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पश्चिम बंगाल राज्यसभा उपचुनाव: भाजपा के क्लीन स्वीप के आसार, TMC के दोनों गुट कमज़ोर

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पश्चिम बंगाल राज्यसभा उपचुनाव: भाजपा के क्लीन स्वीप के आसार, TMC के दोनों गुट कमज़ोर

सारांश

24 जुलाई को पश्चिम बंगाल की तीन राज्यसभा सीटों पर होने वाला उपचुनाव ममता बनर्जी के लिए दोहरा संकट लेकर आया है — एक तरफ भाजपा का 206 विधायकों का संख्या-बल, दूसरी तरफ TMC का गुटीय विभाजन। क्लीन स्वीप की स्थिति में पार्टी के नाम और चिह्न पर कानूनी लड़ाई और तीखी हो सकती है।

मुख्य बातें

24 जुलाई 2026 को पश्चिम बंगाल की तीन राज्यसभा सीटों पर उपचुनाव होना है।
भाजपा के पास 206 विधायक हैं, जो तीनों सीटें जीतने के लिए पर्याप्त माने जा रहे हैं।
तृणमूल कांग्रेस दो गुटों में बँटी है — ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 62-65 विधायक , बाकी ममता बनर्जी के कालीघाट गुट के साथ।
दोनों में से कोई भी TMC गुट अकेले एक राज्यसभा सीट जीतने की स्थिति में नहीं है।
चुनाव आयोग के समक्ष 'वास्तविक TMC' की पहचान को लेकर फैसला अभी लंबित है।
चुनाव परिणाम पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर चल रहे कानूनी विवाद को और गहरा कर सकता है।

पश्चिम बंगाल में 24 जुलाई 2026 को होने वाले राज्यसभा उपचुनाव में तीनों सीटें भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खाते में जाने की प्रबल संभावना जताई जा रही है। मौजूदा विधानसभा गणित और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर गहरे गुटीय विभाजन के चलते ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले कालीघाट गुट के लिए यह चुनाव अस्तित्व की परीक्षा बन गया है।

विधानसभा गणित: भाजपा की निर्णायक बढ़त

राज्यसभा चुनाव में एकल हस्तांतरणीय मत (Single Transferable Vote) प्रणाली लागू होती है, जिसमें विधानसभा की संख्या-शक्ति ही निर्णायक होती है। आंकड़ों के अनुसार, भाजपा के पास फिलहाल 206 विधायक हैं — जो तीनों सीटें जीतने के लिए आवश्यक प्रथम वरीयता मतों से अधिक है।

गौरतलब है कि विधानसभा की प्रभावी सदस्य संख्या 294 से कम हो गई है। सुवेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम सीट छोड़कर भवानीपुर से चुनाव लड़ा था, जहाँ उन्होंने ममता बनर्जी को पराजित किया था। इसके अलावा पूर्व तृणमूल नेता हुमायूँ कबीर के दो सीटों से जीतने के कारण एक सीट रिक्त है।

TMC में गुटीय दरार: दोनों खेमे कमज़ोर

रिपोर्टों के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस इस समय दो गुटों में बँटी हुई है। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट के साथ लगभग 62 से 65 विधायक बताए जा रहे हैं, जबकि शेष विधायक ममता बनर्जी के कालीघाट गुट के साथ हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब चुनाव आयोग के समक्ष यह फैसला भी लंबित है कि 'वास्तविक' तृणमूल कांग्रेस का संगठन कौन-सा है। इस विभाजन की स्थिति में दोनों में से कोई भी गुट अकेले राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए आवश्यक संख्या तक नहीं पहुँच पा रहा।

ममता बनर्जी के लिए दोहरा संकट

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 24 जुलाई को कालीघाट गुट का कोई सीट न जीत पाना महज़ प्रतीकात्मक हार नहीं होगी। इससे पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे कानूनी विवाद में बागी गुट की स्थिति मज़बूत हो सकती है और ममता बनर्जी का संगठन पर दावा कमज़ोर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, अतीत में भी दलों में टूट और विधायकों के पाला बदलने से राज्यसभा चुनावों के नतीजे प्रभावित होते रहे हैं। कई मौकों पर क्षेत्रीय दलों के विधायकों के भाजपा के साथ जाने से राज्यसभा का गणित बदला है।

आगे क्या: कानूनी लड़ाई और नेतृत्व संघर्ष

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इस चुनाव परिणाम के बाद TMC के भीतर नेतृत्व और पार्टी की पहचान को लेकर संघर्ष और तेज़ हो सकता है। 'असली टीएमसी कौन है' — इस सवाल पर आगे और टूट-फूट या कानूनी लड़ाइयों की संभावना भी बढ़ सकती है।

ममता बनर्जी को लंबे समय से विपरीत परिस्थितियों में भी डटे रहने वाली नेता के रूप में देखा जाता रहा है और वे इससे पहले भी कई कठिन दौरों से उबर चुकी हैं। लेकिन 24 जुलाई का नतीजा उनके राजनीतिक भविष्य और पार्टी पर नियंत्रण, दोनों के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह है कि इस हार से बागी गुट को चुनाव आयोग की लड़ाई में नैतिक बल मिल सकता है। यह वही पैटर्न है जो शरद पवार बनाम अजित पवार और उद्धव ठाकरे बनाम एकनाथ शिंदे विवादों में देखा गया — जहाँ चुनावी प्रदर्शन और संख्या-बल ने कानूनी दावों को आकार दिया। मुख्यधारा की कवरेज भाजपा की जीत पर केंद्रित है, लेकिन असली कहानी यह है कि TMC के भीतर नेतृत्व-संघर्ष अब संसदीय प्रतिनिधित्व की लड़ाई बन चुका है।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल राज्यसभा उपचुनाव कब होगा और किन सीटों पर?
पश्चिम बंगाल की तीन राज्यसभा सीटों पर 24 जुलाई 2026 को उपचुनाव होना है। इन सीटों पर मतदान एकल हस्तांतरणीय मत (Single Transferable Vote) प्रणाली के तहत विधायकों द्वारा किया जाएगा।
भाजपा के क्लीन स्वीप की संभावना क्यों है?
भाजपा के पास पश्चिम बंगाल विधानसभा में फिलहाल 206 विधायक हैं, जो राज्यसभा की तीनों सीटें जीतने के लिए आवश्यक प्रथम वरीयता मतों से अधिक है। इसके विपरीत, तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुट मिलकर भी एक सीट जीतने की स्थिति में नहीं हैं।
तृणमूल कांग्रेस के दो गुट कौन-से हैं और उनके पास कितने विधायक हैं?
TMC इस समय दो गुटों में बँटी है। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट के साथ लगभग 62 से 65 विधायक बताए जा रहे हैं, जबकि शेष विधायक ममता बनर्जी के कालीघाट गुट के साथ हैं। दोनों में से कोई भी गुट अकेले एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए पर्याप्त नहीं है।
इस चुनाव परिणाम का ममता बनर्जी और TMC पर क्या असर होगा?
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कालीघाट गुट कोई सीट नहीं जीत पाता, तो इससे ममता बनर्जी का पार्टी संगठन पर दावा कमज़ोर पड़ सकता है। पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चुनाव आयोग में चल रहे विवाद में बागी गुट की स्थिति मज़बूत हो सकती है।
'वास्तविक TMC' को लेकर चुनाव आयोग में क्या मामला है?
चुनाव आयोग के समक्ष यह फैसला लंबित है कि तृणमूल कांग्रेस के दो गुटों में से 'वास्तविक' संगठन कौन-सा है। राज्यसभा उपचुनाव का परिणाम इस कानूनी लड़ाई को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि चुनावी प्रदर्शन और संख्या-बल अक्सर ऐसे विवादों में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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