मिजोरम में ₹19.21 करोड़ की मेथ टैबलेट जब्त, मणिपुर के दो तस्कर गिरफ्तार

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मिजोरम में ₹19.21 करोड़ की मेथ टैबलेट जब्त, मणिपुर के दो तस्कर गिरफ्तार

सारांश

मिजोरम पुलिस ने सैतुअल जिले में एक संदिग्ध कार से ₹19.21 करोड़ मूल्य की 2.02 लाख मेथामफेटामाइन टैबलेट बरामद कीं। मणिपुर के दो आरोपी गिरफ्तार — यह बरामदगी म्यांमार सीमा से पूर्वोत्तर में बढ़ती याबा तस्करी की गंभीर तस्वीर पेश करती है।

मुख्य बातें

मिजोरम पुलिस ने सैतुअल जिले के केइफांग जंक्शन पर ₹19.21 करोड़ मूल्य की मेथामफेटामाइन टैबलेट जब्त कीं।
कुल 2.02 लाख टैबलेट , वजन 24.016 किलोग्राम , 20 बंडलों में छिपाकर रखी गई थीं।
ओन्खोथांग हाओकिप (33) , चंदेल, मणिपुर और मैथ्यू (46) , चुराचांदपुर, मणिपुर।
नशीली गोलियाँ कार के स्पेयर टायर के नीचे और मडगार्ड के पीछे छिपाई गई थीं।
NDPS अधिनियम, 1985 के तहत मामला दर्ज; तस्करी में प्रयुक्त वाहन भी जब्त।
मिजोरम, म्यांमार और बांग्लादेश सीमा के कारण पूर्वोत्तर में नशा तस्करी का प्रमुख गलियारा बना हुआ है।

मिजोरम पुलिस ने सैतुअल जिले के केइफांग जंक्शन के निकट एक सफेद कार को रोककर ₹19.21 करोड़ से अधिक मूल्य की मेथामफेटामाइन टैबलेट की बड़ी खेप बरामद की है। इस कार्रवाई में मणिपुर के दो कथित ड्रग तस्करों को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस अधिकारियों ने मंगलवार, 19 मई को यह जानकारी दी।

कैसे हुई बरामदगी

मणिपुर से आइजोल की ओर जा रही संदिग्ध सफेद कार को केइफांग जंक्शन के बाहरी इलाके में रोका गया। वाहन की गहन तलाशी के दौरान 20 बंडलों में छिपाकर रखी गई कुल 2.02 लाख मेथामफेटामाइन टैबलेट बरामद हुईं, जिनका कुल वजन 24.016 किलोग्राम है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनकी अनुमानित कीमत ₹19.21 करोड़ से अधिक आँकी गई है।

पुलिस के अनुसार, नशीली गोलियाँ वाहन के पिछले हिस्से में स्पेयर टायर के नीचे बने खाँचे और दोनों तरफ मडगार्ड के पीछे काले पॉलीथीन में छिपाकर रखी गई थीं — जो तस्करों की सुनियोजित रणनीति का संकेत है।

गिरफ्तार आरोपी कौन हैं

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान थ. ओन्खोथांग हाओकिप (33) और मैथ्यू (46) के रूप में हुई है। ओन्खोथांग हाओकिप मणिपुर के चंदेल जिले का और मैथ्यू चुराचांदपुर जिले का निवासी है। तस्करी में इस्तेमाल वाहन भी जब्त कर लिया गया है।

दोनों आरोपियों के विरुद्ध नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, 1985 के तहत मामला दर्ज कर आगे की जाँच शुरू कर दी गई है।

याबा: 'क्रेजी ड्रग' का खतरा

बरामद मेथामफेटामाइन टैबलेट को आमतौर पर 'याबा' या 'पार्टी टैबलेट' कहा जाता है, जिसे 'क्रेजी ड्रग' के नाम से भी जाना जाता है। इन गोलियों में मेथामफेटामाइन और कैफीन का मिश्रण होता है और भारत में इन पर पूर्ण प्रतिबंध है। यह नशा युवाओं में तेजी से फैल रहा है और स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे अत्यंत खतरनाक मानते हैं।

मिजोरम: तस्करी का बड़ा गलियारा

अधिकारियों के मुताबिक, म्यांमार और बांग्लादेश से लगी लंबी और बिना बाड़ वाली अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के कारण मिजोरम पूर्वोत्तर भारत में मादक पदार्थों की तस्करी का प्रमुख मार्ग बन गया है। ऐसी अवैध खेपें अक्सर चाम्फाई, सियाहा, लॉन्गतलाई, हनाहथियाल, सैतुअल और सेरछिप जिलों के रास्ते भेजी जाती हैं।

यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब पूर्वोत्तर में नशे के खिलाफ अभियान तेज किए जा रहे हैं। जाँच एजेंसियाँ अब इस खेप के स्रोत और आपूर्ति श्रृंखला की पड़ताल में जुटी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो दर्शाती है कि म्यांमार से आने वाला याबा नेटवर्क अब भी सक्रिय और सुसंगठित है। स्पेयर टायर और मडगार्ड जैसे परिष्कृत छिपाव के तरीके बताते हैं कि तस्करी अब शौकिया नहीं, बल्कि पेशेवर सिंडिकेट का काम है। सीमा पर बाड़ की अनुपस्थिति और भौगोलिक जटिलता इस समस्या की जड़ है, जिसे महज गिरफ्तारियों से नहीं सुलझाया जा सकता — आपूर्ति श्रृंखला तोड़ने के लिए अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय समन्वय अनिवार्य है।
RashtraPress
20 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मिजोरम में जब्त मेथ टैबलेट की कीमत और मात्रा कितनी थी?
मिजोरम पुलिस ने कुल 2.02 लाख मेथामफेटामाइन टैबलेट जब्त कीं, जिनका वजन 24.016 किलोग्राम और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित मूल्य ₹19.21 करोड़ से अधिक है। ये टैबलेट 20 बंडलों में छिपाकर रखी गई थीं।
गिरफ्तार तस्कर कौन हैं और कहाँ के रहने वाले हैं?
गिरफ्तार आरोपी थ. ओन्खोथांग हाओकिप (33) मणिपुर के चंदेल जिले के और मैथ्यू (46) चुराचांदपुर जिले के निवासी हैं। दोनों को केइफांग जंक्शन पर मौके से ही गिरफ्तार किया गया।
याबा या मेथामफेटामाइन टैबलेट क्या होती है?
याबा मेथामफेटामाइन और कैफीन के मिश्रण से बनी टैबलेट है, जिसे 'पार्टी टैबलेट' या 'क्रेजी ड्रग' भी कहते हैं। भारत में इस पर पूर्ण प्रतिबंध है और यह मुख्यतः म्यांमार से तस्करी के जरिए आती है।
मिजोरम ड्रग तस्करी का प्रमुख मार्ग क्यों बना हुआ है?
म्यांमार और बांग्लादेश से लगी लंबी और बिना बाड़ वाली अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के कारण मिजोरम पूर्वोत्तर भारत में नशा तस्करी का बड़ा गलियारा बन गया है। चाम्फाई, सियाहा, लॉन्गतलाई और सैतुअल जैसे जिले इस तस्करी मार्ग पर सबसे अधिक प्रभावित हैं।
इस मामले में कौन-सी धारा के तहत केस दर्ज हुआ है?
दोनों आरोपियों के खिलाफ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, 1985 के तहत मामला दर्ज किया गया है और आगे की जाँच जारी है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 महीने पहले
  2. 4 महीने पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले