21 सितंबर 2026
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टीएमसी नाम-चिह्न फ्रीज: ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में तत्काल सुनवाई की माँग की

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टीएमसी नाम-चिह्न फ्रीज: ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में तत्काल सुनवाई की माँग की

सारांश

टीएमसी का नाम और चुनाव चिह्न — दोनों फ्रीज। 6 अक्टूबर के उपचुनाव नज़दीक हैं और ममता बनर्जी तीन मोर्चों पर एक साथ लड़ रही हैं: सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग और संसद। यह सिर्फ एक पार्टी विवाद नहीं — बल्कि बंगाल की सत्ता के भविष्य की लड़ाई है।

मुख्य बातें

ममता बनर्जी ने 21 सितंबर 2026 को सर्वोच्च न्यायालय में ECI के चुनाव चिह्न फ्रीज आदेश के खिलाफ तत्काल सुनवाई की माँग की।
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पक्ष रखा; CJI ने मामले को सूचीबद्ध करने का आश्वासन दिया।
ECI ने 'चुनाव चिह्न आदेश, 1968' के पैरा 15 के तहत दोनों गुटों को अलग नाम और चिह्न दिए — ममता गुट को फुटबॉल खिलाड़ी , विरोधी गुट को लिफाफा ।
यह आदेश पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम और रेजीनगर में 6 अक्टूबर 2026 के उपचुनावों पर लागू है।
20 बागी TMC सांसदों पर दलबदल विरोधी कार्यवाही लंबित; 25 अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें नोटिस जारी किए।
बागी गुट का दावा है कि उसके पास TMC के दो-तिहाई से अधिक लोकसभा सांसदों का समर्थन है।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी ने 21 सितंबर 2026 को सर्वोच्च न्यायालय में अपनी याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने की माँग की, जिसमें भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के उस अंतरिम फैसले को चुनौती दी गई है जिसके तहत पार्टी के नाम 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' और उसके आरक्षित फूल और घास चुनाव चिह्न को फ्रीज कर दिया गया था। यह विवाद TMC के दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच पार्टी की वैधता और संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर उपजे गहरे संकट की पृष्ठभूमि में उभरा है।

सर्वोच्च न्यायालय में क्या हुआ

ममता बनर्जी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के समक्ष याचिका को शीघ्र सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया। सिब्बल ने तर्क दिया कि चुनाव आयोग ने उपचुनाव की अधिसूचना जारी करने के बाद ही चुनाव चिह्न को फ्रीज किया, जिससे उनके मुवक्किल को अनुचित नुकसान हो रहा है।

CJI संजीव खन्ना ने सिब्बल को आश्वस्त किया कि मामले को सूचीबद्ध करने पर विचार किया जाएगा, लेकिन साथ ही स्पष्ट किया कि विरोधी पक्ष को भी अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा। CJI ने कहा, 'दोनों पक्षों को कुछ न कुछ कहना होगा। जब मामला लिस्ट हो जाए, तब बहस कीजिएगा।'

चुनाव आयोग का अंतरिम आदेश और पृष्ठभूमि

ECI ने गुरुवार को एक अंतरिम आदेश जारी कर दोनों गुटों को TMC के वर्तमान नाम और चुनाव चिह्न के इस्तेमाल से रोक दिया। आयोग ने पाया कि दो प्रतिद्वंद्वी गुट मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल होने का दावा कर रहे थे और इस विवाद को 'चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968' के पैरा 15 के तहत निपटाना आवश्यक था।

आयोग ने आगामी उपचुनावों के लिए दोनों गुटों को अलग-अलग पहचान दी। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और फुटबॉल खिलाड़ी का चिह्न आवंटित किया गया, जबकि विरोधी गुट को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम और लिफाफा चिह्न दिया गया।

पश्चिम बंगाल उपचुनावों पर असर

ECI का यह अंतरिम आदेश पश्चिम बंगाल में 6 अक्टूबर 2026 को होने वाले उपचुनावों पर सीधे लागू होता है, जिनमें नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। गौरतलब है कि नंदीग्राम वही सीट है जहाँ से ममता बनर्जी 2021 में चुनाव हार गई थीं, जिससे इस क्षेत्र का राजनीतिक महत्त्व और भी बढ़ जाता है।

ममता के नेतृत्व वाले गुट ने ECI के फैसले को मानने से इनकार किया है और याचिका में माँग की है कि अंतिम निर्णय आने तक पार्टी के स्थापित नाम और चिह्न पर रोक न लगाई जाए।

संसद तक पहुँचा विवाद — दलबदल और अयोग्यता

यह संकट केवल राज्य स्तर तक सीमित नहीं रहा। निलंबित विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले विरोधी गुट ने TMC के संगठनात्मक और विधायी ढाँचे पर नियंत्रण का दावा किया है। इसके अलावा TMC के 20 बागी लोकसभा सांसदों ने अलग होकर 'नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' के साथ गठबंधन किया और एक स्वतंत्र संसदीय समूह के रूप में मान्यता माँगी है।

ममता गुट ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की दलबदल विरोधी याचिकाओं पर निर्णय में देरी को भी चुनौती दी थी। 25 अगस्त 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की याचिका पर 20 बागी सांसदों को नोटिस जारी किए। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि अयोग्यता कार्यवाही में सांसदों को पहले ही नोटिस भेजे जा चुके हैं।

बागी गुट का दावा है कि उसके पास TMC के दो-तिहाई से अधिक लोकसभा सांसदों का समर्थन है, जो दलबदल विरोधी कानून के तहत विलय के लिए आवश्यक संख्या है। यह कानूनी और संसदीय लड़ाई अब एक साथ तीन मोर्चों — चुनाव आयोग, सर्वोच्च न्यायालय और संसद — पर लड़ी जा रही है।

आगे क्या होगा

सर्वोच्च न्यायालय के सूचीबद्ध करने के आश्वासन के बाद अब नज़रें इस बात पर हैं कि क्या अदालत उपचुनाव की तारीख से पहले कोई अंतरिम राहत देती है। 6 अक्टूबर की समयसीमा को देखते हुए ममता गुट के पास बेहद कम वक्त है। ECI के अंतिम आदेश और सर्वोच्च न्यायालय के फैसले, दोनों मिलकर यह तय करेंगे कि भारत की सबसे प्रमुख क्षेत्रीय पार्टियों में से एक का भविष्य किस दिशा में जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो ममता को एक ऐसे चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ना होगा जिसे मतदाता पहचानते ही नहीं। यह संकट दशकों में सबसे गंभीर संस्थागत चुनौती है जो किसी क्षेत्रीय दल के सामने एक साथ तीन स्तरों — आयोग, न्यायालय, संसद — पर आई है। मुख्यधारा की कवरेज जो नज़रअंदाज़ कर रही है वह यह है कि बागी गुट का 'दो-तिहाई समर्थन' का दावा अगर सही साबित हुआ, तो दलबदल विरोधी कानून स्वयं ममता के खिलाफ हथियार बन सकता है।
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चुनाव आयोग ने TMC का नाम और चिह्न क्यों फ्रीज किया?
ECI ने पाया कि दो प्रतिद्वंद्वी गुट एक ही मान्यता प्राप्त दल होने का दावा कर रहे हैं, जिससे 'चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968' के पैरा 15 के तहत कार्रवाई ज़रूरी हो गई। अंतिम फैसला आने तक दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चिह्न दिए गए हैं।
ममता बनर्जी के गुट को नया चुनाव चिह्न क्या मिला है?
चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी के गुट को 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'फुटबॉल खिलाड़ी' चिह्न आवंटित किया है, जबकि विरोधी गुट को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'लिफाफा' चिह्न दिया गया है।
इस विवाद का 6 अक्टूबर के उपचुनावों पर क्या असर होगा?
ECI का अंतरिम आदेश पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा क्षेत्रों में 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनावों पर लागू होगा। दोनों गुटों को अलग नाम और चिह्न पर चुनाव लड़ना होगा, जब तक सर्वोच्च न्यायालय कोई अंतरिम राहत नहीं देता।
TMC के 20 बागी सांसदों का मामला सुप्रीम कोर्ट में क्या है?
25 अगस्त 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की याचिका पर 20 बागी लोकसभा सांसदों को नोटिस जारी किए। याचिका में इन सांसदों की दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता की माँग की गई है; सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि अयोग्यता कार्यवाही में नोटिस पहले ही भेजे जा चुके हैं।
सर्वोच्च न्यायालय ने तत्काल सुनवाई की माँग पर क्या कहा?
CJI ने मामले को जल्द सूचीबद्ध करने का आश्वासन दिया, लेकिन स्पष्ट किया कि विरोधी पक्ष को भी अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि सुनवाई होने पर ही बहस की जाए।
राष्ट्र प्रेस
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