झीरम घाटी जांच पर भूपेश बघेल का बड़ा आरोप: 'NIA ने षड्यंत्रकारियों पर कोई पक्ष नहीं रखा, BJP दबा रही है मामला'
सारांश
मुख्य बातें
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 31 अगस्त 2026 को रायपुर में पत्रकारों से बातचीत में आरोप लगाया कि झीरम घाटी हमले की जांच न तो निष्पक्ष हुई और न ही पूरी — और अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस पूरे मामले को सुनियोजित तरीके से दबाने की कोशिश कर रही है। उनके इन बयानों ने एक बार फिर इस संवेदनशील मामले को राजनीतिक केंद्र में ला दिया है।
NIA की जांच पर सवाल
बघेल ने कहा कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने झीरम घाटी मामले की जांच ठीक से नहीं की। उनके अनुसार, गरबा थाने में दर्ज एफआईआर में जिन लोगों के नाम थे, उनसे कोई पूछताछ नहीं हुई। उन्होंने कहा कि 'अगर ढंग से पूछताछ की गई होती, तो आज इस तरह की स्थिति ही पैदा नहीं होती।' बघेल ने यह भी आरोप लगाया कि NIA ने जांच के दौरान षड्यंत्रकारियों के संदर्भ में किसी भी प्रकार का पक्ष नहीं रखा, जो उनके अनुसार 'दुर्भाग्यपूर्ण' है।
अमित शाह से मांगी थी जांच की जिम्मेदारी
पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि जब वे मुख्यमंत्री पद पर थे, तब मध्य क्षेत्र की एक बैठक हुई थी, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कर रहे थे। उस बैठक में बघेल ने यह मुद्दा उठाया और कहा था कि यदि NIA जांच नहीं कर पा रही तो राज्य सरकार को यह जिम्मेदारी दी जाए। उन्होंने कहा, 'हम इसकी जांच में किसी भी प्रकार की कोताही नहीं होने देंगे।' बघेल के अनुसार, तब उन्हें साफ इनकार कर दिया गया और कहा गया कि 'आप भूल जाइए।'
हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक की कानूनी लड़ाई
बघेल ने बताया कि जब वे छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट गए तो फैसला NIA के पक्ष में आया। इसके बाद उनकी सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया, तो NIA हाईकोर्ट पहुंच गई। तत्पश्चात राज्य सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर की और वहाँ राज्य सरकार के पक्ष में फैसला आया — लेकिन तब तक कांग्रेस सरकार सत्ता से जा चुकी थी। बघेल का आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद भी वर्तमान BJP सरकार ने न SIT का गठन किया और न ही जांच आगे बढ़ाई।
BJP पर सुनियोजित दबाव का आरोप
बघेल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि 'BJP इस पूरे मामले को सुनियोजित तरीके से दबाने की कोशिश कर रही है।' उन्होंने यह भी कहा कि जब जांच ही ढंग से नहीं हुई, तो अदालत का फैसला भी उसी के अनुरूप आएगा। गौरतलब है कि झीरम घाटी नक्सली हमला 25 मई 2013 को हुआ था, जिसमें कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता मारे गए थे — यह छत्तीसगढ़ के इतिहास का सबसे बड़ा नक्सली हमला था।
आगे क्या
झीरम घाटी मामला अब भी न्यायिक प्रक्रिया में है। बघेल के इन बयानों के बाद यह देखना होगा कि वर्तमान छत्तीसगढ़ सरकार और NIA की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है या नहीं। विपक्ष के इन आरोपों के बीच मामले की जांच की दिशा और गति पर सभी की नज़रें टिकी हैं।