31 अगस्त 2026
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झीरम घाटी जांच पर भूपेश बघेल का बड़ा आरोप: 'NIA ने षड्यंत्रकारियों पर कोई पक्ष नहीं रखा, BJP दबा रही है मामला'

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झीरम घाटी जांच पर भूपेश बघेल का बड़ा आरोप: 'NIA ने षड्यंत्रकारियों पर कोई पक्ष नहीं रखा, BJP दबा रही है मामला'

सारांश

भूपेश बघेल ने झीरम घाटी मामले में NIA की जांच को अधूरा और पक्षपातपूर्ण बताया। उनका आरोप है कि गरबा थाने की FIR में नामजद लोगों से पूछताछ तक नहीं हुई और BJP सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद भी SIT गठन से बच रही है — यानी मामला जानबूझकर दबाया जा रहा है।

मुख्य बातें

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 31 अगस्त 2026 को रायपुर में NIA की झीरम घाटी जांच को अपर्याप्त बताया।
गरबा थाने की FIR में नामजद लोगों से पूछताछ न होने का आरोप; NIA ने षड्यंत्रकारियों पर कोई पक्ष नहीं रखा।
बघेल ने बताया कि गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता वाली बैठक में राज्य को जांच की जिम्मेदारी देने से साफ इनकार किया गया।
सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया, लेकिन वर्तमान BJP सरकार ने अब तक SIT का गठन नहीं किया।
बघेल का आरोप — BJP इस मामले को 'सुनियोजित तरीके से दबाने की कोशिश' कर रही है।

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 31 अगस्त 2026 को रायपुर में पत्रकारों से बातचीत में आरोप लगाया कि झीरम घाटी हमले की जांच न तो निष्पक्ष हुई और न ही पूरी — और अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस पूरे मामले को सुनियोजित तरीके से दबाने की कोशिश कर रही है। उनके इन बयानों ने एक बार फिर इस संवेदनशील मामले को राजनीतिक केंद्र में ला दिया है।

NIA की जांच पर सवाल

बघेल ने कहा कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने झीरम घाटी मामले की जांच ठीक से नहीं की। उनके अनुसार, गरबा थाने में दर्ज एफआईआर में जिन लोगों के नाम थे, उनसे कोई पूछताछ नहीं हुई। उन्होंने कहा कि 'अगर ढंग से पूछताछ की गई होती, तो आज इस तरह की स्थिति ही पैदा नहीं होती।' बघेल ने यह भी आरोप लगाया कि NIA ने जांच के दौरान षड्यंत्रकारियों के संदर्भ में किसी भी प्रकार का पक्ष नहीं रखा, जो उनके अनुसार 'दुर्भाग्यपूर्ण' है।

अमित शाह से मांगी थी जांच की जिम्मेदारी

पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि जब वे मुख्यमंत्री पद पर थे, तब मध्य क्षेत्र की एक बैठक हुई थी, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कर रहे थे। उस बैठक में बघेल ने यह मुद्दा उठाया और कहा था कि यदि NIA जांच नहीं कर पा रही तो राज्य सरकार को यह जिम्मेदारी दी जाए। उन्होंने कहा, 'हम इसकी जांच में किसी भी प्रकार की कोताही नहीं होने देंगे।' बघेल के अनुसार, तब उन्हें साफ इनकार कर दिया गया और कहा गया कि 'आप भूल जाइए।'

हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक की कानूनी लड़ाई

बघेल ने बताया कि जब वे छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट गए तो फैसला NIA के पक्ष में आया। इसके बाद उनकी सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया, तो NIA हाईकोर्ट पहुंच गई। तत्पश्चात राज्य सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर की और वहाँ राज्य सरकार के पक्ष में फैसला आया — लेकिन तब तक कांग्रेस सरकार सत्ता से जा चुकी थी। बघेल का आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद भी वर्तमान BJP सरकार ने न SIT का गठन किया और न ही जांच आगे बढ़ाई।

BJP पर सुनियोजित दबाव का आरोप

बघेल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि 'BJP इस पूरे मामले को सुनियोजित तरीके से दबाने की कोशिश कर रही है।' उन्होंने यह भी कहा कि जब जांच ही ढंग से नहीं हुई, तो अदालत का फैसला भी उसी के अनुरूप आएगा। गौरतलब है कि झीरम घाटी नक्सली हमला 25 मई 2013 को हुआ था, जिसमें कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता मारे गए थे — यह छत्तीसगढ़ के इतिहास का सबसे बड़ा नक्सली हमला था।

आगे क्या

झीरम घाटी मामला अब भी न्यायिक प्रक्रिया में है। बघेल के इन बयानों के बाद यह देखना होगा कि वर्तमान छत्तीसगढ़ सरकार और NIA की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है या नहीं। विपक्ष के इन आरोपों के बीच मामले की जांच की दिशा और गति पर सभी की नज़रें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद SIT न बनाना एक ठोस तथ्य है जिसका जवाब सरकार को देना होगा। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस मामले को केवल कांग्रेस-BJP की बयानबाज़ी तक सीमित कर देती है, जबकि असली सवाल यह है कि NIA की क्लोज़र रिपोर्ट में षड्यंत्र का कोण क्यों अनुपस्थित रहा। पीड़ित परिवारों के लिए न्याय की प्रतीक्षा हर राजनीतिक बयान के साथ और लंबी होती जा रही है।
RashtraPress
31 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झीरम घाटी हमला क्या था और यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
झीरम घाटी नक्सली हमला 25 मई 2013 को छत्तीसगढ़ में हुआ था, जिसमें कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता मारे गए थे। यह छत्तीसगढ़ के इतिहास का सबसे बड़ा नक्सली हमला माना जाता है और तब से इसकी जांच विवादों में रही है।
भूपेश बघेल ने NIA पर क्या आरोप लगाए हैं?
बघेल ने आरोप लगाया कि NIA ने गरबा थाने की FIR में नामजद लोगों से पूछताछ नहीं की और षड्यंत्रकारियों के संदर्भ में कोई पक्ष नहीं रखा। उनके अनुसार अधूरी जांच के कारण ही अदालती फैसले भी प्रभावित हो रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट का झीरम घाटी SIT मामले में क्या फैसला आया था?
बघेल के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया था, जिससे SIT गठन का रास्ता खुल गया था। लेकिन तब तक कांग्रेस सरकार जा चुकी थी और वर्तमान BJP सरकार ने SIT का गठन नहीं किया।
BJP पर बघेल का 'मामला दबाने' का आरोप किस आधार पर है?
बघेल का तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट के अनुकूल फैसले के बावजूद BJP सरकार ने न SIT बनाई और न जांच आगे बढ़ाई। इसके अलावा, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में राज्य को जांच की जिम्मेदारी देने से भी इनकार किया गया था।
क्या झीरम घाटी मामले में अभी भी कानूनी प्रक्रिया जारी है?
हाँ, मामला अभी भी न्यायिक प्रक्रिया में है। बघेल के ताज़ा बयानों के बाद यह देखना होगा कि NIA और छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है या नहीं।
राष्ट्र प्रेस
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