17 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

तृणमूल कांग्रेस नाम और चुनाव चिह्न: चुनाव आयोग आज दोनों गुटों से करेगा अंतिम सुनवाई

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
तृणमूल कांग्रेस नाम और चुनाव चिह्न: चुनाव आयोग आज दोनों गुटों से करेगा अंतिम सुनवाई

सारांश

तृणमूल कांग्रेस के दो गुटों के बीच पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न की लड़ाई आज निर्णायक मोड़ पर है। चुनाव आयोग दोपहर 3 और शाम 4 बजे दोनों पक्षों की अंतिम दलीलें सुनेगा — लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि जो गुट हारेगा, वह सर्वोच्च न्यायालय का रुख़ करेगा।

मुख्य बातें

भारतीय चुनाव आयोग (ECI) गुरुवार को नई दिल्ली में TMC के दोनों गुटों से अंतिम सुनवाई करेगा।
ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट की बैठक दोपहर 3 बजे , ममता बनर्जी गुट की शाम 4 बजे ।
ममता गुट का प्रतिनिधित्व लोकसभा सदस्य एवं वकील कल्याण बनर्जी करेंगे।
पिछली सुनवाई 12 सितंबर 2026 को हुई थी, जब आयोग ने दोनों पक्षों से अतिरिक्त दस्तावेज़ माँगे थे।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, फ़ैसले से असंतुष्ट गुट सर्वोच्च न्यायालय जा सकता है।

भारतीय चुनाव आयोग (ECI) गुरुवार, 18 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों के प्रतिनिधिमंडलों से अलग अलग बैठक करेगा — और राजनीतिक हलकों में यह कयास तेज़ हैं कि आयोग इसी दिन पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अंतिम फ़ैसला सुना सकता है। यह सुनवाई 12 सितंबर 2026 को हुई पिछली बैठक की अगली कड़ी है, जब आयोग ने निर्णय टालते हुए दोनों पक्षों से अतिरिक्त दस्तावेज़ माँगे थे।

सुनवाई का क्रम और प्रतिनिधिमंडल

आयोग ने दोनों गुटों की बैठकें एक एक घंटे के अंतराल पर तय की हैं। पार्टी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले 'बागी' गुट की बैठक दोपहर 3 बजे निर्धारित है। इस प्रतिनिधिमंडल में ऋतब्रत बनर्जी, अरूप रॉय, चंद्रिमा भट्टाचार्य, अखरुज्जमां और वकील अमन झा — कुल पाँच सदस्य शामिल हैं।

इसके बाद शाम 4 बजे पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट की बारी होगी। इस गुट का प्रतिनिधित्व कल्याण बनर्जी करेंगे, जो TMC के लोकसभा सदस्य और वकील दोनों हैं। प्रतिनिधिमंडल के शेष चार सदस्यों के नाम अभी तक सार्वजनिक नहीं हुए हैं।

पिछली सुनवाई और दस्तावेज़ों की भूमिका

12 सितंबर 2026 को हुई बैठक में आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बावजूद कोई निर्णय नहीं लिया था। उस बैठक में आयोग ने अतिरिक्त दस्तावेज़ तलब किए थे, जिन्हें आज की सुनवाई में प्रस्तुत किया जाएगा। आयोग के अनुसार, दोनों गुटों की अंतिम दलीलें उन्हीं दस्तावेज़ों पर केंद्रित होंगी।

गौरतलब है कि TMC में यह विभाजन तब से और गहरा हुआ है जब ऋतब्रत बनर्जी सहित कई नेताओं को पार्टी से निष्कासित किया गया। इसके बाद बागी गुट ने आयोग का दरवाज़ा खटखटाया और पार्टी के नाम व चुनाव चिह्न पर दावा ठोका।

फ़ैसले के बाद भी क़ानूनी लड़ाई की आशंका

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव आयोग के निर्णय से मामला यहीं समाप्त नहीं होगा। एक राजनीतिक जानकार के अनुसार, "जो भी गुट इस फैसले से नाखुश होगा, वह निश्चित रूप से इसके खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय जाएगा।" यह ऐसे समय में आया है जब देश में कई राज्यों के चुनाव नज़दीक हैं और पार्टी का संगठनात्मक ढाँचा दाँव पर है।

यह पहली बार नहीं है जब किसी राष्ट्रीय दल के भीतर नाम और चुनाव चिह्न को लेकर आयोग का हस्तक्षेप हुआ हो — इससे पहले समाजवादी पार्टी और शिवसेना जैसे मामलों में भी आयोग ने ऐसे विवादों का निपटारा किया है, और उन मामलों में भी सर्वोच्च न्यायालय तक की यात्रा हुई थी।

आगे क्या होगा

यदि आयोग आज अंतिम फ़ैसला सुनाता है, तो TMC के चुनावी भविष्य की दिशा काफ़ी हद तक तय हो जाएगी। हालाँकि, क़ानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी गुट द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर करने की स्थिति में आयोग के आदेश पर अंतरिम स्थगन मिल सकता है। पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों की नज़रें आज शाम होने वाले इस निर्णय पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिससे ज़मीनी नुक़सान मुख्य रूप से सामान्य कार्यकर्ताओं और मतदाताओं को होता है। असली सवाल यह है कि क्या आयोग का आज का रुख़ पूर्ण व तर्कपूर्ण आदेश के रूप में आएगा जो न्यायिक समीक्षा में टिक सके।
RashtraPress
17 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चुनाव आयोग TMC के किस विवाद पर फ़ैसला करने वाला है?
चुनाव आयोग तृणमूल कांग्रेस के दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच पार्टी के आधिकारिक नाम और चुनाव चिह्न पर दावे का निपटारा करने वाला है। एक गुट पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में है और दूसरा निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में।
आज की सुनवाई में दोनों गुटों का प्रतिनिधित्व कौन करेगा?
बागी गुट की ओर से ऋतब्रत बनर्जी, अरूप रॉय, चंद्रिमा भट्टाचार्य, अखरुज्जमां और वकील अमन झा — कुल पाँच सदस्य उपस्थित होंगे। ममता बनर्जी के गुट का प्रतिनिधित्व लोकसभा सदस्य एवं वकील कल्याण बनर्जी करेंगे।
12 सितंबर की बैठक में क्या हुआ था?
12 सितंबर 2026 को चुनाव आयोग ने दोनों गुटों की दलीलें सुनीं लेकिन कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया। इसके बजाय आयोग ने दोनों पक्षों से अतिरिक्त दस्तावेज़ माँगे, जिन्हें आज की सुनवाई में प्रस्तुत किया जाएगा।
क्या चुनाव आयोग के फ़ैसले के बाद मामला सुलझ जाएगा?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, आयोग का फ़ैसला मामले का अंत नहीं होगा। जो गुट निर्णय से असंतुष्ट होगा, वह सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दे सकता है, जहाँ अंतरिम स्थगन की संभावना से विवाद और लंबा खिंच सकता है।
इस तरह के पार्टी चिह्न विवादों में चुनाव आयोग कैसे फ़ैसला करता है?
चुनाव आयोग किसी दल में विभाजन की स्थिति में संगठनात्मक बहुमत, विधायी संख्या और दस्तावेज़ी साक्ष्य के आधार पर यह तय करता है कि पार्टी का आधिकारिक नाम और चुनाव चिह्न किसे मिलेगा। इससे पहले शिवसेना और समाजवादी पार्टी जैसे मामलों में भी यही प्रक्रिया अपनाई जा चुकी है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 12 घंटे पहले
  2. 12 घंटे पहले
  3. 12 घंटे पहले
  4. 3 दिन पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 2 महीने पहले