ओपी राजभर का अखिलेश पर तीखा तंज: झारखंड छात्र आंदोलन पर 'कथित क्रांति' को बताया दिल्ली तक सीमित
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने 12 अगस्त 2026 को समाजवादी पार्टी (SP) के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला। राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखे अपने पोस्ट में यादव की 'कथित क्रांति' को झारखंड के चल रहे छात्र आंदोलन से जोड़ते हुए सवाल किया कि क्या यह क्रांति महज दिल्ली तक सीमित थी।
एक्स पर राजभर का सीधा सवाल
राजभर ने एक्स पर लिखा, 'मित्र अखिलेश, उम्मीद है आप ठीक-ठाक होंगे। अपनी मस्ती में चूर। इस मस्ती के दौर में आप झारखंड जा रहे हैं या नहीं? आपकी कथित क्रांति क्या दिल्ली तक ही सीमित थी? देश पूछ रहा है, बस हाँ या ना में जवाब दे दीजिए।' इससे पहले एक अन्य पोस्ट में उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में लिखा कि लखनऊ से डेढ़ घंटे और नई दिल्ली से दो घंटे में झारखंड पहुँचा जा सकता है, और यादव 'चार्टर से चलने वाले इंसान' हैं — इसलिए जाने में कोई बाधा नहीं।
पीडीए और विपक्षी खामोशी पर निशाना
राजभर ने अखिलेश यादव के 'पीडीए' (पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक) नारे को लेकर भी तीखी टिप्पणी की। उनका कहना था कि झारखंड में जो छात्र लाठियाँ खा रहे हैं, वे उसी पीडीए समाज से आते हैं जिसके नाम पर कथित तौर पर दो वर्षों से राजनीति की जा रही है। उन्होंने विपक्ष पर 'जगह देखकर' समर्थन तय करने का आरोप लगाया।
राजभर ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधा और कहा कि यदि झारखंड में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार होती, तो सांसद छात्रों के बीच जाकर रीलें बनवाते नज़र आते। उन्होंने कहा, 'चुप रहिए। जनता न्याय करेगी।'
झारखंड छात्र आंदोलन की पृष्ठभूमि
झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरुद्ध छात्रों का आंदोलन लगातार तेज हो रहा है। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की माँग को लेकर यह विरोध प्रदर्शन जारी है।
10 अगस्त को बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी विधानसभा घेराव के लिए आगे बढ़े, जिस दौरान पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच टकराव हुआ और पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछार का इस्तेमाल किया। झारखंड सरकार का दावा है कि छात्रों की लगभग 98 प्रतिशत माँगें स्वीकार कर ली गई हैं, लेकिन सीबीआई जाँच सहित कुछ प्रमुख माँगों पर अब भी सहमति नहीं बन पाई है।
राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में विपक्ष और सत्तारूढ़ गठबंधन के बीच राजनीतिक तनाव पहले से ही बढ़ा हुआ है। गौरतलब है कि राजभर की SBSP, BJP के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का हिस्सा है, जबकि अखिलेश यादव की SP मुख्य विपक्षी दल की भूमिका में है। छात्र आंदोलन अब एक ऐसे राजनीतिक अखाड़े में बदल गया है जहाँ दोनों पक्ष एक-दूसरे पर 'चुनिंदा सहानुभूति' का आरोप लगा रहे हैं।
आगे क्या
झारखंड में छात्र आंदोलन का भविष्य सीबीआई जाँच की माँग पर सरकार के रुख पर निर्भर करेगा। राजनीतिक दलों की इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया आने वाले दिनों में और स्पष्ट होगी, विशेषकर तब जब विपक्षी नेताओं के झारखंड दौरे या उससे परहेज़ पर जनता की नज़र बनी रहेगी।