पश्चिम बंगाल: ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में TMC बागी गुट की पहली बैठक आज, 60 विधायक होंगे शामिल
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी विधायकों द्वारा गठित नए विधायी गुट की पहली औपचारिक बैठक गुरुवार, 4 जून को कोलकाता स्थित विधानसभा परिसर में होगी। सदन के रिकॉर्ड के अनुसार, यह नया गुट अब राज्य का आधिकारिक मुख्य विपक्षी दल और मान्यता प्राप्त विधायी समूह है, जिसकी अध्यक्षता उलुबेरिया (पूर्व) सीट से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी करेंगे।
बैठक में कौन-कौन शामिल
विधानसभा रिकॉर्ड के मुताबिक, ऋतब्रत बनर्जी अब सदन में तृणमूल कांग्रेस विधायी दल के नए गुट के आधिकारिक नेता और साथ ही नेता प्रतिपक्ष भी हैं। उन्हें नेता प्रतिपक्ष नामित करने वाले प्रस्ताव पर TMC के 58 विधायकों ने हस्ताक्षर किए थे, जिसे बुधवार को स्पीकर रथींद्र बोस ने स्वीकार कर लिया। हालाँकि, गुरुवार की बैठक में कुल 60 बागी विधायक शामिल होंगे।
ममता गुट सिमटकर 20 पर
इस विभाजन का सीधा अर्थ यह है कि पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे व पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी के प्रति निष्ठा रखने वाला मूल TMC गुट अब केवल 20 विधायकों तक सिमटकर रह गया है। उल्लेखनीय है कि 4 मई को घोषित विधानसभा चुनाव परिणामों में तृणमूल कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा था और 294 सीटों वाली विधानसभा में पार्टी की संख्या घटकर 80 रह गई थी।
बगावत की पटकथा: ‘सोची-समझी रणनीति’
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि जिस तरह ऋतब्रत और उनके सहयोगियों ने बगावत की पटकथा लिखी, वह एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा थी। कोलकाता के एक राजनीतिक पर्यवेक्षक ने बताया, ‘सबसे पहले ऋतब्रत और उनके साथी विधायक संदीपन साहा (उत्तरी कोलकाता की एंटाली सीट से) ने स्पीकर कार्यालय को सूचित किया कि अविभाजित TMC द्वारा जमा किए गए मूल प्रस्ताव में, जिसमें विपक्ष के लिए आरक्षित विधानसभा पदों हेतु विधायकों के नाम थे, कई हस्ताक्षरों में विसंगतियाँ हैं। जैसे ही इस मामले में आपराधिक जाँच विभाग (CID) की जाँच शुरू हुई, बगावत की चिंगारी भड़की और बुधवार को ममता बनर्जी द्वारा स्थापित पार्टी का विभाजन हो गया।’
नए गुट की रणनीति और सामाजिक समीकरण
पर्यवेक्षक के अनुसार, नया गुट बन जाने के बाद भी ऋतब्रत और उनकी टीम मूल गुट को और कमज़ोर करने तथा ममता-अभिषेक के बीच दूरी पैदा करने के प्रयासों में जुटी है। कथित तौर पर एक ओर ऋतब्रत ममता बनर्जी से नए गुट के सलाहकार के रूप में काम करने का आग्रह कर रहे हैं, तो दूसरी ओर उनकी टीम परोक्ष रूप से अभिषेक बनर्जी को पार्टी से निकालने की माँग उठा रही है।
नेताओं की नई टीम के गठन में सामाजिक प्रतिनिधित्व का विशेष ध्यान रखा गया है। पर्यवेक्षक के अनुसार, ‘नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत उच्च-वर्ग के ब्राह्मण परिवार से हैं। तीन उप-नेताओं में से शिउली साहा अनुसूचित जाति की महिला हैं, जावेद अहमद खान मुस्लिम हैं, और संदीपन व्यापारी समुदाय से आते हैं। नए गुट के मुख्य सचेतक अखरुज्जमां भी मुस्लिम समुदाय से हैं।’
आगे क्या
गुरुवार की बैठक से नए विपक्षी दल की संगठनात्मक दिशा और विधानसभा रणनीति स्पष्ट होने की उम्मीद है। राजनीतिक हलकों की नज़र इस पर भी है कि क्या ममता बनर्जी सलाहकार भूमिका स्वीकार करती हैं या मूल गुट के पुनर्गठन की कोशिश करेंगी।