31 अगस्त 2026
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पेपर लीक पर मुकेश खन्ना का तीखा सवाल: 'शिक्षा मंत्री-PM शामिल नहीं, तो निशाना उन पर क्यों?'

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पेपर लीक पर मुकेश खन्ना का तीखा सवाल: 'शिक्षा मंत्री-PM शामिल नहीं, तो निशाना उन पर क्यों?'

सारांश

मुकेश खन्ना ने पेपर लीक विवाद पर तीखा सवाल उठाया — जब शिक्षा मंत्री या PM सीधे शामिल नहीं, तो आंदोलन का निशाना उन्हें क्यों? उन्होंने 200 से ज्यादा घायल पुलिसकर्मियों का हवाला देते हुए कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में बाहरी ताकतों का दखल हुआ और मूल मुद्दा राजनीतिक रंग में खो गया।

मुख्य बातें

अभिनेता मुकेश खन्ना ने 31 अगस्त को पेपर लीक और छात्र प्रदर्शनों पर अपनी राय सार्वजनिक की।
उनका सवाल — जब शिक्षा मंत्री या प्रधानमंत्री पेपर लीक में सीधे शामिल नहीं, तो प्रदर्शन का निशाना उन्हें क्यों?
खन्ना ने कहा पेपर लीक 40 साल पुरानी समस्या है; दोषियों पर कार्रवाई जरूरी।
जंतर-मंतर और झारखंड प्रदर्शनों में 200 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए थे।
उन्होंने आरोप लगाया कि कथित तौर पर बाहरी ताकतों ने छात्रों को उकसाया और आंदोलन का राजनीतिकरण हुआ।

अभिनेता मुकेश खन्ना ने 31 अगस्त को एक विशेष बातचीत में पेपर लीक और छात्र प्रदर्शनों पर अपनी बेबाक राय रखी। उन्होंने जंतर-मंतर और झारखंड में हुए छात्र आंदोलनों का हवाला देते हुए कहा कि छात्रों की मूल चिंता जायज है, लेकिन प्रदर्शन का रुख बाद में भटक गया। उनके अनुसार, जब पेपर लीक में शिक्षा मंत्री या प्रधानमंत्री सीधे तौर पर शामिल नहीं हैं, तो आंदोलन का निशाना उन्हें बनाना तर्कसंगत नहीं।

छात्रों की चिंता जायज, लेकिन निशाना गलत

मुकेश खन्ना ने कहा, 'आज की पीढ़ी, जिसे जेन जी कहा जाता है, शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की मांग कर रही है — लेकिन इस मांग की वजह पढ़ाई के तरीके या शिक्षा का कंटेंट नहीं, बल्कि लगातार सामने आने वाले पेपर लीक के मामले हैं। छात्रों का असली सवाल यह है कि अगर वे मेहनत करके परीक्षा की तैयारी करते हैं और पेपर ही लीक हो जाता है, तो उनके भविष्य का क्या होगा। यह छात्रों की जायज चिंता है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि पेपर लीक कराने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन इसके लिए शिक्षा मंत्री या प्रधानमंत्री को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं।

40 साल पुरानी समस्या, आज भी जारी

खन्ना ने अपने कॉलेज के दिनों का जिक्र करते हुए कहा, 'पेपर लीक कोई आज की समस्या नहीं है। करीब 40 साल पहले जब मैं कॉलेज में था, तब भी पेपर लीक होने की घटनाएं सामने आती थीं। समय बदल गया है लेकिन यह समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई। इसलिए मेरा भी मानना है कि पेपर लीक कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। इसमें न तो शिक्षा मंत्री शामिल हैं और न ही प्रधानमंत्री, तो सवाल यह है कि छात्रों का गुस्सा उन तक क्यों पहुंचा।' यह ऐसे समय में आया है जब देश में NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के आरोप राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बने हुए हैं।

प्रदर्शन में बाहरी ताकतों का दखल

मुकेश खन्ना ने प्रदर्शन को पूरी तरह शांतिपूर्ण बताए जाने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा, 'अगर प्रदर्शन की तस्वीरों और वीडियो को देखा जाए तो कुछ जगहों पर छात्रों और प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ झड़प नजर आती है। इस दौरान 200 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए थे। शुरुआत में मुझे लगा था कि कुछ छात्रों ने गुस्से में आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया, लेकिन बाद में एहसास हुआ कि शायद कुछ बच्चों को बाहरी ताकतों द्वारा ऐसा करने के लिए उकसाया गया था।' उनके अनुसार, यह आरोप कथित तौर पर उन तत्वों पर है जिन्होंने छात्रों के आंदोलन को अपने एजेंडे के लिए इस्तेमाल किया।

राजनीतिक रंग ने मूल मुद्दे को ढका

खन्ना ने कहा, 'इस पूरे प्रदर्शन का मूल मुद्दा पेपर लीक था, लेकिन धीरे-धीरे इसका राजनीतिक रंग बदल गया। सवाल यह होना चाहिए था कि पेपर लीक क्यों हो रहे हैं और इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई कैसे हो — लेकिन प्रदर्शन का एक हिस्सा इस तरफ मुड़ गया कि PM मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के रहते देश में कुछ नहीं हो सकता।' गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी जन आंदोलन के राजनीतिकरण पर सवाल उठाए गए हों। आलोचकों का कहना है कि इस तरह की बहस असली दोषियों — यानी पेपर लीक करने वाले गिरोहों — से ध्यान हटा देती है। आगे देखना होगा कि सरकार परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए क्या ठोस कदम उठाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या नीतिगत विफलता के लिए सरकार भी जिम्मेदार है? पेपर लीक माफिया दशकों से सक्रिय है और उसे रोकने में व्यवस्थागत चूक हुई है — यह सवाल किसी एक मंत्री या PM की व्यक्तिगत संलिप्तता से बड़ा है। 'बाहरी ताकतों' का आरोप कथित तौर पर बार-बार उठाया जाता है, लेकिन इसे साबित करने की जिम्मेदारी आरोप लगाने वाले पर है। असली मुद्दा यह है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए ठोस तंत्र कब बनेगा।
RashtraPress
31 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुकेश खन्ना ने पेपर लीक पर क्या कहा?
मुकेश खन्ना ने कहा कि पेपर लीक के खिलाफ छात्रों की नाराजगी जायज है, लेकिन जब शिक्षा मंत्री या प्रधानमंत्री इसमें सीधे शामिल नहीं हैं, तो प्रदर्शन का निशाना उन्हें बनाना तर्कसंगत नहीं। उन्होंने दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।
मुकेश खन्ना के अनुसार छात्र प्रदर्शन में क्या गड़बड़ी हुई?
उनके अनुसार, शुरुआत में शांतिपूर्ण रहे प्रदर्शन में बाद में बाहरी ताकतों का दखल हुआ, जिसने इसे राजनीतिक रंग दे दिया। उन्होंने कहा कि 200 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए और कुछ छात्रों को कथित तौर पर उकसाया गया।
क्या पेपर लीक की समस्या नई है?
मुकेश खन्ना के अनुसार नहीं — उन्होंने कहा कि करीब 40 साल पहले भी जब वे कॉलेज में थे, पेपर लीक की घटनाएं होती थीं। समस्या पुरानी है और अभी तक पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
जंतर-मंतर और झारखंड के प्रदर्शनों का मूल कारण क्या था?
इन प्रदर्शनों का मूल कारण पेपर लीक था, जिससे मेहनती छात्रों का भविष्य प्रभावित होता है। मुकेश खन्ना ने कहा कि यह छात्रों की जायज चिंता थी, लेकिन बाद में प्रदर्शन का एजेंडा बदल गया।
पेपर लीक रोकने के लिए क्या होना चाहिए?
मुकेश खन्ना ने कहा कि पेपर लीक कराने वाले सीधे दोषियों की पहचान कर उन पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। आलोचकों का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और स्वतंत्र जाँच तंत्र की जरूरत है।
राष्ट्र प्रेस
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