ममता बनर्जी विरोधियों से मिला रही हाथ — BJP सांसद राहुल सिन्हा का तीखा हमला
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद राहुल सिन्हा ने 26 सितंबर 2026 को कोलकाता में मीडिया से बातचीत के दौरान पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला। सिन्हा ने कहा कि ममता बनर्जी आज उन्हीं राजनीतिक दलों से संपर्क साध रही हैं, जिनकी वे कभी कट्टर आलोचक रही हैं।
मुख्य घटनाक्रम
BJP सांसद का यह बयान उस समय आया है जब दावा किया जा रहा है कि ममता बनर्जी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) — CPI(M) के महासचिव एम.ए. बेबी के बीच SIR के मुद्दे पर फोन पर बातचीत हुई। यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नई हलचल की ओर इशारा करता है।
राहुल सिन्हा ने कहा, 'ममता बनर्जी का अब कोई वजूद नहीं बचा है। इसीलिए उन्हें उन लोगों की शरण में जाना पड़ रहा है, जिनकी कभी वे आलोचना करती रही हैं।' उन्होंने आगे कहा कि ममता कांग्रेस के पास भी जाएंगी और CPI(M) के पास भी — जो दल कभी उनके सीधे राजनीतिक विरोधी रहे हैं।
सिन्हा की आलोचना का केंद्र
BJP सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि ममता बनर्जी अपने निजी राजनीतिक हितों के लिए अलग-अलग दलों से संपर्क कर रही हैं और उनकी राजनीति में कोई स्थायी सिद्धांत या विचारधारा नहीं है। आलोचकों का कहना है कि बदलते राजनीतिक गठजोड़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) की बदलती प्राथमिकताओं को दर्शाते हैं।
गौरतलब है कि ममता बनर्जी ने 1998 में वाम मोर्चे और कांग्रेस दोनों से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की थी। उनका पूरा राजनीतिक करियर इन्हीं दलों से मुखालफत पर टिका रहा है। ऐसे में CPI(M) महासचिव से कथित संपर्क को BJP ने वैचारिक पलटी का नाम दिया है।
बंगाल निकाय चुनाव पर BJP की तैयारी
राहुल सिन्हा ने बंगाल निकाय चुनावों को लेकर कहा कि BJP इन चुनावों के लिए पूरी तरह तैयार है और पार्टी इनमें अच्छा प्रदर्शन करेगी। उन्होंने पार्टी की तैयारियों पर भरोसा जताया, हालांकि कोई विशेष आंकड़ा नहीं दिया।
RSS के विस्तार पर सिन्हा का बयान
मीडिया से बातचीत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के बारे में पूछे जाने पर सिन्हा ने कहा कि किसी सरकार के सत्ता में आने या जाने से संघ के विस्तार पर कोई सीधा असर नहीं पड़ता। उन्होंने कहा, 'संघ दुनिया का सबसे बड़ा राष्ट्रवादी संगठन तब भी था, जब हम सरकार में नहीं थे।'
पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि BJP के सत्ता में आने से पहले भी राज्य में संघ का विस्तार बड़े स्तर पर हुआ था। उनके अनुसार, पहले राष्ट्रवादी गतिविधियों में कुछ रुकावटों का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब परिस्थितियाँ अलग हैं।
आगे क्या
पश्चिम बंगाल में निकाय चुनावों से पहले विपक्षी दलों के बीच की कथित नज़दीकी और BJP की आक्रामक रणनीति, दोनों मिलकर राज्य की राजनीति को नया आयाम दे सकती हैं। TMC, CPI(M) और कांग्रेस के बीच संभावित समीकरणों पर सभी दलों की नज़र टिकी है।