झारखंड SIR: 2.11 करोड़ मतदाताओं की मैपिंग पूरी, चुनाव आयोग बोला — अभी दस्तावेज देने की जरूरत नहीं
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड में विशेष मतदाता पुनरीक्षण (SIR) अभियान तेज़ गति से आगे बढ़ रहा है। राज्य के कुल 2.64 करोड़ मतदाताओं में से 2.11 करोड़ यानी लगभग 80 प्रतिशत मतदाता अपने या अपने माता-पिता के नाम की मैपिंग पूरी कर चुके हैं। इस बीच दस्तावेज़ जमा करने को लेकर फैल रही भ्रांतियों पर चुनाव आयोग ने 14 जून 2026 को स्पष्ट किया कि मौजूदा गणना चरण में अधिकांश मतदाताओं को कोई दस्तावेज़ प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं है।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने रविवार को जानकारी देते हुए बताया कि गणना (इन्यूमरेशन) चरण के दौरान मतदाताओं से किसी प्रकार के दस्तावेज़ नहीं माँगे जाएंगे। मतदाताओं को केवल भरा हुआ और हस्ताक्षरित इन्यूमरेशन फॉर्म तथा एक हालिया रंगीन फोटो अपने बूथ लेवल अधिकारी (BLO) को सौंपनी होगी।
जिन मतदाताओं ने पूर्व की मतदाता सूची से अपने या अपने माता-पिता के नाम का मिलान पूरा कर लिया है, उनका नाम बिना किसी अतिरिक्त दस्तावेज़ के प्रारूप मतदाता सूची में स्वतः शामिल रहेगा। जहाँ त्रुटियाँ या विसंगतियाँ पाई जाएंगी, वहाँ संबंधित निर्वाचन अधिकारी और BLO उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर सुधार का प्रयास करेंगे।
दस्तावेज़ कब और किससे माँगे जाएंगे
रवि कुमार के अनुसार दस्तावेज़ केवल उन्हीं चुनिंदा मामलों में माँगे जाएंगे जहाँ सत्यापन के दौरान कोई आपत्ति या संदेह सामने आएगा। ऐसे मतदाताओं को 5 अगस्त 2026 से शुरू होने वाली नोटिस एवं सत्यापन अवधि के दौरान अलग से सूचित किया जाएगा।
गौरतलब है कि यह प्रक्रिया सरल और पारदर्शी बनाए रखने के उद्देश्य से ही प्रारंभिक चरण में दस्तावेज़ जमा करने की बाध्यता नहीं रखी गई है। BLO घर-घर जाकर पहले से तैयार फॉर्म वितरित करेंगे और भरे हुए फॉर्म एकत्र कर उन्हें डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज करेंगे।
नए मतदाताओं के लिए अलग व्यवस्था
जो नागरिक 1 अक्टूबर 2026 तक 18 वर्ष की आयु पूरी कर लेंगे और पहली बार मतदाता सूची में नाम दर्ज कराना चाहते हैं, उन्हें निर्धारित घोषणा-पत्र और आवश्यक दस्तावेज़ों के साथ फॉर्म-6 जमा करना अनिवार्य होगा। यह व्यवस्था मौजूदा मतदाताओं की मैपिंग प्रक्रिया से पूरी तरह अलग है।
अफवाहों से बचने की अपील
निर्वाचन विभाग, झारखंड ने आम नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे दस्तावेज़ जमा करने को लेकर सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर फैल रही अफवाहों पर ध्यान न दें। विभाग ने स्पष्ट किया है कि केवल आधिकारिक निर्देशों के आधार पर ही प्रक्रिया में भाग लिया जाए।
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में मतदाता सूची की सटीकता को लेकर बहस जारी है और कई राज्यों में SIR अभियान को लेकर भ्रम की स्थिति देखी गई है। झारखंड में 80 प्रतिशत मैपिंग पूरी होना प्रशासनिक दृष्टि से उल्लेखनीय प्रगति मानी जा रही है।