछे के अंतर-राज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश करने में जुटी हैं।

मुख्य बातें

असम पुलिस ने हैलाकांडी जिले में ₹60 लाख मूल्य की संदिग्ध याबा टैबलेट जब्त कीं।
बरामद सामग्री का कुल वज़न 816.9 ग्राम दर्ज किया गया।
गिरफ्तार आरोपी: बहारुल आलम मजूमदार और चायेक हुसैन लस्कर ।
याबा मेथम्फेटामाइन और कैफीन से बनी सिंथेटिक ड्रग है, जो पूर्वोत्तर में बड़े पैमाने पर तस्करी की जाती है।
जाँच टीमें संभावित अंतर-राज्यीय तस्करी नेटवर्क की कड़ियाँ जोड़ने में लगी हैं।

असम पुलिस ने हैलाकांडी जिले में ₹60 लाख से अधिक मूल्य की कथित याबा टैबलेट की एक बड़ी खेप बरामद की है और इस सिलसिले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने शुक्रवार, 3 अक्टूबर 2026 को यह जानकारी दी। बरामद सामग्री का वज़न 816.9 ग्राम बताया गया है।

मुख्य घटनाक्रम

पुलिस ने नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध परिवहन के विरुद्ध जारी विशेष अभियान के दौरान यह कार्रवाई की। अधिकारियों के अनुसार, संदिग्धों को तब रोका गया जब वे इस प्रतिबंधित सामग्री को लेकर जा रहे थे। तलाशी में 816.9 ग्राम कथित याबा टैबलेट बरामद हुईं, जिनकी अनुमानित बाज़ार कीमत ₹60 लाख आँकी गई है।

गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों की पहचान बहारुल आलम मजूमदार और चायेक हुसैन लस्कर के रूप में की गई है। उनके विरुद्ध संबंधित नारकोटिक्स कानूनों के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।

याबा क्या है और इसकी तस्करी क्यों बढ़ रही है

जब्त की गई टैबलेट के याबा होने का संदेह है — यह मेथम्फेटामाइन और कैफीन के मिश्रण से बनी एक सिंथेटिक नशीली दवा है, जो पूर्वोत्तर भारत में अत्यंत प्रचलित है। यह ऐसे समय में आया है जब असम और मिज़ोरम की सीमाओं से म्यांमार से याबा की आवक लगातार बढ़ती जा रही है। गौरतलब है कि पूर्वोत्तर क्षेत्र इस नशीले पदार्थ के लिए एक प्रमुख पारगमन मार्ग बन गया है।

जाँच की दिशा

अधिकारियों ने बताया कि जाँच टीमें यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या दोनों आरोपी असम और पड़ोसी राज्यों में सक्रिय किसी बड़े अंतर-राज्यीय तस्करी नेटवर्क से जुड़े हैं। पुलिस दोनों से खेप के स्रोत, गंतव्य और नेटवर्क में शामिल अन्य व्यक्तियों के बारे में गहन पूछताछ कर रही है।

अधिकारियों ने यह भी बताया कि संवेदनशील इलाकों और संदिग्ध पारगमन रास्तों पर निगरानी एवं जाँच-चौकियाँ बढ़ा दी गई हैं।

आम जनता और क्षेत्र पर असर

हैलाकांडी जिला बांग्लादेश और मिज़ोरम से सटा हुआ है, जिसके कारण यह नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। स्थानीय युवाओं में याबा के बढ़ते चलन को लेकर सामाजिक संगठन पहले से चिंता जता चुके हैं। यह बरामदगी दर्शाती है कि तस्कर बड़ी मात्रा में इस दवा को जिले में पहुँचाने की कोशिश कर रहे थे।

आगे क्या होगा

दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा जाना अपेक्षित है। जाँच एजेंसियाँ आपूर्ति श्रृंखला की पूरी कड़ी उजागर करने के लिए काम कर रही हैं। अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में और गिरफ्तारियाँ भी हो सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो दर्शाता है कि यह तस्करी अब छोटे स्तर की नहीं रही। असली सवाल यह है कि क्या पुलिस केवल 'मिडिलमैन' पकड़ने तक सीमित रहेगी या आपूर्ति श्रृंखला के मूल स्रोत तक पहुँच पाएगी — जो अब तक अधिकांश मामलों में अछूता रहा है।
RashtraPress
2 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम पुलिस ने हैलाकांडी में क्या जब्त किया?
असम पुलिस ने हैलाकांडी जिले में 816.9 ग्राम संदिग्ध याबा टैबलेट जब्त कीं, जिनकी अनुमानित बाज़ार कीमत ₹60 लाख बताई गई है। इस कार्रवाई में दो आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया।
याबा ड्रग क्या है और यह पूर्वोत्तर भारत में क्यों फैल रही है?
याबा मेथम्फेटामाइन और कैफीन के मिश्रण से बनी एक सिंथेटिक नशीली दवा है। पूर्वोत्तर भारत म्यांमार से लगी सीमाओं के कारण इसके लिए प्रमुख पारगमन और खपत क्षेत्र बन गया है।
हैलाकांडी ड्रग केस में किसे गिरफ्तार किया गया?
गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों की पहचान बहारुल आलम मजूमदार और चायेक हुसैन लस्कर के रूप में की गई है। पुलिस ने उन्हें तब रोका जब वे कथित प्रतिबंधित सामग्री लेकर जा रहे थे।
इस मामले में आगे की जाँच किस दिशा में जाएगी?
जाँच टीमें यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि दोनों आरोपी किसी बड़े अंतर-राज्यीय नशा तस्करी नेटवर्क से जुड़े हैं या नहीं। खेप के स्रोत, गंतव्य और नेटवर्क में शामिल अन्य व्यक्तियों की पहचान के लिए पूछताछ जारी है।
हैलाकांडी जिला नशा तस्करी के लिए संवेदनशील क्यों माना जाता है?
हैलाकांडी बांग्लादेश और मिज़ोरम से सटा जिला है, जिसके कारण यह नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए एक संवेदनशील पारगमन क्षेत्र बना हुआ है। पुलिस ने यहाँ संदिग्ध रास्तों पर निगरानी बढ़ा दी है।
राष्ट्र प्रेस
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