13 अगस्त 2026
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मेलमालयनूर अंगलम्मा मंदिर में आदि अमावसई पर उंजल उत्सव, लाखों श्रद्धालुओं ने किए देवी के दर्शन

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मेलमालयनूर अंगलम्मा मंदिर में आदि अमावसई पर उंजल उत्सव, लाखों श्रद्धालुओं ने किए देवी के दर्शन

सारांश

तमिलनाडु के विल्लुपुरम जिले के मेलमालयनूर अंगलम्मा मंदिर में आदि अमावसई पर उंजल उत्सव की भव्यता देखते ही बनी — लाखों श्रद्धालु, सोने के कवच में सजी देवी, और मध्यरात्रि तक गूँजते भक्ति गीत। यह उत्सव दक्षिण भारत की जीवंत धार्मिक परंपरा का प्रतीक है।

मुख्य बातें

मेलमालयनूर अंगलम्मा मंदिर में 13 अगस्त को आदि अमावसई पर उंजल उत्सव भव्यता से संपन्न हुआ।
तमिलनाडु के विभिन्न जिलों के अलावा कर्नाटक और आंध्र प्रदेश से लाखों श्रद्धालु उमड़े।
सुबह 4 बजे विशेष अभिषेक और महाआराधना; देवी को थंगा कवसम (सोने के कवच) से सजाया गया।
रात 11 बजे उंजल उत्सव आरंभ; आधी रात महा दीपाराधना के साथ समापन।
ग्रामीण विकास मंत्री एन.
आनंद ने उत्सव में भाग लेकर देवी के पालने को झुलाया।
आयोजन हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग व मंदिर ट्रस्टी कमेटी ने संयुक्त रूप से संपन्न कराया।

तमिलनाडु के विल्लुपुरम जिले में स्थित प्रसिद्ध मेलमालयनूर अंगलम्मा मंदिर में आदि अमावसई के पावन अवसर पर उंजल उत्सव (झूला उत्सव) अत्यंत भव्यता और श्रद्धा के साथ संपन्न हुआ। तमिलनाडु के विभिन्न जिलों के साथ-साथ कर्नाटक और आंध्र प्रदेश से आए लाखों श्रद्धालुओं ने देवी अंगलम्मा के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

भोर से शुरू हुई विशेष पूजा-अर्चना

13 अगस्त को आदि अमावसई के उपलक्ष्य में सुबह करीब 4 बजे मुख्य देवी अंगलम्मा के लिए विशेष अभिषेक और महाआराधना का आयोजन किया गया। इसके पश्चात देवी को थंगा कवसम (सोने के कवच) से सुसज्जित किया गया और विशेष दीपआराधना की गई। भक्त भोर से ही मंदिर परिसर में लंबी पंक्तियों में खड़े होकर देवी के दर्शन की प्रतीक्षा करते रहे।

उंजल उत्सव का भव्य आयोजन

उत्सव के मुख्य कार्यक्रम के रूप में रात करीब 11 बजे उत्सव मूर्ति देवी अंगलम्मा विशेष अलंकार धारण कर झूला मंडप में विराजमान हुईं। मंदिर के पुजारियों और हजारों श्रद्धालुओं ने भक्ति गीत और अम्मन लोरी गाते हुए देवी की आराधना की। आधी रात के करीब महा दीपाराधना का आयोजन हुआ, जिसके साथ उंजल उत्सव का भव्य समापन हुआ। दीपाराधना के दौरान श्रद्धालुओं ने 'देवी अंगलम्मा' के जयकारे लगाते हुए दर्शन लाभ उठाया।

दूर-दराज से उमड़े श्रद्धालु

आदि अमावस्या के धार्मिक महत्व के कारण पुडुचेरी, चेन्नई, तिरुवन्नामलाई, वेल्लोर, कुड्डालोर और कल्लाकुरिची सहित तमिलनाडु के अनेक जिलों से बड़ी संख्या में भक्त इस उत्सव में सम्मिलित हुए। यह उत्सव दक्षिण भारत के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में से एक माना जाता है, और प्रतिवर्ष इसमें श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती जा रही है।

मंत्री की उपस्थिति और प्रशासनिक व्यवस्था

राज्य के ग्रामीण विकास और जल संसाधन मंत्री एन. आनंद ने भी इस अवसर पर मंदिर में उपस्थित होकर उंजल उत्सव में भाग लिया। उन्होंने श्रद्धालुओं के बीच खड़े होकर देवी के पालने को झुलाया और प्रार्थना अर्पित की। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विभिन्न शहरों से विशेष बसें संचालित की गईं। उत्सव का समग्र प्रबंधन हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग तथा मंदिर ट्रस्टी कमेटी के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से किया।

आगे क्या

मेलमालयनूर अंगलम्मा मंदिर में इस प्रकार के धार्मिक उत्सव क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करते हैं और पर्यटन को भी बढ़ावा देते हैं। आने वाले वर्षों में प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए और बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध कराने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि दक्षिण भारत की अंतर-राज्यीय सांस्कृतिक एकता का जीवंत उदाहरण है — कर्नाटक और आंध्र प्रदेश से श्रद्धालुओं का आना इसे एक क्षेत्रीय पर्व का दर्जा देता है। यह उत्सव इस बात का भी प्रमाण है कि स्थानीय मंदिर परंपराएँ बड़े पैमाने पर जन-भागीदारी को आकर्षित करने में सक्षम हैं, बशर्ते प्रशासनिक सहयोग और बुनियादी सुविधाएँ पर्याप्त हों। मंत्री की उपस्थिति सरकारी स्तर पर धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहन देने के संकेत के रूप में देखी जा सकती है।
RashtraPress
13 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मेलमालयनूर अंगलम्मा मंदिर का उंजल उत्सव क्या है?
उंजल उत्सव एक पारंपरिक झूला उत्सव है, जिसमें देवी अंगलम्मा की उत्सव मूर्ति को विशेष अलंकार पहनाकर झूला मंडप में विराजित किया जाता है और भक्ति गीतों के साथ पूजा की जाती है। यह आदि अमावसई के अवसर पर विल्लुपुरम जिले के मेलमालयनूर मंदिर में प्रतिवर्ष आयोजित होता है।
इस वर्ष उंजल उत्सव में कितने श्रद्धालु शामिल हुए?
13 अगस्त 2026 को आयोजित इस उत्सव में तमिलनाडु के विभिन्न जिलों के साथ-साथ कर्नाटक और आंध्र प्रदेश से लाखों श्रद्धालु मेलमालयनूर पहुँचे। पुडुचेरी, चेन्नई, तिरुवन्नामलाई, वेल्लोर, कुड्डालोर और कल्लाकुरिची से विशेष रूप से बड़ी संख्या में भक्त उमड़े।
उत्सव के दौरान क्या-क्या धार्मिक अनुष्ठान हुए?
सुबह करीब 4 बजे विशेष अभिषेक और महाआराधना की गई, इसके बाद देवी को थंगा कवसम (सोने के कवच) से सजाया गया। रात करीब 11 बजे उंजल उत्सव आरंभ हुआ और आधी रात को महा दीपाराधना के साथ समापन हुआ।
उत्सव का प्रबंधन किसने किया?
उत्सव का आयोजन हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग तथा मंदिर ट्रस्टी कमेटी के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से किया। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विभिन्न शहरों से विशेष बसें भी चलाई गईं।
क्या किसी सरकारी प्रतिनिधि ने उत्सव में भाग लिया?
हाँ, तमिलनाडु के ग्रामीण विकास और जल संसाधन मंत्री एन. आनंद ने उत्सव में भाग लिया। उन्होंने श्रद्धालुओं के बीच खड़े होकर देवी के पालने को झुलाया और प्रार्थना अर्पित की।
राष्ट्र प्रेस
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