पश्चिम बंगाल विधानसभा में TMC के दो गुटों के लिए अलग बैठक व्यवस्था, 60 बागी बनाम 17 वफादार
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विधायी दल में उभरी फूट के बाद 18 जून 2026 को दोनों गुटों — बागी और वफादार — के लिए सदन परिसर में अलग-अलग कमरों और बैठने की व्यवस्था की गई है। यह घटनाक्रम राज्य विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन सामने आया, जब दोनों खेमों के विधायक अलग-अलग स्थानों पर बैठे नज़र आए।
दो गुटों की संरचना
बागी और बहुमत वाले गुट का नेतृत्व ऋतब्रत बनर्जी कर रहे हैं, जिन्हें पार्टी से निष्कासित किया जा चुका है और जो आधिकारिक तौर पर विपक्ष के नेता हैं। दूसरी ओर, TMC प्रमुख ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के प्रति वफादार अल्पसंख्यक गुट का नेतृत्व शोभनदेव चट्टोपाध्याय कर रहे हैं, जो सदन के सबसे वरिष्ठ विधायक हैं।
राज्य विधानसभा में TMC के कुल 80 विधायक हैं। इनमें से 60 विधायक आधिकारिक रूप से बागी गुट में शामिल हैं। इस सप्ताह की शुरुआत में ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया था कि यह संख्या बढ़कर 64 हो गई है।
बजट सत्र में उपस्थिति का आँकड़ा
गुरुवार को बजट सत्र के पहले दिन बागी गुट के 58 विधायक सदन में उपस्थित थे, जबकि मूल वफादार गुट के केवल 17 विधायक ही मौजूद रहे। यह संख्यात्मक असंतुलन स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि बागी गुट का पलड़ा अभी भारी है।
वफादार गुट की रणनीति
अल्पसंख्यक गुट के विधायक कुणाल घोष ने पुष्टि की कि दोनों गुटों के लिए अलग-अलग कमरों में बैठने की व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि वफादार गुट के विधायकों ने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और राज्य संसदीय मामलों के मंत्री शंकर घोष से सदन में भाषण के लिए समय आवंटन को लेकर बातचीत की है।
कुणाल घोष ने स्पष्ट किया, 'मुख्यमंत्री और राज्य संसदीय मामलों के मंत्री ने हमें अलग से समय आवंटित करने का भरोसा दिया है। हम किसी भी हाल में समय आवंटन के लिए ऋतब्रत बनर्जी के पास नहीं जाएंगे।'
राजनीतिक विशेषज्ञों की राय
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्षी बेंच की यह स्थिति असाधारण और दुर्लभ है। कोलकाता के एक राजनीतिक जानकार के अनुसार, 'दोनों गुट आधिकारिक तौर पर तृणमूल कांग्रेस से हैं और दोनों के विधायक आधिकारिक रूप से TMC के विधायक हैं। फिर भी ये दोनों गुट दो अलग-अलग राजनीतिक ताकतों की तरह काम करेंगे।'
गौरतलब है कि यह संकट ऐसे समय में उभरा है जब पश्चिम बंगाल में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ पृष्ठभूमि में शुरू हो चुकी हैं और TMC के आंतरिक नेतृत्व को लेकर तनाव पहले से ही सतह पर था।
आगे क्या होगा
अब देखना यह होगा कि दल-बदल विरोधी कानून के तहत इन दोनों गुटों की स्थिति क्या रहती है, क्योंकि दोनों अभी भी आधिकारिक रूप से TMC के विधायक हैं। विधानसभा अध्यक्ष का रुख और न्यायिक हस्तक्षेप की संभावना आने वाले दिनों में इस संकट की दिशा तय करेगी।