21 सितंबर 2026
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कलकत्ता हाईकोर्ट का फैसला: ममता बनर्जी गुट को TMC के 3 बैंक खाते इस्तेमाल करने का अधिकार बरकरार

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कलकत्ता हाईकोर्ट का फैसला: ममता बनर्जी गुट को TMC के 3 बैंक खाते इस्तेमाल करने का अधिकार बरकरार

सारांश

कलकत्ता हाईकोर्ट ने TMC के भीतर गहराते गुटीय संघर्ष के बीच ममता बनर्जी धड़े को राहत दी है — चुनाव आयोग द्वारा पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न फ्रीज किए जाने के बावजूद तीन बैंक खातों पर नियंत्रण 29 जनवरी 2027 तक बनाए रखने की अनुमति दी गई है।

मुख्य बातें

कलकत्ता हाईकोर्ट ने 21 सितंबर 2026 को ममता बनर्जी गुट के TMC के तीन बैंक खातों पर नियंत्रण 29 जनवरी 2027 तक बनाए रखने की अनुमति दी।
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि ECI का अंतरिम आदेश कोर्ट के पूर्व निर्णय को प्रभावित नहीं करेगा।
चुनाव आयोग ने 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'फूल और घास' चुनाव चिह्न को नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनावों के लिए अंतरिम रूप से फ्रीज किया है।
खातों से धन का उपयोग कोर्ट द्वारा नियुक्त विशेष अधिकारी की निगरानी में, केवल रोजमर्रा के कामकाज और कर्मचारियों के वेतन के लिए किया जा सकेगा।
राज्य पुलिस ने कथित अवैध लेन-देन की जाँच रिपोर्ट सोमवार को कोर्ट में सौंपी।
ECI का अंतिम फैसला — पार्टी नाम और चिह्न किसे मिलेगा — अभी बाकी है।

कलकत्ता हाईकोर्ट ने सोमवार, 21 सितंबर 2026 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के ममता बनर्जी गुट को तीन बैंक खातों में जमा राशि का आंशिक और शर्तों के साथ उपयोग जारी रखने की अनुमति दे दी। यह आदेश ऐसे समय में आया है जब भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' के नाम और 'फूल और घास' चुनाव चिह्न को अंतरिम रूप से फ्रीज कर रखा है। न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि ECI का यह अंतरिम आदेश कोर्ट के पूर्व में दिए गए खाता-संचालन आदेश पर कोई असर नहीं डालेगा।

मामले की पृष्ठभूमि

राज्य पुलिस ने एक निजी बैंक में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के नाम पर चल रहे तीन खातों को कथित अवैध लेन-देन के आरोपों के चलते फ्रीज कर दिया था। इसके बाद ममता बनर्जी गुट ने कलकत्ता हाईकोर्ट में इस आदेश को चुनौती दी थी।

इससे पहले 9 जुलाई 2026 को न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने फैसला सुनाया था कि फिलहाल इन खातों पर ममता बनर्जी गुट का नियंत्रण बना रहेगा। हालाँकि, धन का व्यय कोर्ट द्वारा नियुक्त एक विशेष अधिकारी की निगरानी में ही हो सकेगा, और खर्च केवल रोजमर्रा के कामकाज तथा कर्मचारियों के वेतन तक सीमित रहेगा।

सोमवार का अहम फैसला

न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने सोमवार को स्पष्ट किया कि ECI का हालिया आदेश एक अंतरिम व्यवस्था है — कोई अंतिम निर्णय नहीं। उन्होंने कहा कि यह आदेश विशेष रूप से आगामी उपचुनावों — पूर्वी मिदनापुर जिले की नंदीग्राम विधानसभा सीट और मुर्शिदाबाद जिले की रेजीनगर विधानसभा सीट — के लिए पार्टी के नाम और चिह्न के उपयोग को लेकर है।

इसलिए कोर्ट ने अपनी 9 जुलाई 2026 की स्थिति को बनाए रखते हुए दोहराया कि 29 जनवरी 2027 तक इन खातों से धन खर्च करने का अधिकार ममता बनर्जी गुट के पास ही रहेगा।

राज्य सरकार की दलील और कोर्ट की प्रतिक्रिया

राज्य सरकार की ओर से पेश एडिशनल एडवोकेट जनरल राजदीप मजूमदार ने तर्क दिया कि ECI के अंतरिम आदेश के मद्देनज़र किसी भी गुट को उन खातों पर अधिकार नहीं मिलना चाहिए, क्योंकि खाते 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' के नाम पर हैं और इस नाम का उपयोग फिलहाल प्रतिबंधित है।

गौरतलब है कि ECI के पिछले सप्ताह के अंतरिम आदेश के अनुसार, ममता बनर्जी गुट और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बहुमत वाले 'बागी गुट' — दोनों में से कोई भी फिलहाल पार्टी का नाम अथवा चुनाव चिह्न इस्तेमाल नहीं कर सकता। कोर्ट ने, हालाँकि, इस दलील को अस्वीकार करते हुए अपनी पूर्व स्थिति को बनाए रखा।

जाँच की स्थिति

कोर्ट ने पुलिस को इन खातों में हुए कथित अवैध लेन-देन की जाँच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था। सोमवार की सुनवाई के दौरान पुलिस ने अपनी जाँच रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत कर दी।

आगे क्या होगा

यह मामला TMC के भीतर चल रहे गहरे गुटीय संघर्ष का हिस्सा है, जहाँ एक ओर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का गुट है और दूसरी ओर ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में बहुमत का दावा करने वाला धड़ा। ECI का अंतिम फैसला, जो यह तय करेगा कि पार्टी का आधिकारिक नाम और चुनाव चिह्न किसे मिलेगा, अभी आना बाकी है। 29 जनवरी 2027 की समयसीमा के भीतर स्थिति में कोई बड़ा बदलाव आया तो खाता-संचालन के आदेश की भी समीक्षा होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी कोर्ट ने धन-संचालन का अधिकार एक विशेष गुट को दे रखा है — यह विभाजन प्रशासनिक स्तर पर असंगति पैदा कर सकता है। असली सवाल यह है कि ECI का अंतिम फैसला आने तक TMC के संगठनात्मक ढाँचे पर क्या असर पड़ेगा, खासकर जब दो उपचुनाव सिर पर हैं। मुख्यधारा की कवरेज अदालती आदेश पर टिकी है, लेकिन नंदीग्राम और रेजीनगर की सीटों पर चुनावी नतीजे यह तय करेंगे कि असली जनाधार किसके पास है।
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कलकत्ता हाईकोर्ट का TMC बैंक खातों पर 21 सितंबर का फैसला क्या है?
कलकत्ता हाईकोर्ट ने ममता बनर्जी गुट को तीन बैंक खातों में जमा राशि का आंशिक और शर्तों के साथ उपयोग जारी रखने की अनुमति दी है। यह अधिकार 29 जनवरी 2027 तक बना रहेगा और कोर्ट द्वारा नियुक्त विशेष अधिकारी की निगरानी में ही खर्च किया जा सकेगा।
चुनाव आयोग ने TMC का नाम और चुनाव चिह्न क्यों फ्रीज किया?
ECI ने पार्टी के भीतर गुटीय विवाद के कारण 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'फूल और घास' चुनाव चिह्न को अंतरिम रूप से फ्रीज किया है। यह आदेश नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा उपचुनावों के मद्देनज़र जारी किया गया है, और यह अंतिम फैसला नहीं है।
ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी के बीच TMC विवाद क्या है?
TMC के भीतर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में बहुमत का दावा करने वाला 'बागी गुट' आमने-सामने हैं। ECI के अंतरिम आदेश के अनुसार फिलहाल दोनों गुटों में से कोई भी पार्टी का आधिकारिक नाम या चुनाव चिह्न इस्तेमाल नहीं कर सकता।
TMC के बैंक खाते पहले क्यों फ्रीज हुए थे?
राज्य पुलिस ने एक निजी बैंक में 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' के नाम पर चल रहे तीन खातों को कथित अवैध लेन-देन के आरोपों के चलते फ्रीज कर दिया था। इसके बाद ममता बनर्जी गुट ने कलकत्ता हाईकोर्ट में इस आदेश को चुनौती दी थी।
इस मामले में आगे क्या होने की संभावना है?
ECI को अभी अंतिम फैसला देना है कि पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न किस गुट को मिलेगा। तब तक 29 जनवरी 2027 तक कोर्ट के आदेश के तहत खातों पर ममता बनर्जी गुट का नियंत्रण बना रहेगा। नंदीग्राम और रेजीनगर के उपचुनाव भी राजनीतिक समीकरण को प्रभावित करेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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