ओपी राजभर का विपक्ष पर प्रहार: 'झारखंड-पंजाब क्यों नहीं जाते, जंतर-मंतर पर सिर्फ राजनीति'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने 12 अगस्त को अंबेडकर नगर में विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने झारखंड छात्र आंदोलन, संसद में हंगामे और पेपर लीक विवाद को लेकर विपक्ष पर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाया। राजभर ने कहा कि विपक्ष छात्रों की समस्याओं का समाधान नहीं, बल्कि एनडीए सरकार को बदनाम करना चाहता है।
झारखंड और पंजाब पर विपक्ष का दोहरा रवैया
राजभर ने स्पष्ट किया कि झारखंड में इस समय कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की गठबंधन सरकार है, भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नहीं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि विपक्ष वास्तव में छात्रों के साथ है, तो कांग्रेस नेता राहुल गांधी झारखंड क्यों नहीं जाते और वहाँ के विद्यार्थियों की माँगों का समर्थन क्यों नहीं करते।
उन्होंने पंजाब में सामने आए पेपर लीक के मामलों का भी उल्लेख किया और विपक्षी नेताओं से वहाँ जाकर छात्रों के साथ खड़े होने की चुनौती दी। राजभर के अनुसार, विपक्ष का रुख अलग-अलग राज्यों में एक समान नहीं है — जहाँ उनकी सरकारें हैं, वहाँ वे चुप रहते हैं।
जंतर-मंतर प्रदर्शन पर आरोप
मंत्री ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन का ज़िक्र करते हुए कहा कि कई विपक्षी नेता वहाँ पहुँचे थे। उनके पहुँचने के बाद कथित तौर पर कुछ उपद्रवी तत्व भी प्रदर्शन स्थल पर आ गए और स्थिति बिगड़ गई। राजभर ने कहा, 'छात्र सामान्यतः पत्थरबाज़ी, वाहनों में तोड़फोड़ या पुलिस के साथ मारपीट नहीं करते, लेकिन प्रदर्शन के दौरान ऐसी घटनाएँ हुईं।'
उन्होंने आरोप लगाया कि जब पुलिस ने कार्रवाई शुरू की, तो मौजूद कई राजनीतिक नेता वहाँ से निकल गए। उन्होंने सवाल किया कि यदि विपक्षी नेता सच में छात्रों के साथ हैं, तो उन्हें आंदोलन के दौरान छात्रों के बीच डटे रहना चाहिए था।
संसद में चर्चा से बचने का आरोप
राजभर ने समाजवादी पार्टी (सपा) सहित अन्य विपक्षी दलों पर संसद में हंगामे को लेकर भी निशाना साधा। उनका कहना था कि यदि सदन में पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं पर विस्तार से बहस हुई, तो पिछली सरकारों के कार्यकाल में हुए कथित मामलों पर भी सवाल उठेंगे।
उन्होंने उत्तर प्रदेश में सपा की पिछली सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उस दौर में परीक्षाओं में नकल और पेपर लीक की शिकायतें आती थीं, कुछ स्थानों पर पैसे के बल पर नकल कराई जाती थी और नौकरियों में भी अनियमितताओं के आरोप लगते थे। राजभर ने यह भी कहा कि उस सरकार के समय कानून-व्यवस्था को लेकर दंगे और कर्फ्यू जैसी स्थितियाँ बनी थीं।
विपक्ष की मंशा पर सवाल
मंत्री ने अपनी बात को स्पष्ट करते हुए कहा कि विपक्ष का असली उद्देश्य छात्रों की समस्याओं का समाधान कराना नहीं, बल्कि एनडीए सरकार को घेरना है। उन्होंने कहा कि इसीलिए विपक्ष संसद में खुली चर्चा से बचने की कोशिश कर रहा है — क्योंकि विस्तृत बहस में उनके अपने कार्यकाल के सवाल भी सामने आ जाएँगे।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब देशभर में छात्र संगठन पेपर लीक और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर आंदोलनरत हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक तकरार और तेज़ होने की संभावना है।