टीएमसी बागी गुट का चुनाव चिह्न पर दावा: ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 10 विधायक गुरुवार को ईसीआई फुल बेंच से मिलेंगे
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला 'बागी लेकिन बहुमत' गुट गुरुवार, 3 जुलाई 2025 को नई दिल्ली स्थित भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के मुख्यालय में आयोग की पूर्ण पीठ (फुल बेंच) के समक्ष अपना पक्ष रखेगा। बागी गुट पार्टी के चुनाव चिह्न और पार्टी फंड पर अपना दावा पेश करेगा — जो पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी के भीतर चल रहे सबसे बड़े आंतरिक संकट की अगली कड़ी है।
प्रतिनिधिमंडल और बैठक का विवरण
ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 10 विधायकों का प्रतिनिधिमंडल बुधवार शाम नई दिल्ली के लिए रवाना हुआ। बनर्जी ने बताया कि आयोग ने गुरुवार को बैठक का समय तय किया है, जिसमें उनके गुट की दलीलें सुनी जाएंगी। बागी गुट की वकीलों की टीम पहले ही सभी प्रस्ताव और कानूनी दस्तावेज ECI के समक्ष जमा करा चुकी है।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह विवाद 22 जून को उस समय और गहरा गया जब बागी विधायकों ने 30 सदस्यीय नई राष्ट्रीय कार्यसमिति और 10 सदस्यीय उप-समिति का गठन किया। इस नई संरचना में पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का नाम राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटाकर वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को यह जिम्मेदारी सौंपी गई। गौरतलब है कि यह कदम पार्टी नेतृत्व को सीधी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
वर्तमान में पश्चिम बंगाल विधानसभा में TMC के 80 विधायक हैं। बागी गुट का दावा है कि इनमें से 60 विधायक उसके साथ हैं, जबकि केवल 20 विधायक ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के प्रति निष्ठावान 'मूल लेकिन अल्पमत' गुट के साथ हैं।
कानूनी दावे का आधार
इस पूरे विवाद का केंद्रीय कानूनी मुद्दा पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर नियंत्रण को लेकर है। निर्वाचन चिह्न (आरक्षण एवं आवंटन) आदेश, 1968 के अनुसार किसी क्षेत्रीय दल को अपना चुनाव चिह्न बनाए रखने के लिए कम से कम छह प्रतिशत वैध मत और कम से कम दो विधायक होने आवश्यक हैं।
बागी गुट का तर्क है कि यदि प्रति विधायक औसतन 80 हजार वोट भी माने जाएं, तो उनके 60 विधायकों के पक्ष में लगभग 48 लाख वोट बैठते हैं — जो ECI द्वारा निर्धारित छह प्रतिशत की सीमा, यानी करीब 37.80 लाख वोट, से काफी अधिक हैं। दूसरी ओर, बागी गुट का कहना है कि 'मूल लेकिन अल्पमत' गुट के पास केवल 20 विधायक हैं, इसलिए उनके हिस्से के वोट 37 लाख के आँकड़े तक नहीं पहुँचते।
आगे क्या होगा
ECI की पूर्ण पीठ दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद चुनाव चिह्न के आवंटन पर अपना निर्णय सुनाएगी। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ पृष्ठभूमि में शुरू हो चुकी हैं और चुनाव चिह्न का नियंत्रण किसी भी गुट के लिए राजनीतिक अस्तित्व का प्रश्न बन चुका है। ECI के फैसले का असर न केवल TMC के भविष्य पर, बल्कि पश्चिम बंगाल की समग्र राजनीतिक दिशा पर भी पड़ सकता है।