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टीएमसी बागी गुट का चुनाव चिह्न पर दावा: ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 10 विधायक गुरुवार को ईसीआई फुल बेंच से मिलेंगे

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टीएमसी बागी गुट का चुनाव चिह्न पर दावा: ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 10 विधायक गुरुवार को ईसीआई फुल बेंच से मिलेंगे

सारांश

तृणमूल कांग्रेस का आंतरिक संकट अब ECI के दरवाजे तक पहुँच गया है। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 60 विधायकों का दावा करने वाला बागी गुट गुरुवार को पार्टी के चुनाव चिह्न और फंड पर कानूनी दावा ठोकेगा — यह लड़ाई ममता बनर्जी की पार्टी के अस्तित्व की लड़ाई बन चुकी है।

मुख्य बातें

ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में TMC का 'बागी लेकिन बहुमत' गुट गुरुवार को ECI की पूर्ण पीठ से मिलेगा।
बागी गुट पार्टी के चुनाव चिह्न और पार्टी फंड पर अपना दावा पेश करेगा।
बागी गुट का दावा है कि 80 में से 60 विधायक उसके साथ हैं; ममता बनर्जी गुट के पास केवल 20 विधायक।
22 जून को बागियों ने 30 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यसमिति बनाई और अरूप रॉय को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया।
निर्वाचन चिह्न आदेश, 1968 के तहत चिह्न बनाए रखने के लिए 6% वैध मत और न्यूनतम 2 विधायक जरूरी।
बागी गुट का अनुमान: उनके पक्ष में करीब 48 लाख वोट , जो ECI की 37.80 लाख की सीमा से अधिक।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला 'बागी लेकिन बहुमत' गुट गुरुवार, 3 जुलाई 2025 को नई दिल्ली स्थित भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के मुख्यालय में आयोग की पूर्ण पीठ (फुल बेंच) के समक्ष अपना पक्ष रखेगा। बागी गुट पार्टी के चुनाव चिह्न और पार्टी फंड पर अपना दावा पेश करेगा — जो पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी के भीतर चल रहे सबसे बड़े आंतरिक संकट की अगली कड़ी है।

प्रतिनिधिमंडल और बैठक का विवरण

ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 10 विधायकों का प्रतिनिधिमंडल बुधवार शाम नई दिल्ली के लिए रवाना हुआ। बनर्जी ने बताया कि आयोग ने गुरुवार को बैठक का समय तय किया है, जिसमें उनके गुट की दलीलें सुनी जाएंगी। बागी गुट की वकीलों की टीम पहले ही सभी प्रस्ताव और कानूनी दस्तावेज ECI के समक्ष जमा करा चुकी है।

विवाद की पृष्ठभूमि

यह विवाद 22 जून को उस समय और गहरा गया जब बागी विधायकों ने 30 सदस्यीय नई राष्ट्रीय कार्यसमिति और 10 सदस्यीय उप-समिति का गठन किया। इस नई संरचना में पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का नाम राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटाकर वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को यह जिम्मेदारी सौंपी गई। गौरतलब है कि यह कदम पार्टी नेतृत्व को सीधी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

वर्तमान में पश्चिम बंगाल विधानसभा में TMC के 80 विधायक हैं। बागी गुट का दावा है कि इनमें से 60 विधायक उसके साथ हैं, जबकि केवल 20 विधायक ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के प्रति निष्ठावान 'मूल लेकिन अल्पमत' गुट के साथ हैं।

कानूनी दावे का आधार

इस पूरे विवाद का केंद्रीय कानूनी मुद्दा पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर नियंत्रण को लेकर है। निर्वाचन चिह्न (आरक्षण एवं आवंटन) आदेश, 1968 के अनुसार किसी क्षेत्रीय दल को अपना चुनाव चिह्न बनाए रखने के लिए कम से कम छह प्रतिशत वैध मत और कम से कम दो विधायक होने आवश्यक हैं।

बागी गुट का तर्क है कि यदि प्रति विधायक औसतन 80 हजार वोट भी माने जाएं, तो उनके 60 विधायकों के पक्ष में लगभग 48 लाख वोट बैठते हैं — जो ECI द्वारा निर्धारित छह प्रतिशत की सीमा, यानी करीब 37.80 लाख वोट, से काफी अधिक हैं। दूसरी ओर, बागी गुट का कहना है कि 'मूल लेकिन अल्पमत' गुट के पास केवल 20 विधायक हैं, इसलिए उनके हिस्से के वोट 37 लाख के आँकड़े तक नहीं पहुँचते।

आगे क्या होगा

ECI की पूर्ण पीठ दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद चुनाव चिह्न के आवंटन पर अपना निर्णय सुनाएगी। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ पृष्ठभूमि में शुरू हो चुकी हैं और चुनाव चिह्न का नियंत्रण किसी भी गुट के लिए राजनीतिक अस्तित्व का प्रश्न बन चुका है। ECI के फैसले का असर न केवल TMC के भविष्य पर, बल्कि पश्चिम बंगाल की समग्र राजनीतिक दिशा पर भी पड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारतीय क्षेत्रीय दलों की उस पुरानी कमज़ोरी को उजागर करता है जहाँ पार्टी की संरचना एक व्यक्ति के इर्द-गिर्द इतनी केंद्रित हो जाती है कि असहमति के लिए कोई संस्थागत जगह नहीं बचती। ऋतब्रत बनर्जी का '60 विधायकों का समर्थन' का दावा अभी तक सत्यापित नहीं हुआ है — और ECI के सामने असली परीक्षा यही होगी। गौरतलब है कि 1968 के निर्वाचन चिह्न आदेश के तहत बहुमत का गणित निर्णायक भूमिका निभाएगा, लेकिन राजनीतिक वफादारियाँ कागज़ पर जितनी साफ दिखती हैं, ज़मीन पर उतनी नहीं होतीं।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

TMC का बागी गुट ECI से क्यों मिल रहा है?
TMC का बागी गुट भारत निर्वाचन आयोग से पार्टी के चुनाव चिह्न और पार्टी फंड पर अपना दावा पेश करने के लिए मिल रहा है। गुट का तर्क है कि उसके पास पश्चिम बंगाल विधानसभा में TMC के 80 में से 60 विधायकों का समर्थन है, इसलिए चुनाव चिह्न पर उसका अधिकार अधिक मजबूत है।
ऋतब्रत बनर्जी कौन हैं और वे TMC से क्यों बाहर हुए?
ऋतब्रत बनर्जी पश्चिम बंगाल विधानसभा के निष्कासित TMC विधायक हैं, जो अब पार्टी के 'बागी लेकिन बहुमत' गुट का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने 22 जून को 30 सदस्यीय नई राष्ट्रीय कार्यसमिति बनाकर ममता बनर्जी को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटाने का कदम उठाया, जिसके बाद पार्टी नेतृत्व से उनका टकराव खुलकर सामने आया।
चुनाव चिह्न पर दावे के लिए ECI का क्या नियम है?
निर्वाचन चिह्न (आरक्षण एवं आवंटन) आदेश, 1968 के अनुसार किसी क्षेत्रीय दल को अपना चुनाव चिह्न बनाए रखने के लिए कम से कम 6% वैध मत और न्यूनतम 2 विधायक होने आवश्यक हैं। बागी गुट का दावा है कि 60 विधायकों के समर्थन से उनके पास करीब 48 लाख वोट हैं, जो ECI की 37.80 लाख की सीमा से अधिक है।
TMC के बागी गुट ने नई कार्यसमिति में किसे अध्यक्ष बनाया?
22 जून को गठित नई 30 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यसमिति में ममता बनर्जी का नाम राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटाकर वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को यह जिम्मेदारी सौंपी गई। साथ ही 10 सदस्यीय उप-समिति का भी गठन किया गया।
ECI के फैसले का पश्चिम बंगाल की राजनीति पर क्या असर होगा?
ECI का फैसला तय करेगा कि TMC का चुनाव चिह्न किस गुट को मिलेगा — जो आगामी चुनावों में निर्णायक राजनीतिक लाभ होगा। यदि बागी गुट को चिह्न मिलता है, तो ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को नए चिह्न के साथ चुनाव लड़ना होगा, जो पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी के लिए बड़ा झटका होगा।
राष्ट्र प्रेस
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