तृणमूल कांग्रेस नाम और चुनाव चिह्न: चुनाव आयोग आज दोनों गुटों से करेगा अंतिम सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय चुनाव आयोग (ECI) गुरुवार, 18 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों के प्रतिनिधिमंडलों से अलग अलग बैठक करेगा — और राजनीतिक हलकों में यह कयास तेज़ हैं कि आयोग इसी दिन पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अंतिम फ़ैसला सुना सकता है। यह सुनवाई 12 सितंबर 2026 को हुई पिछली बैठक की अगली कड़ी है, जब आयोग ने निर्णय टालते हुए दोनों पक्षों से अतिरिक्त दस्तावेज़ माँगे थे।
सुनवाई का क्रम और प्रतिनिधिमंडल
आयोग ने दोनों गुटों की बैठकें एक एक घंटे के अंतराल पर तय की हैं। पार्टी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले 'बागी' गुट की बैठक दोपहर 3 बजे निर्धारित है। इस प्रतिनिधिमंडल में ऋतब्रत बनर्जी, अरूप रॉय, चंद्रिमा भट्टाचार्य, अखरुज्जमां और वकील अमन झा — कुल पाँच सदस्य शामिल हैं।
इसके बाद शाम 4 बजे पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट की बारी होगी। इस गुट का प्रतिनिधित्व कल्याण बनर्जी करेंगे, जो TMC के लोकसभा सदस्य और वकील दोनों हैं। प्रतिनिधिमंडल के शेष चार सदस्यों के नाम अभी तक सार्वजनिक नहीं हुए हैं।
पिछली सुनवाई और दस्तावेज़ों की भूमिका
12 सितंबर 2026 को हुई बैठक में आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बावजूद कोई निर्णय नहीं लिया था। उस बैठक में आयोग ने अतिरिक्त दस्तावेज़ तलब किए थे, जिन्हें आज की सुनवाई में प्रस्तुत किया जाएगा। आयोग के अनुसार, दोनों गुटों की अंतिम दलीलें उन्हीं दस्तावेज़ों पर केंद्रित होंगी।
गौरतलब है कि TMC में यह विभाजन तब से और गहरा हुआ है जब ऋतब्रत बनर्जी सहित कई नेताओं को पार्टी से निष्कासित किया गया। इसके बाद बागी गुट ने आयोग का दरवाज़ा खटखटाया और पार्टी के नाम व चुनाव चिह्न पर दावा ठोका।
फ़ैसले के बाद भी क़ानूनी लड़ाई की आशंका
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव आयोग के निर्णय से मामला यहीं समाप्त नहीं होगा। एक राजनीतिक जानकार के अनुसार, "जो भी गुट इस फैसले से नाखुश होगा, वह निश्चित रूप से इसके खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय जाएगा।" यह ऐसे समय में आया है जब देश में कई राज्यों के चुनाव नज़दीक हैं और पार्टी का संगठनात्मक ढाँचा दाँव पर है।
यह पहली बार नहीं है जब किसी राष्ट्रीय दल के भीतर नाम और चुनाव चिह्न को लेकर आयोग का हस्तक्षेप हुआ हो — इससे पहले समाजवादी पार्टी और शिवसेना जैसे मामलों में भी आयोग ने ऐसे विवादों का निपटारा किया है, और उन मामलों में भी सर्वोच्च न्यायालय तक की यात्रा हुई थी।
आगे क्या होगा
यदि आयोग आज अंतिम फ़ैसला सुनाता है, तो TMC के चुनावी भविष्य की दिशा काफ़ी हद तक तय हो जाएगी। हालाँकि, क़ानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी गुट द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर करने की स्थिति में आयोग के आदेश पर अंतरिम स्थगन मिल सकता है। पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों की नज़रें आज शाम होने वाले इस निर्णय पर टिकी हैं।