उज्बेकिस्तान में UPI लॉन्च: भारतीय यात्री UZQR स्कैन कर कर सकेंगे तत्काल भुगतान
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय भुगतान निगम (NPCI) की अंतरराष्ट्रीय शाखा NPCI International (NPCIL) ने 30 अगस्त 2026 को उज्बेकिस्तान की राष्ट्रीय भुगतान प्रणाली HUMO के संचालक नेशनल इंटरबैंक प्रोसेसिंग सेंटर JSC (NIPC) के साथ एक वाणिज्यिक समझौता किया, जिससे अब उज्बेकिस्तान में UPI के ज़रिए सीमा-पार मर्चेंट भुगतान संभव हो गया है। यह घोषणा वित्त मंत्रालय ने 31 अगस्त को की। इस साझेदारी के तहत भारतीय यात्री अपने UPI ऐप से उज्बेकिस्तान के राष्ट्रीय इंटरऑपरेबल क्यूआर कोड UZQR को स्कैन कर तुरंत भुगतान कर सकेंगे।
समझौते का ब्यौरा
यह वाणिज्यिक करार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उज्बेकिस्तान की द्विपक्षीय यात्रा के दौरान हुआ। समझौते को भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और उज्बेकिस्तान के केंद्रीय बैंक (CBU) सहित दोनों देशों के वित्तीय नियामकों की औपचारिक मंजूरी मिल चुकी है। CBU ने सीमा-पार मर्चेंट भुगतान स्वीकार करने के लिए HUMO को NPCIL का अधिकृत साझेदार घोषित किया है।
गौरतलब है कि CBU के अनिवार्य यूनिफाइड नेशनल QR ढाँचे के साथ एकीकरण के बाद UPI उपयोगकर्ताओं को उज्बेकिस्तान के रिटेल, हॉस्पिटैलिटी और सेवा क्षेत्र के लगभग सभी मर्चेंट्स पर भुगतान की सुविधा मिलेगी।
आम भारतीयों पर असर
भारतीय पर्यटक, कारोबारी यात्री और छात्र अब अपने भारतीय बैंक खातों से सीधे व्यक्ति-से-मर्चेंट (P2M) भुगतान कर सकेंगे। इससे विदेशी मुद्रा रूपांतरण पर लगने वाले अतिरिक्त शुल्क की समस्या कम होगी और अंतरराष्ट्रीय कार्ड या नकदी पर निर्भरता भी घटेगी। यह उन भारतीयों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जो उज्बेकिस्तान में शिक्षा या व्यापार के लिए लंबे समय तक रहते हैं।
UPI का बढ़ता वैश्विक विस्तार
यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी डिजिटल भुगतान प्रणाली का तेज़ी से अंतरराष्ट्रीय विस्तार कर रहा है। पिछले महीने ही मालदीव की तत्काल भुगतान प्रणाली 'फवारा' और UPI के बीच एकीकरण की सफल शुरुआत की घोषणा हुई थी। उज्बेकिस्तान के जुड़ने के साथ अब सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात, फ्रांस, मॉरीशस, नेपाल, भूटान, कतर, श्रीलंका, कंबोडिया और ग्रीस सहित कुल 10 से अधिक देशों में UPI की पहुँच हो गई है।
यह पहल डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे के क्षेत्र में भारत और उज्बेकिस्तान के व्यापक रणनीतिक एवं आर्थिक सहयोग को और मज़बूत करती है।
आगे की राह
समझौते के क्रियान्वयन की प्रक्रिया नियामकीय मंजूरियों के बाद शुरू हो चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य एशिया में UPI की यह उपस्थिति भारत के 'डिजिटल डिप्लोमेसी' एजेंडे को नई दिशा देती है और आने वाले समय में अन्य मध्य एशियाई देशों के साथ भी ऐसे समझौतों की संभावना बढ़ाती है।