MCX पर सोना ₹1,46,927 और चांदी ₹2,28,283 पर फिसली, डॉलर इंडेक्स 100.795 के एक साल के उच्च स्तर पर
सारांश
मुख्य बातें
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर मंगलवार, 23 जून 2026 को सोने और चांदी की कीमतों में तीखी गिरावट दर्ज की गई। डॉलर इंडेक्स के 100.795 पर पहुँचने — जो बीते एक वर्ष का उच्चतम स्तर है — और अमेरिकी फेडरल रिज़र्व द्वारा ब्याज दर बढ़ाए जाने की आशंका ने कीमती धातुओं पर दबाव बनाए रखा। चांदी में गिरावट सोने से भी अधिक रही, जो 2.57 प्रतिशत तक टूटी।
सोने का हाल: खुलते ही दबाव
5 अगस्त 2026 के सोने के कॉन्ट्रैक्ट ने पिछली क्लोजिंग ₹1,48,188 के मुकाबले ₹1,412 (0.95 प्रतिशत) की कमजोरी के साथ ₹1,46,776 पर कारोबार शुरू किया। सुबह 9:43 बजे IST तक यह ₹1,191 (0.80 प्रतिशत) की गिरावट के साथ ₹1,46,927 पर था। दिन के कारोबार में सोने ने ₹1,46,528 का न्यूनतम और ₹1,47,090 का उच्चतम स्तर छुआ।
चांदी में और तेज़ गिरावट
3 जुलाई 2026 के चांदी के कॉन्ट्रैक्ट ने पिछली क्लोजिंग ₹2,34,310 के मुकाबले ₹6,634 (2.83 प्रतिशत) की तेज़ गिरावट के साथ ₹2,27,676 पर शुरुआत की। बाद में यह ₹6,027 (2.57 प्रतिशत) की गिरावट के साथ ₹2,28,283 पर कारोबार कर रही थी। दिन में चांदी ने ₹2,27,125 का न्यूनतम और ₹2,28,800 का उच्चतम स्तर दर्ज किया।
गिरावट की वजह: डॉलर और ब्याज दर की आशंका
बाज़ार जानकारों के अनुसार, सोने-चांदी में कमजोरी की मुख्य वजह डॉलर इंडेक्स का 100 के ऊपर टिके रहना है। 23 जून को यह 100.795 पर था, जो पिछले एक साल का उच्चतम स्तर है। डॉलर इंडेक्स, अमेरिकी डॉलर की दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं — यूरो, जापानी येन, पाउंड स्टर्लिंग, कैनेडियन डॉलर, स्वीडिश क्रोना और स्विस फ्रैंक — के मुकाबले स्थिति को मापता है। डॉलर के मज़बूत होने पर सोना आमतौर पर कमज़ोर पड़ता है, क्योंकि यह डॉलर में मूल्यांकित होता है।
इसके साथ ही, अमेरिकी फेडरल रिज़र्व द्वारा इस वर्ष महंगाई पर काबू पाने के लिए ब्याज दर बढ़ाए जाने की आशंका ने भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है। ऊँची ब्याज दरें सोने जैसी गैर-ब्याज-अर्जक परिसंपत्तियों की आकर्षण-क्षमता घटाती हैं।
आगे क्या देखें: रोज़गार आँकड़े अहम
जानकारों के मुताबिक, इस सप्ताह जारी होने वाले अमेरिकी रोज़गार और बेरोज़गारी के आँकड़े सोने की कीमतों को प्रभावित करने वाला अगला बड़ा कारक साबित हो सकते हैं। यदि रोज़गार के आँकड़े अपेक्षा से मज़बूत रहे, तो फेड के आक्रामक रुख की आशंका और बढ़ सकती है, जिससे कीमती धातुओं पर दबाव जारी रह सकता है।