26 अक्टूबर 2026
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TMC चुनाव चिन्ह विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने दोनों गुटों को जवाब दाखिल करने के लिए 10 दिन की मोहलत दी

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TMC चुनाव चिन्ह विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने दोनों गुटों को जवाब दाखिल करने के लिए 10 दिन की मोहलत दी

सारांश

तृणमूल कांग्रेस पर नियंत्रण का कानूनी संघर्ष जारी है — सर्वोच्च न्यायालय ने ऋतब्रत बनर्जी और ममता बनर्जी, दोनों गुटों को चुनाव आयोग के समक्ष जवाब दाखिल करने के लिए 10-10 दिन की मोहलत दी। 'फूल और घास' चुनाव चिन्ह और पार्टी के मूल नाम का असली हकदार कौन — यह फैसला अब ECI के हाथों में है।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 26 अक्टूबर 2026 को ऋतब्रत बनर्जी गुट को ECI में जवाब दाखिल करने के लिए 10 दिन की अतिरिक्त मोहलत दी।
ममता बनर्जी गुट को भी प्रतिद्वंद्वी हलफनामे पर जवाब देने के लिए 10 दिन और दिए गए।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत , न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी.
मोहना की पीठ ने यह आदेश दिया।
पूर्व आदेश ( 28 सितंबर ) में ECI को सभी दलीलें प्राप्त होने के बाद तीन महीने में फैसला देने का निर्देश है।
ममता गुट को 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' व 'फुटबॉल खिलाड़ी' चिन्ह, जबकि ऋतब्रत गुट को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' व 'लिफाफा' चिन्ह अंतरिम तौर पर आवंटित हैं।

सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिन्ह विवाद में ऋतब्रत बनर्जी गुट को चुनाव आयोग (ECI) के समक्ष अपना जवाब दाखिल करने के लिए 10 दिन का अतिरिक्त समय प्रदान किया। इसके साथ ही, ममता बनर्जी गुट को भी प्रतिद्वंद्वी गुट के हलफनामे पर जवाब देने के लिए 10 दिन की अतिरिक्त मोहलत दी गई। यह विवाद पार्टी के नाम और आरक्षित चुनाव चिन्ह पर नियंत्रण को लेकर दो गुटों के बीच जारी कानूनी संघर्ष का हिस्सा है।

मामले की पृष्ठभूमि

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने यह आदेश ममता बनर्जी की उस याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया, जिसमें उन्होंने चुनाव आयोग के उस अंतरिम आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत पार्टी का मूल नाम 'तृणमूल कांग्रेस' और आरक्षित चुनाव चिन्ह 'फूल और घास' को फ्रीज कर दिया गया था। ताज़ा आदेश तब आया जब ऋतब्रत बनर्जी गुट ने ECI में जवाब दाखिल करने की अंतिम तिथि — जो सोमवार को ही समाप्त हो रही थी — से पहले दो सप्ताह के अतिरिक्त समय की माँग की।

28 सितंबर के आदेश का संदर्भ

गौरतलब है कि 28 सितंबर 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने दोनों पक्षों को चार सप्ताह के भीतर सभी दस्तावेज, हलफनामे और जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था। उस आदेश में यह भी कहा गया था कि सभी पक्षों की लिखित कार्यवाही पूरी होने के बाद चुनाव आयोग तीन महीने के भीतर विवाद का निपटारा करे। अदालत ने तब स्पष्ट किया था कि उसने मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं की है और दोनों पक्ष ECI के समक्ष अपनी-अपनी दलीलें रखने के लिए स्वतंत्र हैं।

दोनों गुटों को अंतरिम नाम और चिन्ह

यह ऐसे समय में आया है जब चुनाव आयोग पहले ही दोनों गुटों को अंतरिम व्यवस्था के तहत अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह आवंटित कर चुका है। ममता बनर्जी गुट को 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'फुटबॉल खिलाड़ी' चुनाव चिन्ह दिया गया, जबकि ऋतब्रत बनर्जी गुट को पश्चिम बंगाल उपचुनावों के लिए 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'लिफाफा' चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया। ECI के अनुसार यह अंतरिम व्यवस्था दोनों गुटों को समान स्थिति में रखने और अंतिम निर्णय तक उनके अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की गई है।

ममता गुट का विरोध

ममता बनर्जी गुट ने सोमवार को अतिरिक्त समय देने की माँग का विरोध किया। 28 सितंबर के पूर्व आदेश में सर्वोच्च न्यायालय ने दर्ज किया था कि ममता बनर्जी गुट का जवाब रिकॉर्ड पर पहले से मौजूद है, लेकिन प्रतिद्वंद्वी गुट की ओर से जवाब अभी दाखिल नहीं किया गया था। इस पृष्ठभूमि में विरोध को उचित ठहराते हुए ममता गुट के वकीलों ने तर्क दिया कि देरी से समग्र कानूनी प्रक्रिया बाधित होती है।

आगे क्या होगा

अब दोनों गुटों के जवाब दाखिल होने के बाद चुनाव आयोग को तीन महीने के भीतर अंतिम निर्णय देना होगा — यह निर्णय तय करेगा कि आधिकारिक तौर पर तृणमूल कांग्रेस के नाम और 'फूल और घास' चुनाव चिन्ह का वैध दावेदार कौन है। यह फैसला पश्चिम बंगाल की भविष्य की चुनावी राजनीति पर दूरगामी प्रभाव डालेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके राजनीतिक निहितार्थ गहरे हैं — हर अतिरिक्त दिन की देरी का अर्थ है कि TMC का मूल नाम और 'फूल और घास' चिन्ह फ्रीज रहेगा, जो ममता बनर्जी गुट की जमीनी पहचान को प्रभावित करता है। ECI पर तीन महीने का समय-सीमा का दबाव है, लेकिन पार्टी विवादों में आयोग का इतिहास बताता है कि प्रक्रियात्मक जटिलताएँ इस सीमा को खिंचाव दे सकती हैं। जो बात मुख्यधारा की कवरेज अक्सर चूक जाती है वह यह है कि यह सिर्फ चिन्ह का विवाद नहीं — पश्चिम बंगाल में करोड़ों मतदाताओं की पहचान और जमीनी संगठन की विरासत दाँव पर है।
RashtraPress
26 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

TMC चुनाव चिन्ह विवाद क्या है?
यह विवाद तृणमूल कांग्रेस के आधिकारिक नाम और आरक्षित चुनाव चिन्ह 'फूल और घास' पर नियंत्रण को लेकर ममता बनर्जी गुट और ऋतब्रत बनर्जी गुट के बीच चल रहा है। चुनाव आयोग ने अंतिम फैसले तक दोनों को अंतरिम नाम और चिन्ह आवंटित किए हैं और मामला सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में है।
सुप्रीम कोर्ट ने 26 अक्टूबर को क्या आदेश दिया?
सर्वोच्च न्यायालय ने ऋतब्रत बनर्जी गुट को चुनाव आयोग के समक्ष जवाब दाखिल करने के लिए 10 दिन का अतिरिक्त समय दिया। साथ ही ममता बनर्जी गुट को प्रतिद्वंद्वी हलफनामे पर जवाब देने के लिए भी 10 दिन और दिए गए।
चुनाव आयोग इस मामले में कब तक फैसला देगा?
28 सितंबर 2026 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, सभी पक्षों की लिखित कार्यवाही पूरी होने के बाद चुनाव आयोग को तीन महीने के भीतर अंतिम निर्णय देना होगा। अब 10 दिन की नई मोहलत के बाद यह समय-सीमा तदनुसार आगे खिसकेगी।
दोनों गुटों को अभी कौन-से नाम और चिन्ह मिले हैं?
ममता बनर्जी गुट को अंतरिम तौर पर 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'फुटबॉल खिलाड़ी' चुनाव चिन्ह मिला है। ऋतब्रत बनर्जी गुट को पश्चिम बंगाल उपचुनावों के लिए 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'लिफाफा' चुनाव चिन्ह दिया गया है।
ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका क्यों दाखिल की थी?
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के उस अंतरिम आदेश को चुनौती देने के लिए सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया था, जिसके तहत पार्टी का मूल नाम 'तृणमूल कांग्रेस' और आरक्षित चुनाव चिन्ह 'फूल और घास' को अंतिम फैसले तक फ्रीज कर दिया गया था। ECI के अनुसार यह व्यवस्था दोनों गुटों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए की गई थी।
राष्ट्र प्रेस
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