भारत-रूस संबंध किसी पार्टी पर निर्भर नहीं: कोलकाता में बोले रूसी महावाणिज्यदूत मैक्सिम कोजलोव
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता में आयोजित 'संपर्क - भारत-रूस द्विपक्षीय सम्मेलन 2026' के दौरान रूसी संघ के महावाणिज्यदूत मैक्सिम कोजलोव ने स्पष्ट किया कि भारत और रूस के बीच के संबंध किसी भी सत्तारूढ़ राजनीतिक दल पर निर्भर नहीं हैं। 31 अगस्त 2026 को आयोजित इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की प्रस्तावित मुलाकात तथा दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर विस्तृत चर्चा हुई।
पूर्वी भारत में पहली बार उच्चस्तरीय आयोजन
कोजलोव ने कहा, "मैं बहुत खुश हूँ कि इस कार्यक्रम का आयोजन भारत के इस हिस्से में किया गया है। आम तौर पर आयोजन नई दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में होता है, लेकिन यह पहली बार है जब पूर्वी भारत में कोई इस स्तर का कार्यक्रम हो रहा है।" उन्होंने 'संपर्क' पहल को स्वागत योग्य बताते हुए कहा कि इसके तहत कई नए कार्यक्रमों का आयोजन हुआ है और विभिन्न मुद्दों पर गहन चर्चाएँ हुई हैं।
संपर्क 2026 पूर्वी भारत का पहला उच्चस्तरीय भारत-रूस द्विपक्षीय सम्मेलन है, जिसे कोलकाता स्थित थिंक टैंक P3 द्वारा आयोजित किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य दिल्ली-केंद्रित चर्चाओं के दायरे से बाहर निकलकर पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत को भारत-रूस रणनीतिक एवं व्यावसायिक साझेदारी का नया केंद्र बनाना है।
राजनीतिक दलों से परे है द्विपक्षीय रिश्ता
कोजलोव ने दोनों देशों के संबंधों की स्थायित्व पर जोर देते हुए कहा, "रूस और भारत के बीच संबंध सत्ता में मौजूद राजनीतिक पार्टी पर निर्भर नहीं करते। कांग्रेस सरकार हो, वर्तमान सरकार हो या कोई भी — हमारे सभी के साथ बहुत अच्छे और मजबूत संबंध रहे हैं।" यह टिप्पणी ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब भारत की विदेश नीति में निरंतरता को लेकर वैश्विक स्तर पर चर्चाएँ होती रहती हैं।
व्यापार और उद्योग में बढ़ता जुड़ाव
महावाणिज्यदूत ने बताया कि दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में जुड़ाव निरंतर जारी है। उन्होंने कहा, "जुड़ाव कभी खत्म नहीं होते। हम अलग-अलग क्षेत्रों में अपना संपर्क बनाए रखते हैं।" उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कई रूसी कंपनियाँ भारत में अपने उत्पाद प्रदर्शित करने आ रही हैं और मुंबई में 'मेड इन रशिया' पवेलियन भी खोला गया है — जो व्यापारिक सहयोग की बढ़ती गहराई का संकेत है।
मोदी-पुतिन मुलाकात और BRICS की तैयारी
कोजलोव ने बताया कि इस फ्रेमवर्क के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की मुलाकात प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि रूस नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान द्विपक्षीय और बहुपक्षीय वार्ताओं का बेसब्री से इंतजार कर रहा है। यह सम्मेलन दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय कूटनीतिक संवाद को और मजबूती देने का अवसर होगा।
आगे की राह
गौरतलब है कि 'संपर्क 2026' जैसी पहलें भारत-रूस संबंधों को केवल राजधानी-केंद्रित न रखकर क्षेत्रीय स्तर पर भी विस्तार देने की कोशिश का हिस्सा हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, पूर्वी भारत में इस प्रकार के आयोजन से पश्चिम बंगाल और आसपास के राज्यों में रूस के साथ व्यापार और निवेश के नए अवसर खुल सकते हैं। आने वाले समय में BRICS शिखर सम्मेलन इस साझेदारी की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।