8 अगस्त 2026
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पश्चिम बंगाल विधानसभा में TMC के दो गुटों के लिए अलग बैठक व्यवस्था, 60 बागी बनाम 17 वफादार

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पश्चिम बंगाल विधानसभा में TMC के दो गुटों के लिए अलग बैठक व्यवस्था, 60 बागी बनाम 17 वफादार

सारांश

पश्चिम बंगाल विधानसभा में TMC की फूट अब सदन के भीतर भी दिखने लगी है — बागी और वफादार गुट के लिए अलग-अलग कमरे और बैठक व्यवस्था। 80 में से 60 विधायक बागी खेमे में हैं, और बजट सत्र के पहले दिन यह संख्यात्मक असंतुलन खुलकर सामने आ गया।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल विधानसभा में TMC के दोनों गुटों के लिए 18 जून 2026 को अलग-अलग बैठक व्यवस्था लागू की गई।
बागी गुट का नेतृत्व पार्टी से निष्कासित ऋतब्रत बनर्जी कर रहे हैं; वफादार गुट का नेतृत्व शोभनदेव चट्टोपाध्याय के हाथ में है।
TMC के कुल 80 विधायकों में से 60 आधिकारिक रूप से बागी गुट में; ऋतब्रत बनर्जी का दावा — संख्या 64 तक पहुँची।
बजट सत्र के पहले दिन बागी गुट के 58 और वफादार गुट के 17 विधायक उपस्थित रहे।
वफादार गुट के विधायक कुणाल घोष ने कहा कि समय आवंटन के लिए वे ऋतब्रत बनर्जी के पास नहीं जाएंगे।

पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विधायी दल में उभरी फूट के बाद 18 जून 2026 को दोनों गुटों — बागी और वफादार — के लिए सदन परिसर में अलग-अलग कमरों और बैठने की व्यवस्था की गई है। यह घटनाक्रम राज्य विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन सामने आया, जब दोनों खेमों के विधायक अलग-अलग स्थानों पर बैठे नज़र आए।

दो गुटों की संरचना

बागी और बहुमत वाले गुट का नेतृत्व ऋतब्रत बनर्जी कर रहे हैं, जिन्हें पार्टी से निष्कासित किया जा चुका है और जो आधिकारिक तौर पर विपक्ष के नेता हैं। दूसरी ओर, TMC प्रमुख ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के प्रति वफादार अल्पसंख्यक गुट का नेतृत्व शोभनदेव चट्टोपाध्याय कर रहे हैं, जो सदन के सबसे वरिष्ठ विधायक हैं।

राज्य विधानसभा में TMC के कुल 80 विधायक हैं। इनमें से 60 विधायक आधिकारिक रूप से बागी गुट में शामिल हैं। इस सप्ताह की शुरुआत में ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया था कि यह संख्या बढ़कर 64 हो गई है।

बजट सत्र में उपस्थिति का आँकड़ा

गुरुवार को बजट सत्र के पहले दिन बागी गुट के 58 विधायक सदन में उपस्थित थे, जबकि मूल वफादार गुट के केवल 17 विधायक ही मौजूद रहे। यह संख्यात्मक असंतुलन स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि बागी गुट का पलड़ा अभी भारी है।

वफादार गुट की रणनीति

अल्पसंख्यक गुट के विधायक कुणाल घोष ने पुष्टि की कि दोनों गुटों के लिए अलग-अलग कमरों में बैठने की व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि वफादार गुट के विधायकों ने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और राज्य संसदीय मामलों के मंत्री शंकर घोष से सदन में भाषण के लिए समय आवंटन को लेकर बातचीत की है।

कुणाल घोष ने स्पष्ट किया, 'मुख्यमंत्री और राज्य संसदीय मामलों के मंत्री ने हमें अलग से समय आवंटित करने का भरोसा दिया है। हम किसी भी हाल में समय आवंटन के लिए ऋतब्रत बनर्जी के पास नहीं जाएंगे।'

राजनीतिक विशेषज्ञों की राय

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्षी बेंच की यह स्थिति असाधारण और दुर्लभ है। कोलकाता के एक राजनीतिक जानकार के अनुसार, 'दोनों गुट आधिकारिक तौर पर तृणमूल कांग्रेस से हैं और दोनों के विधायक आधिकारिक रूप से TMC के विधायक हैं। फिर भी ये दोनों गुट दो अलग-अलग राजनीतिक ताकतों की तरह काम करेंगे।'

गौरतलब है कि यह संकट ऐसे समय में उभरा है जब पश्चिम बंगाल में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ पृष्ठभूमि में शुरू हो चुकी हैं और TMC के आंतरिक नेतृत्व को लेकर तनाव पहले से ही सतह पर था।

आगे क्या होगा

अब देखना यह होगा कि दल-बदल विरोधी कानून के तहत इन दोनों गुटों की स्थिति क्या रहती है, क्योंकि दोनों अभी भी आधिकारिक रूप से TMC के विधायक हैं। विधानसभा अध्यक्ष का रुख और न्यायिक हस्तक्षेप की संभावना आने वाले दिनों में इस संकट की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो दल-बदल विरोधी कानून की सीमाओं को उजागर करती है। 80 में से 60 विधायकों का बागी होना ममता बनर्जी के नेतृत्व पर गंभीर प्रश्नचिह्न है, लेकिन चूँकि दोनों गुट अभी भी आधिकारिक रूप से TMC के हैं, इसलिए अयोग्यता की कार्रवाई कानूनी रूप से जटिल बनी हुई है। मुख्यधारा की कवरेज इस संख्यात्मक नाटक पर केंद्रित है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या विधानसभा अध्यक्ष इस अभूतपूर्व स्थिति में तटस्थ रह सकते हैं। यह संकट आने वाले चुनावों से पहले TMC की संगठनात्मक कमज़ोरी को उजागर करता है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल विधानसभा में TMC के दोनों गुटों के लिए अलग बैठक व्यवस्था क्यों की गई?
TMC में आंतरिक फूट के बाद बागी और वफादार गुट के विधायकों के बीच गहरे मतभेद उभरे हैं, जिसके चलते दोनों गुटों के लिए सदन परिसर में अलग-अलग कमरों और बैठक की व्यवस्था की गई है। दोनों गुट अभी भी आधिकारिक रूप से TMC के विधायक हैं, लेकिन अलग राजनीतिक ताकतों की तरह काम कर रहे हैं।
TMC के बागी गुट में कितने विधायक हैं?
पश्चिम बंगाल विधानसभा में TMC के कुल 80 विधायकों में से 60 आधिकारिक रूप से बागी गुट में हैं। बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया है कि यह संख्या बढ़कर 64 हो गई है, हालाँकि बजट सत्र के पहले दिन 58 विधायक उपस्थित रहे।
ऋतब्रत बनर्जी और शोभनदेव चट्टोपाध्याय की भूमिका क्या है?
पार्टी से निष्कासित ऋतब्रत बनर्जी आधिकारिक विपक्ष के नेता हैं और बागी बहुमत गुट का नेतृत्व करते हैं। शोभनदेव चट्टोपाध्याय, जो सदन के सबसे वरिष्ठ विधायक हैं, ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के प्रति वफादार अल्पसंख्यक गुट का नेतृत्व कर रहे हैं।
वफादार गुट के विधायक सदन में भाषण का समय कैसे प्राप्त करेंगे?
वफादार गुट के विधायक कुणाल घोष के अनुसार, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और राज्य संसदीय मामलों के मंत्री शंकर घोष ने उन्हें अलग से समय आवंटित करने का भरोसा दिया है। वफादार गुट ने स्पष्ट किया है कि वे समय आवंटन के लिए बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी के पास नहीं जाएंगे।
TMC की इस आंतरिक फूट का राजनीतिक महत्व क्या है?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह स्थिति पश्चिम बंगाल विधानसभा में अत्यंत दुर्लभ और असाधारण है — एक ही पार्टी के दो गुट दो अलग राजनीतिक ताकतों की तरह काम कर रहे हैं। यह संकट आगामी विधानसभा चुनावों से पहले TMC की संगठनात्मक स्थिति और दल-बदल विरोधी कानून की सीमाओं पर बड़े सवाल खड़े करता है।
राष्ट्र प्रेस
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