सेंसेक्स 307 अंक टूटा, 76,957 पर बंद; मीडिया और मेटल शेयरों में भारी बिकवाली
सारांश
मुख्य बातें
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स सोमवार, 31 अगस्त को 307.24 अंक यानी 0.40 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,957.27 पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 95.25 अंक यानी 0.39 प्रतिशत फिसलकर 24,080.40 पर आ गया। अमेरिका-ईरान तनाव और फेडरल रिज़र्व की ब्याज दर बढ़ोतरी की आशंकाओं ने निवेशकों की धारणा को कमज़ोर किया।
मुख्य घटनाक्रम
सत्र में सबसे अधिक दबाव निफ्टी मीडिया (2.84 प्रतिशत नीचे) और निफ्टी मेटल (2.45 प्रतिशत नीचे) पर रहा — ये दोनों दिन के सबसे बड़े लूज़र सूचकांक रहे। इसके अलावा निफ्टी एफएमसीजी 1.69 प्रतिशत, निफ्टी कमोडिटीज 1.21 प्रतिशत, निफ्टी कंजप्शन 0.85 प्रतिशत, निफ्टी इन्फ्रा 0.68 प्रतिशत, निफ्टी रियल्टी 0.52 प्रतिशत और निफ्टी इंडिया डिफेंस 0.34 प्रतिशत की कमज़ोरी के साथ लाल निशान में रहे।
हरे निशान में रहे ये सेक्टर
गिरावट के बीच कुछ सेक्टरों ने राहत दी। निफ्टी प्राइवेट बैंक 0.97 प्रतिशत, निफ्टी हेल्थकेयर 0.85 प्रतिशत, निफ्टी फार्मा 0.72 प्रतिशत, निफ्टी ऑयल एंड गैस 0.33 प्रतिशत और निफ्टी पीएसई 0.16 प्रतिशत की बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुए। इन सेक्टरों में चुनिंदा खरीदारी ने बाज़ार को इंट्राडे के निचले स्तरों से उबरने में मदद की।
मिडकैप और स्मॉलकैप का हाल
निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांक 155.25 अंक यानी 0.24 प्रतिशत की बढ़त के साथ 64,224.75 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 सूचकांक 148.35 अंक यानी 0.74 प्रतिशत की गिरावट के साथ 19,931.65 पर आ गया। इस प्रकार व्यापक बाज़ार में मिला-जुला रुझान देखने को मिला।
सेंसेक्स के गेनर्स और लूज़र्स
सेंसेक्स पैक में सन फार्मा, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक, एसबीआई, बजाज फिनसर्व, टीसीएस, बीईएल, मारुति सुजुकी और इंडिगो बढ़त में रहे। वहीं आईटीसी, भारती एयरटेल, एचडीएफसी बैंक, इन्फोसिस, कोटक महिंद्रा बैंक, टाटा स्टील, एनटीपीसी, बजाज फाइनेंस और पावर ग्रिड नुकसान में रहे।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
बाज़ार विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। कूटनीतिक समाधान की उम्मीदें कम होने से कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक बॉन्ड यील्ड ऊँचे बने हुए हैं, जिसका सीधा असर कंपनियों की कमाई पर पड़ सकता है। इसके अलावा, जैक्सन होल में दिए गए भाषण के बाद फेडरल रिज़र्व चेयरमैन की टिप्पणियों से सितंबर में ब्याज दर वृद्धि की संभावना प्रबल हुई है, जिससे उभरते बाज़ारों में अस्थिरता बनी हुई है। गौरतलब है कि यह दबाव ऐसे समय में आया है जब भारतीय बाज़ार पहले से ही वैश्विक संकेतों के प्रति संवेदनशील बने हुए हैं।
आने वाले सत्रों में फेड के नीतिगत संकेत और कच्चे तेल की कीमतों की दिशा बाज़ार की चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।