2 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

रांची में मतदाता सूची सुधार पर अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस, विशेषज्ञों ने कहा — AI के साथ जमीनी सत्यापन अनिवार्य

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
रांची में मतदाता सूची सुधार पर अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस, विशेषज्ञों ने कहा — AI के साथ जमीनी सत्यापन अनिवार्य

सारांश

रांची में शुरू हुई दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में 7 देशों के अनुभव साझा हुए और 58 शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए। विशेषज्ञों का साफ संदेश — AI मददगार है, लेकिन मतदाता सूची की विश्वसनीयता के लिए मानवीय जमीनी सत्यापन की जगह कोई तकनीक नहीं ले सकती।

मुख्य बातें

रांची में 2 सितंबर 2026 को 'वोटर रजिस्ट्रेशन एंड वोटर रजिस्टर-2026' पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस शुरू हुई।
आयोजन NUSRL रांची में झारखंड मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय और केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड की संयुक्त मेजबानी में हो रहा है।
800 से अधिक संस्थानों से संपर्क के बाद 58 शोध-पत्र चर्चा और प्रकाशन के लिए चुने गए।
एस्टोनिया, ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, डेनमार्क, घाना और दक्षिण अफ्रीका की पंजीकरण प्रणालियों पर विचार-विमर्श हुआ।
विशेषज्ञों ने माना कि AI प्रक्रिया सरल बनाता है, पर अंतिम सत्यापन में मानवीय जाँच अनिवार्य है।
सम्मेलन के निष्कर्ष प्रिंट और डिजिटल माध्यमों में प्रकाशित किए जाएंगे।

रांची में 2 सितंबर 2026 को 'वोटर रजिस्ट्रेशन एंड वोटर रजिस्टर-2026' विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का आगाज़ हुआ, जिसमें विशेषज्ञों ने एकमत से कहा कि मतदाता सूची को प्रामाणिक बनाने के लिए आधुनिक तकनीक अकेली पर्याप्त नहीं — जमीनी स्तर पर मानवीय सत्यापन उतना ही जरूरी है। बढ़ते प्रवासन, तेज शहरीकरण और बदलती जनसंख्या के बीच हर पात्र नागरिक का नाम सूची में दर्ज करना और फर्जी व डुप्लीकेट नामों को बाहर रखना आज की सबसे बड़ी निर्वाचन चुनौती बन चुकी है।

कॉन्फ्रेंस का आयोजन और स्वरूप

यह कॉन्फ्रेंस झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय और केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड की संयुक्त मेजबानी में नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ (NUSRL), रांची में आयोजित हो रही है। भारत निर्वाचन आयोग के प्रधान सचिव अरविंद आनंद उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। आयोजन के लिए देशभर के 800 से अधिक विश्वविद्यालयों और संस्थानों से संपर्क किया गया था, जिनसे 230 शोध सार प्राप्त हुए। इनमें से 80 को शॉर्टलिस्ट किया गया और अंततः 58 शोध-पत्रों को चर्चा एवं प्रकाशन के लिए चुना गया।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी का वक्तव्य

झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने कहा कि इस सम्मेलन का उद्देश्य केवल विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, 'निर्वाचन व्यवस्था में काम करने वाले लोगों के व्यावहारिक अनुभव और अकादमिक शोध को एक मंच पर लाने से मतदाता सूची को कहीं अधिक भरोसेमंद बनाया जा सकता है।' पहले दिन छह तकनीकी सत्र और एक पैनल चर्चा आयोजित हुई, जिनमें एस्टोनिया, ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, डेनमार्क, घाना और दक्षिण अफ्रीका की मतदाता पंजीकरण प्रणालियों पर विस्तृत चर्चा हुई।

प्रवासी और वंचित मतदाता — केंद्रीय मुद्दा

तकनीकी सत्रों में एक अहम विषय प्रवासी मतदाताओं की समस्या रहा। रोजगार की तलाश में एक स्थान से दूसरे स्थान जाने वाले मजदूरों के लिए मतदाता सूची में नाम बनाए रखना और समय पर अपडेट कराना व्यावहारिक रूप से कठिन है। इसके अलावा, ग्रामीण और वंचित समुदायों, जनजातीय व सीमावर्ती क्षेत्रों के निवासियों तथा महिला मतदाताओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी विचार-विमर्श हुआ। सोशल मीडिया और बहुभाषी माध्यमों को मतदाता पंजीकरण अभियानों से जोड़ने के नवाचारी तरीके भी सामने आए।

AI और तकनीक पर विशेषज्ञों की राय

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑनलाइन पंजीकरण प्रणालियों के उपयोग पर विशेषज्ञों ने सहमति जताई कि तकनीक प्रक्रिया को सरल बना सकती है, लेकिन अंतिम निर्णय में मानवीय जाँच अनिवार्य रहेगी। NUSRL के कुलपति प्रो. (डॉ.) अशोक आर. पाटिल ने कहा कि मतदाता सूची लोकतांत्रिक भागीदारी की पहली और सबसे महत्वपूर्ण सीढ़ी है — एक तरफ हर पात्र व्यक्ति का नाम सूची में होना चाहिए, वहीं फर्जी, डुप्लीकेट और अपात्र नामों को रोकना भी उतना ही जरूरी है। केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड के कुलपति प्रो. सारंग मेधेकर ने कहा कि AI से निर्वाचन प्रशासन में कई काम आसान होंगे, लेकिन डेटा सुरक्षा और संबंधित चुनौतियों पर भी उतना ही ध्यान देना होगा।

आगे की राह

सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची के प्राचार्य डॉ. फादर रॉबर्ट प्रदीप कुजूर ने युवा मतदाताओं, प्रवासियों और वंचित वर्गों को निर्वाचन प्रक्रिया से जोड़ने की अनिवार्यता पर बल दिया और कहा कि कॉलेज व विश्वविद्यालय मतदाता जागरूकता अभियानों में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। सम्मेलन में सामने आए प्रमुख निष्कर्षों को प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों में प्रकाशित किया जाएगा, जो आगे के शोध और निर्वाचन प्रबंधन में दिशा-निर्देश का काम करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि शोध-पत्रों के निष्कर्ष जमीन पर कब और कैसे उतरेंगे। भारत में SIR जैसी प्रक्रियाएँ हर चुनाव से पहले विवाद का विषय बनती हैं — कभी नाम गायब होने की शिकायत, कभी फर्जी पंजीकरण के आरोप। सात देशों के अनुभव साझा करना उपयोगी है, लेकिन भारत की संघीय विविधता, भाषाई जटिलता और प्रवासन का पैमाना किसी भी 'एक फार्मूले' को सीधे लागू करने से रोकता है। जब तक निष्कर्षों को बाध्यकारी प्रशासनिक सुधारों से नहीं जोड़ा जाता, यह कॉन्फ्रेंस एक और अकादमिक अभ्यास बनकर रह जाने का जोखिम उठाती है।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रांची में 'वोटर रजिस्ट्रेशन एंड वोटर रजिस्टर-2026' कॉन्फ्रेंस क्या है?
यह 2 सितंबर 2026 को NUSRL रांची में शुरू हुई दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस है, जिसका आयोजन झारखंड मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय और केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड ने संयुक्त रूप से किया है। इसमें मतदाता पंजीकरण और मतदाता सूची को अधिक प्रामाणिक बनाने के तरीकों पर देश-विदेश के विशेषज्ञ विचार-विमर्श कर रहे हैं।
इस कॉन्फ्रेंस में कितने देशों और शोध-पत्रों की भागीदारी है?
कॉन्फ्रेंस में एस्टोनिया, ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, डेनमार्क, घाना और दक्षिण अफ्रीका सहित सात देशों की मतदाता पंजीकरण प्रणालियों पर चर्चा हुई। 800 से अधिक संस्थानों से प्राप्त 230 शोध सारों में से 58 शोध-पत्रों को चर्चा और प्रकाशन के लिए चुना गया।
मतदाता सूची में प्रवासी मतदाताओं की समस्या क्यों बड़ी चुनौती है?
रोजगार की तलाश में एक स्थान से दूसरे स्थान जाने वाले प्रवासी मजदूरों के लिए मतदाता सूची में नाम बनाए रखना और समय पर स्थानांतरण कराना व्यावहारिक रूप से बेहद कठिन है। इससे या तो उनका नाम पुराने पते पर बना रहता है या सूची से हट जाता है, जिससे वे मताधिकार से वंचित हो सकते हैं।
AI और तकनीक मतदाता सूची को कैसे बेहतर बना सकती है?
विशेषज्ञों के अनुसार AI और ऑनलाइन पंजीकरण प्रणालियाँ डुप्लीकेट नाम पहचानने, डेटाबेस अपडेट करने और जागरूकता फैलाने में सहायक हो सकती हैं। हालाँकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतिम सत्यापन में मानवीय जाँच अनिवार्य रहेगी और डेटा सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान देना होगा।
इस कॉन्फ्रेंस के निष्कर्ष आगे किस काम आएंगे?
सम्मेलन में सामने आए प्रमुख निष्कर्षों को प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों में प्रकाशित किया जाएगा। इससे मतदाता पंजीकरण पर भविष्य के शोध और निर्वाचन प्रबंधन में नीतिगत दिशा-निर्देश तैयार करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 23 घंटे पहले
  2. 4 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 1 साल पहले