टीएमसी के 4 फ्रीज बैंक खातों पर कलकत्ता हाईकोर्ट में बुधवार को सुनवाई, पुलिस-ईडी दोनों के आदेश चुनौती में
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के चार बैंक खातों को फ्रीज किए जाने के मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट की जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की सिंगल-जज बेंच बुधवार, 12 अगस्त 2026 को सुनवाई करेगी। पश्चिम बंगाल पुलिस ने साइबर क्राइम से जुड़ी एक एफआईआर के आधार पर इन खातों को फ्रीज करने का आदेश दिया था, जिसे TMC ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
याचिका में क्या माँग की गई है
TMC के वकीलों ने अदालत से अनुरोध किया है कि पार्टी को अपने रोज़मर्रा के ज़रूरी खर्चों के लिए फ्रीज खातों से धनराशि निकालने की अनुमति दी जाए। याचिकाकर्ता के वकील ने यह भी सुझाव दिया कि यदि यह अनुमति न्यायालय द्वारा नियुक्त विशेष अधिकारी के माध्यम से दी जाए तो वह अधिक उचित होगा।
TMC का पक्ष है कि इन चार बैंक खातों के ज़रिए किसी भी प्रकार के गैरकानूनी लेन-देन का कोई प्रमाण नहीं मिला है। पार्टी के अनुसार, खातों को फ्रीज करने की कार्रवाई बिना पर्याप्त आधार के की गई है।
पूर्व में निजी बैंक खातों का मामला
गौरतलब है कि इससे पहले एक निजी बैंक में रखे TMC के 3 अन्य खातों के मामले में भी इसी प्रक्रिया का पालन किया गया था। उन खातों पर पहले पश्चिम बंगाल पुलिस के निर्देश पर और बाद में प्रवर्तन निदेशालय (ED) के निर्देशों पर डेबिट पर रोक लगाई गई थी। वर्तमान याचिका उसी अनुभव के आधार पर विशेष अधिकारी की नियुक्ति की माँग कर रही है।
सर्वोच्च न्यायालय का रुख
इससे एक दिन पहले, मंगलवार को सर्वोच्च न्यायालय ने जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की बेंच के माध्यम से कलकत्ता हाईकोर्ट के उस फैसले को सही ठहराया, जिसमें ED द्वारा बैंक खाते फ्रीज किए जाने को चुनौती देने वाली TMC की याचिका पर कोई अंतरिम राहत देने से इनकार किया गया था।
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि हाईकोर्ट ने यह ध्यान में रखते हुए संतुलित आदेश दिया है कि पार्टी के पास रोज़मर्रा के कामकाज चलाने के लिए पर्याप्त निधि उपलब्ध है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि चूँकि पश्चिम बंगाल पुलिस से जुड़ी याचिका सहित यह समग्र मामला हाईकोर्ट में लंबित है, इसलिए गुण-दोष पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।
मामले का व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ TMC और केंद्रीय जाँच एजेंसियों के बीच टकराव का सिलसिला लंबे समय से जारी है। साइबर क्राइम एफआईआर के आधार पर राजनीतिक दल के खातों को फ्रीज करना एक असाधारण कदम माना जा रहा है, और आलोचकों का कहना है कि यह प्रक्रिया राजनीतिक रूप से प्रेरित हो सकती है — हालाँकि पुलिस ने इस आरोप को अस्वीकार किया है। बुधवार की सुनवाई में हाईकोर्ट का रुख यह तय करेगा कि क्या पार्टी को तत्काल राहत मिलती है या मामला लंबी कानूनी प्रक्रिया में जाता है।