24 सितंबर 2026
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TMC चुनाव चिह्न फ्रीज विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से 28 सितंबर तक माँगा जवाब

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TMC चुनाव चिह्न फ्रीज विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से 28 सितंबर तक माँगा जवाब

सारांश

ममता बनर्जी का 'घास-फूल' चुनाव चिह्न और 'तृणमूल कांग्रेस' नाम अब सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में है। चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले को चुनौती देने वाली इस याचिका में 28 सितंबर तक जवाब माँगा गया है — और नवंबर के कॉरपोरेशन चुनाव नज़दीक हैं।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 24 सितंबर 2026 को ममता बनर्जी की याचिका पर सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग से 28 सितंबर तक जवाब माँगा।
चुनाव आयोग ने अंतरिम आदेश में ममता गुट को 'ममता टीएमसी' नाम और 'फुटबॉल प्लेयर' सिंबल दिया; बागी गुट को 'डेमोक्रेटिक टीएमसी' और 'लिफाफा' सिंबल मिला।
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि चुनाव प्रक्रिया के बीच सिंबल फ्रीज करना एक 'खतरनाक पूर्वनज़ीर' है।
ममता गुट ने आशंका जताई कि देर से फैसले से नवंबर 2026 के कॉरपोरेशन चुनाव प्रभावित हो सकते हैं।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत , न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी.
मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई की।

सर्वोच्च न्यायालय ने 24 सितंबर 2026 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और 'घास-फूल' चुनाव चिह्न को फ्रीज किए जाने के भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के अंतरिम फैसले को चुनौती देने वाली पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका पर सुनवाई की। न्यायालय ने चुनाव आयोग को 28 सितंबर 2026 तक यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि वह इस विवाद पर अंतिम फैसला कब तक सुनाएगा।

मुख्य घटनाक्रम

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। ममता बनर्जी गुट की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पीठ के समक्ष दलील दी कि पार्टी चुनाव रुकवाना नहीं चाहती, लेकिन उसे अपना मूल नाम और ऐतिहासिक चुनाव चिह्न बनाए रखने की अनुमति दी जाए।

सिब्बल ने कहा, 'यह हमारे अस्तित्व का सवाल है और कोर्ट समुचित उपाय करे।' उन्होंने यह भी चेताया कि यदि न्यायालय इस आदेश में हस्तक्षेप नहीं करता, तो भविष्य में भी चुनाव के बीच चुनाव चिह्न बदला जा सकता है।

चुनाव आयोग का अंतरिम फैसला

चुनाव आयोग ने अपने अंतरिम आदेश में ममता बनर्जी गुट को 'ममता टीएमसी' नाम और 'फुटबॉल प्लेयर' चुनाव चिह्न आवंटित किया है। वहीं, बागी गुट को 'डेमोक्रेटिक टीएमसी' नाम और 'लिफाफा' चुनाव चिह्न दिया गया है। गौरतलब है कि आयोग ने यह अंतरिम निर्णय उपचुनावों को ध्यान में रखते हुए लिया है, जबकि मूल विवाद पर अंतिम निर्णय अभी बाकी है।

नवंबर चुनाव पर मंडराता संकट

ममता बनर्जी गुट ने न्यायालय को यह भी बताया कि यदि चुनाव आयोग ने शीघ्र अंतिम फैसला नहीं लिया, तो नवंबर 2026 में प्रस्तावित कॉरपोरेशन चुनाव प्रभावित हो सकते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में राजनीतिक दलों के विभाजन और प्रतीकों को लेकर विवाद एक बड़ी कानूनी और चुनावी लड़ाई का रूप ले चुका है।

न्यायमूर्ति बागची ने स्पष्ट किया कि उचित उपाय यही है कि निर्वाचन आयोग इस मसले का शीघ्र निर्णय करे। इस टिप्पणी से संकेत मिलता है कि न्यायालय आयोग पर समयबद्ध समाधान के लिए दबाव बनाए रखेगा।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

टीएमसी में आंतरिक विभाजन के बाद दो गुट पार्टी के मूल नाम और 'घास-फूल' चुनाव चिह्न पर दावा जता रहे हैं। चुनाव आयोग ने चुनावी प्रक्रिया के दौरान पार्टी का चुनाव चिह्न फ्रीज करने का जो निर्णय लिया, उसे सिब्बल ने 'नई मिसाल' करार दिया और इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के लिए खतरनाक पूर्वनज़ीर बताया। यह मामला भारत में दल-विभाजन और चुनाव चिह्न विवादों की उस श्रृंखला का हिस्सा है जो 1960 के दशक से न्यायिक व्याख्या का विषय रही है।

आगे की राह

अब 28 सितंबर 2026 को सर्वोच्च न्यायालय में इस मामले की अगली सुनवाई होगी, जिसमें चुनाव आयोग को यह बताना होगा कि वह अंतिम फैसला कब तक सुनाएगा। इस सुनवाई का परिणाम न केवल पश्चिम बंगाल के कॉरपोरेशन चुनावों पर, बल्कि भविष्य में दल-विभाजन की स्थिति में चुनाव चिह्न आवंटन की पूरी प्रक्रिया पर भी दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

परंतु समयसीमा माँगना और समयसीमा लागू करना अलग बात है — अदालत की असली परीक्षा 28 सितंबर के बाद शुरू होगी।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

TMC चुनाव चिह्न फ्रीज विवाद क्या है?
तृणमूल कांग्रेस (TMC) में आंतरिक विभाजन के बाद दो गुट पार्टी के ऐतिहासिक नाम और 'घास-फूल' चुनाव चिह्न पर दावा कर रहे हैं। चुनाव आयोग ने अंतरिम आदेश में ममता बनर्जी गुट को 'ममता टीएमसी' नाम और 'फुटबॉल प्लेयर' सिंबल, तथा बागी गुट को 'डेमोक्रेटिक टीएमसी' और 'लिफाफा' सिंबल आवंटित किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में क्या निर्देश दिया?
सर्वोच्च न्यायालय ने 24 सितंबर 2026 को सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग को 28 सितंबर तक यह बताने का निर्देश दिया कि वह इस विवाद पर अंतिम फैसला कब तक सुनाएगा। न्यायमूर्ति बागची ने स्पष्ट किया कि आयोग को इस मसले का शीघ्र निर्णय करना चाहिए।
क्या इस विवाद से नवंबर 2026 के चुनाव प्रभावित हो सकते हैं?
ममता बनर्जी गुट ने न्यायालय को बताया कि यदि चुनाव आयोग ने जल्द अंतिम फैसला नहीं लिया, तो नवंबर 2026 में प्रस्तावित कॉरपोरेशन चुनाव प्रभावित हो सकते हैं। चुनाव चिह्न की अनिश्चितता मतदाताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए भ्रम की स्थिति पैदा कर सकती है।
कपिल सिब्बल ने न्यायालय में क्या दलील दी?
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि ममता गुट चुनाव रुकवाना नहीं चाहता, बल्कि वह पार्टी का मूल नाम और चुनाव चिह्न बनाए रखने की माँग कर रहा है। उन्होंने यह भी चेताया कि यदि सुप्रीम कोर्ट इस आदेश में दखल नहीं देता, तो चुनाव आयोग भविष्य में भी चुनाव के बीच चुनाव चिह्न बदल सकता है।
इस मामले में अगली सुनवाई कब होगी?
इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय में अगली सुनवाई 28 सितंबर 2026 को निर्धारित है। उस दिन चुनाव आयोग को स्पष्ट करना होगा कि वह TMC नाम और चुनाव चिह्न विवाद पर अंतिम निर्णय कब तक सुनाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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