झारखंड में एसआईआर: 30 जून से बीएलओ करेंगे घर-घर सत्यापन, 5 अगस्त को जारी होगी ड्राफ्ट मतदाता सूची
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का अभियान 30 जून 2026 से आरंभ हो रहा है, जिसके तहत बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) प्रत्येक घर तक पहुँचकर मतदाताओं को इन्यूमरेशन फॉर्म सौंपेंगे और उनका सत्यापन करेंगे। झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने स्पष्ट किया है कि इस अभियान का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर पात्र भारतीय नागरिक का नाम मतदाता सूची में हो और कोई भी अपात्र व्यक्ति उसमें दर्ज न रहे।
अभियान की रूपरेखा और समयसीमा
निर्वाचन विभाग के अनुसार यह सत्यापन अभियान 29 जुलाई 2026 तक चलेगा। इस दौरान बीएलओ प्रत्येक मतदाता को आंशिक रूप से भरा हुआ फॉर्म दो प्रतियों में देंगे — एक प्रति भरकर बीएलओ को वापस करनी होगी, जबकि दूसरी प्रति रसीद के तौर पर मतदाता अपने पास सुरक्षित रखेगा। जिन मतदाताओं के फॉर्म समय पर जमा हो जाएंगे, उनके नाम 5 अगस्त 2026 को प्रकाशित होने वाली ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल किए जाएंगे।
दस्तावेज़ की अनिवार्यता: किसे क्या देना होगा
निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन मतदाताओं की पहले से मैपिंग हो चुकी है, उन्हें फॉर्म भरते समय कोई अतिरिक्त कागजात जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। हालाँकि, यदि किसी मतदाता का रिकॉर्ड विभाग की उपलब्ध जानकारी से मेल नहीं खाता, तो उसे बाद में नोटिस जारी कर आवश्यक दस्तावेज माँगे जाएंगे। दस्तावेज सत्यापित होने के बाद ही संबंधित व्यक्ति का नाम अंतिम मतदाता सूची में जोड़ा जाएगा।
अनमैप्ड मतदाताओं के लिए विशेष अपील
निर्वाचन विभाग ने उन मतदाताओं से भी अपील की है जिनकी अब तक मैपिंग नहीं हो सकी है। ऐसे नागरिक बीएलओ के घर आने पर अपना सही विवरण देकर इस प्रक्रिया को पूरा करा सकते हैं। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब राज्य में मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर विभिन्न स्तरों पर सवाल उठते रहे हैं।
अफवाहों से बचें, आधिकारिक स्रोत अपनाएँ
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने नागरिकों से आग्रह किया है कि एसआईआर से जुड़ी जानकारी केवल निर्वाचन विभाग के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से ही प्राप्त करें और किसी भी अफवाह या भ्रामक सूचना पर भरोसा न करें। विभाग ने पूरी प्रक्रिया से संबंधित वीडियो और मार्गदर्शिका भी आधिकारिक चैनलों पर उपलब्ध कराई है। इस अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि राज्य के सुदूर क्षेत्रों तक बीएलओ समयबद्ध तरीके से पहुँच पाते हैं या नहीं।